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देखकर टैलेंट, गदगद हुए प्रेसिडेंट
Kanpur
Updated Sat, 06 Jul 2013 05:31 AM IST
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कानपुर। आईआईटी के 45वें दीक्षांत समारोह में डिग्री, उपाधि और मेडल पाकर आईआईटियंस चहक उठे। टोपी हवा में उछाली और हिप-हिप हुर्रे... बोलकर खुशी का इजहार किया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से डिग्री, उपाधि पाने को कभी न भूलने वाला पल बताकर आडिटोरियम से बाहर निकले और पूरे कैंपस में घूम-घूमकर अपने साथियों के साथ जश्न मनाया। आईआईटियंस के साथ आए उनके पैरेंट्स ने जश्न में उनका दिल खोलकर साथ दिया।
निर्धारित कार्यक्रम के तहत ठीक दोपहर 12:15 बजे दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की फ्लीट आडिटोरियम ग्राउंड पहुंची। ग्राउंड के पास ही समारोह की शोभायात्रा शुरू हुई, जो आडिटोरियम के मंच पर आकर समाप्त हुई। फिर बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के चेयरमैन प्रो. एम आनंद कृष्णन ने दीक्षांत समारोह शुरू करने की घोषणा की। राष्ट्रपति ने सबसे पहले इंफोसिस के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन एनआर नारायण मूर्ति और फिजिक्स के प्रो. आनंद सेन को मानद उपाधि दी। इसके बाद आईआईटी के ओवरऑल टॉपर कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के स्टूडेंट शुभम तुलस्यानी को प्रेसिडेंट और डायरेक्टर गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया। यह दूसरा मौका है, जब आईआईटी के किसी स्टूडेंट को दोनों गोल्ड मेडल एक साथ दिए गए हैं। इससे पहले 2005 में शुभम के ही सगे भाई मधुर तुलस्यानी ने यह उपलब्धि हासिल की थी। यह बात पता चलने पर राष्ट्रपति इतने खुश हो गए कि उन्होंने न सिर्फ शुभम की पीठ थपथपाई बल्कि खुद शुभम से हाथ मिलाकर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
इसके बाद राष्ट्रपति ने रतन स्वरूप मेमोरियल पुरस्कार पाने वाले केमिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट प्रांजल सक्सेना को मेडल, डिग्री देकर सम्मानित किया। एयरो स्पेस इंजीनियरिंग के कार्तिक केएन को डॉ. शंकर दयाल शर्मा मेडल मिला। कैंडेंस गोल्ड मेडल मेकेनिकल इंजीनियरिंग के तन्मय चटर्जी को मिला, लेकिन वे दीक्षांत समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। समारोह में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और रिसर्च के 1,327 स्टूडेंट्स को डिग्री और उपाधियां दी गईं। 88 मेधावियों को मेडल भी मिले।
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समारोह के दौरान डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने आईआईटी की प्रगति रिपोर्ट पेश की। बताया कि अब पोस्ट ग्रेजुएट एजूकेशन और रिसर्च पर ज्यादा फोकस होगा। इस बार पीएचडी की 132 उपाधियां दी गई हैं, जो अब तक का रिकार्ड है। अगली बार 200 उपाधियां देने की कोशिश होगी। डायरेक्टर ने आईआईटी की धाक विश्व पटल पर जमाने का भरोसा भी दिलाया। समारोह का संचालक डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. धीरज सांगी ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, डीन स्टूडेंट्स ऑफ अफेयर्स प्रो. एके घोष, प्रो. पी मुंशी, रजिस्ट्रार डॉ. आरके सचान मौजूद रहे।
अमेरिका में रिसर्च करेंगे शुभम
