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मालगोदाम सीपीसी बस्ती खाली करने की नोटिस
Kanpur
Updated Mon, 10 Nov 2014 05:30 AM IST
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कानपुर। रेलवे प्रशासन ने रेलवे मालगोदाम स्थित 60 साल पुरानी सीपीसी मलिन बस्ती को खाली कराने की नोटिस जारी कर दी है। बस्ती को खाली कराने के लिए 29 नवंबर तक का समय दिया गया।इससे बस्ती में निवास कर रहे दस हजार से अधिक बाशिंदों में हड़कंप मच गया है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि रेलवे प्रशासन जबरन जमीन खाली करा रहा है। जबकि जमीन सिंचाई विभाग की है। कई सालों पहले यह पट्टे पर दी गई थी कुछ लोगों ने लंबे समय तक इसका टैक्स भी दिया है।
रेलवे गोदाम के अंदर बनी सीपीसी मलिन बस्ती करीब साठ साल पहले बसी थी। बस्ती में बने लगभग दो हजार घरों में दस हजार से अधिक आबादी निवास कर रही है। जिनके पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी सहित सभी दस्तावेज हैं। रेलवे प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होेने के बाद बस्ती में मातम सा छा गया है। क्षेत्रीय चंद्रप्रकाश शिवहरे का कहना है कि रेलवे बोर्ड इलाहाबाद के डीआरएम ने वर्ष 2002 में जमीन की नाप जोख कराई थी। इसमें लिखित रूप से इस जमीन को रेलवे से अलग बताया था। इसकी रिपोर्ट हमारे पास मौजूद है। रेलवे के नक्शे में भी स्पष्ट दिखाया गया है कि यह जमीन रेलवे कालोनियों से दूर है। इसके बावजूद भी रेलवे के अधिकारी जबरन हस्तक्षेप कर जमीन खाली कराने का प्रयास कर रहे हैं। रविवार को विधायक सलिल विश्नोई ने बस्ती के लोगों को सांत्वना देते हुए आर पार की लड़ाई लड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि जमीन संबंधी सभी कागजात तलाशें, इस लड़ाई में जीत निश्चित होगी।
मलिन बस्ती रेलवे की जमीन पर बनी है। इस कारण ही नोटिस जारी किया गया है। इसके बावजूद भी अगर लोगों का कहना है कि जमीन सिंचाई विभाग की है तो दोबारा पड़ताल की जाएगी। अगर बस्ती रेलवे की जमीन पर बनी है तभी इसे खाली कराया जाएगा।
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नवीन बाबू, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी उत्तर मध्य रेलवे
इस मलिन बस्ती के संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन सिंचाई विभाग किसी को जमीन का पट्टा नहीं करता। लोग जो बोल रहे हैं वो गलत है। नक्शा निकलवा कर ही जमीन की जांच की जाएगी।
डीके तिवारी, अधिशाषी अभियंता, निचली गंगा नहर
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रेलवे गोदाम के अंदर बनी सीपीसी मलिन बस्ती करीब साठ साल पहले बसी थी। बस्ती में बने लगभग दो हजार घरों में दस हजार से अधिक आबादी निवास कर रही है। जिनके पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी सहित सभी दस्तावेज हैं। रेलवे प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होेने के बाद बस्ती में मातम सा छा गया है। क्षेत्रीय चंद्रप्रकाश शिवहरे का कहना है कि रेलवे बोर्ड इलाहाबाद के डीआरएम ने वर्ष 2002 में जमीन की नाप जोख कराई थी। इसमें लिखित रूप से इस जमीन को रेलवे से अलग बताया था। इसकी रिपोर्ट हमारे पास मौजूद है। रेलवे के नक्शे में भी स्पष्ट दिखाया गया है कि यह जमीन रेलवे कालोनियों से दूर है। इसके बावजूद भी रेलवे के अधिकारी जबरन हस्तक्षेप कर जमीन खाली कराने का प्रयास कर रहे हैं। रविवार को विधायक सलिल विश्नोई ने बस्ती के लोगों को सांत्वना देते हुए आर पार की लड़ाई लड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि जमीन संबंधी सभी कागजात तलाशें, इस लड़ाई में जीत निश्चित होगी।
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मलिन बस्ती रेलवे की जमीन पर बनी है। इस कारण ही नोटिस जारी किया गया है। इसके बावजूद भी अगर लोगों का कहना है कि जमीन सिंचाई विभाग की है तो दोबारा पड़ताल की जाएगी। अगर बस्ती रेलवे की जमीन पर बनी है तभी इसे खाली कराया जाएगा।
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नवीन बाबू, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी उत्तर मध्य रेलवे
इस मलिन बस्ती के संदर्भ में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन सिंचाई विभाग किसी को जमीन का पट्टा नहीं करता। लोग जो बोल रहे हैं वो गलत है। नक्शा निकलवा कर ही जमीन की जांच की जाएगी।
डीके तिवारी, अधिशाषी अभियंता, निचली गंगा नहर