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एक ज्वाइंट कमिश्नर की हत्या हो चुकी
Kanpur
Updated Mon, 17 Nov 2014 05:30 AM IST
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कानपुर। वाणिज्य कर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर रत्न शंकर मिश्रा को गोली मारे जाने की घटना से करीब सात पहले हुए इसी विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर अजयराज सिंह हत्याकांड की याद विभागीय कर्मचारियों को जेहन में ताजा हो गई। अभयराज की हत्या उनके फ्लैट में ही कर दी गई थी। बदमाशों ने उनके हाथ-पैर रस्सियों से बांधकर मुंह में रस्सी भर कर टेप लगा दिया था। फिर गला रेत कर और सिर कूचकर हत्या कर दी थी। मामले की जांच पुलिस ने की और फिर सीबीसीआईडी ने लेकिन हत्यारों और हत्या की वजह का पता नहीं चला। आखिर सीबीसीआईडी ने इस हाइप्रोफाइल हत्याकांड में क्लोजर रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी।
व्यापार कर विभाग (अब वाणिज्य कर) के तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर (प्रशासन) अभयराज सिंह नवाबगंज के लखनपुर में बाला जी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 103 में अकेले रहते थे। परिवार लखनऊ में रहता था। 4 मई 2007 को अभयराज की उनके फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। उनका शव बिस्तर पर आधा लटका मिला था। हत्यारे हत्या करने के बाद फ्लैट में बाहर से ताला डालकर चले गए थे। उनका कार ड्राइवर मकसूद अख्तर फ्लैट में ताला लगा देख सीधा दफ्तर चला गया था। वहां भी दोपहर तक वह नहीं पहुंचे तो तलाश शुरू हुई। उनका मोबाइल सुबह से ही स्विच आफ था। तब पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा तोड़ा तो अंदर लाश मिली थी।
तब नवाबंगज थानाप्रभारी रहे जयराम सिंह ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज की थी। थोड़े दिन बाद इंस्पेक्टर जयराम सिंह को हटाकर इंस्पेक्टर अशोक सिंह को नवाबंगज का कार्यभार सौंपा गया था। इंस्पेक्टर अशोक सिंह (वर्तमान में सीओ शाहबाद शाहजहांपुर) ने विवेचना शुरू की। उन्होंने बताया कि उन्नाव की मांस एक्सपोर्ट करने वाली एक कंपनी पर अभयराज ने टैक्स लगाया था। कंपनी वालों का कहना था कि मांस खुला बेचा जाता है जबकि असिस्टेंट कमिश्नर ने डिब्बा बंद मांस बेचे जाने लेकर टैक्स लगाया था। उस वक्त नवाबगंज में रहने वाले मांस कंपनी के मैनेजर से भी पूछताछ की गई थी। कंपनी के मुंबई स्थित हेड ऑफिस तक पुलिस टीम जांच करने गई थी। सबंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार और एक कांस्टेबल ने करीब दो महीने तक मुंबई में रहकर संदिग्धों के फोन सुने थे। परिवार वालों को भी शक के दायरे में लेकर पड़ताल की गई थी। यह भी पता चला था कि अभयराज के एक करीबी रिश्तेदार से भी उनकी खटपट रहती थी। इस बिन्दु पर भी जांच की गई थी। महीनों जांच चली। फिर शासन ने मामला सीबीसीआईडी को ट्रांसफर कर दिया था। बकौल सीओ उन्होंने सीबीसीआईडी की जांच में हर संभव मदद की। संदिग्धों के नाम और मोबाइल नंबर तक विवेचनाधिकारी को दिए थे पर नतीजा सिफर रहा।
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व्यापार कर विभाग (अब वाणिज्य कर) के तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर (प्रशासन) अभयराज सिंह नवाबगंज के लखनपुर में बाला जी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 103 में अकेले रहते थे। परिवार लखनऊ में रहता था। 4 मई 2007 को अभयराज की उनके फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। उनका शव बिस्तर पर आधा लटका मिला था। हत्यारे हत्या करने के बाद फ्लैट में बाहर से ताला डालकर चले गए थे। उनका कार ड्राइवर मकसूद अख्तर फ्लैट में ताला लगा देख सीधा दफ्तर चला गया था। वहां भी दोपहर तक वह नहीं पहुंचे तो तलाश शुरू हुई। उनका मोबाइल सुबह से ही स्विच आफ था। तब पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा तोड़ा तो अंदर लाश मिली थी।
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तब नवाबंगज थानाप्रभारी रहे जयराम सिंह ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज की थी। थोड़े दिन बाद इंस्पेक्टर जयराम सिंह को हटाकर इंस्पेक्टर अशोक सिंह को नवाबंगज का कार्यभार सौंपा गया था। इंस्पेक्टर अशोक सिंह (वर्तमान में सीओ शाहबाद शाहजहांपुर) ने विवेचना शुरू की। उन्होंने बताया कि उन्नाव की मांस एक्सपोर्ट करने वाली एक कंपनी पर अभयराज ने टैक्स लगाया था। कंपनी वालों का कहना था कि मांस खुला बेचा जाता है जबकि असिस्टेंट कमिश्नर ने डिब्बा बंद मांस बेचे जाने लेकर टैक्स लगाया था। उस वक्त नवाबगंज में रहने वाले मांस कंपनी के मैनेजर से भी पूछताछ की गई थी। कंपनी के मुंबई स्थित हेड ऑफिस तक पुलिस टीम जांच करने गई थी। सबंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार और एक कांस्टेबल ने करीब दो महीने तक मुंबई में रहकर संदिग्धों के फोन सुने थे। परिवार वालों को भी शक के दायरे में लेकर पड़ताल की गई थी। यह भी पता चला था कि अभयराज के एक करीबी रिश्तेदार से भी उनकी खटपट रहती थी। इस बिन्दु पर भी जांच की गई थी। महीनों जांच चली। फिर शासन ने मामला सीबीसीआईडी को ट्रांसफर कर दिया था। बकौल सीओ उन्होंने सीबीसीआईडी की जांच में हर संभव मदद की। संदिग्धों के नाम और मोबाइल नंबर तक विवेचनाधिकारी को दिए थे पर नतीजा सिफर रहा।
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