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के मेधावी शुभम तुलस्यानी को प्रेसिडेंट, डायरेक्टर गोल्ड मेडल मिला। शुभम जोधपुर के रहने वाले हैं। उनकी क्युमलेटिव परफारमेंस इंडेक्स (सीपीआई) 10 में 9.9 है। वह अमेरिका की बर्कले यूनिवर्सिटी से पीएचडी करेंगे। शुभम की मां डॉ. राजकुमारी, पिता डॉ. केएल तुलस्यानी पेशे के डॉक्टर हैं। एक अप्रैल 1992 को पैदा हुए शुभम ऑल टाइम टॉपर हैं। हाईस्कूल में 93 फीसदी, इंटरमीडिएट में 90.2 फीसदी मार्क्स मिले हैं। 2009 की जेईई में उनकी आल इंडिया रैंक दो थी। शुभम कंप्यूटर विजन पर रिसर्च करना चाह रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में रिसर्च की व्यवस्था ठीक हुई तो अमेरिका से आया जा सकता है। शुभम प्रशासनिक सेवा में नहीं जाना चाहते हैं। वह कहते हैं कि पब्लिक डीलिंग टफ है।
एमएनसी में काम करेंगे प्रांजल
केमिकल इंजीनियरिंग के प्रांजल सक्सेना को रतन स्वरूप मेमोरियल अवार्ड दिया गया। उनकी सीपीआई 9.5 है। वह बरेली के रहने वाले हैं। प्रारंभिक शिक्षा कानपुर से हुई है। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी से जुड़े हैं। सालाना 14 लाख रुपये का वेतन पाएंगे। पिता संजीव कुमार सक्सेना आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड कोलकाता में डिप्टी डायरेक्टर जनरल हैं। उनकी पोस्टिंग कानपुर में रही है। वह एचबीटीआई से बीटेक भी हैं। प्रांजल ने वीरेंद्र स्वरूप शारदा नगर और सर पदमपत सिंहानिया से पढ़ाई की है। आठ अगस्त 1991 को पैदा हुए प्रांजल भी ऑल टाइम टॉपर हैं। हाईस्कूल में 97.4 फीसदी, इंटरमीडिएट में 93 फीसदी मार्क्स पाकर टॉपर बने थे। बेटे की सफलता से मां नीरज सक्सेना भी उत्साहित दिखीं। प्रांजल की बहन प्रियांशी भी आईआईटी से बीटेक करना चाह रही हैं।
तन्मय की कमी खली
एयरो स्पेस इंजीनियरिंग के कार्तिक केएन को डॉ. शंकर दयाल शर्मा अवार्ड मिला है। उनकी सीपीआई 9.7 है। एमटेक के तन्मय चटर्जी को कैंडस अवार्ड दिया गया है। हालांकि तन्मय दीक्षांत समारोह में नहीं आ सके। वह उच्च शिक्षा के सिलसिले में विदेश गए हुए हैं। इस मौके पर तन्मय के साथियों को उनकी कमी खली।
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निर्धारित कार्यक्रम के तहत ठीक दोपहर 12:15 बजे दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की फ्लीट आडिटोरियम ग्राउंड पहुंची। ग्राउंड के पास ही समारोह की शोभायात्रा शुरू हुई, जो आडिटोरियम के मंच पर आकर समाप्त हुई। फिर बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के चेयरमैन प्रो. एम आनंद कृष्णन ने दीक्षांत समारोह शुरू करने की घोषणा की। राष्ट्रपति ने सबसे पहले इंफोसिस के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन एनआर नारायण मूर्ति और फिजिक्स के प्रो. आनंद सेन को मानद उपाधि दी। इसके बाद आईआईटी के ओवरऑल टॉपर कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के स्टूडेंट शुभम तुलस्यानी को प्रेसिडेंट और डायरेक्टर गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया। यह दूसरा मौका है, जब आईआईटी के किसी स्टूडेंट को दोनों गोल्ड मेडल एक साथ दिए गए हैं। इससे पहले 2005 में शुभम के ही सगे भाई मधुर तुलस्यानी ने यह उपलब्धि हासिल की थी। यह बात पता चलने पर राष्ट्रपति इतने खुश हो गए कि उन्होंने न सिर्फ शुभम की पीठ थपथपाई बल्कि खुद शुभम से हाथ मिलाकर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
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इसके बाद राष्ट्रपति ने रतन स्वरूप मेमोरियल पुरस्कार पाने वाले केमिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट प्रांजल सक्सेना को मेडल, डिग्री देकर सम्मानित किया। एयरो स्पेस इंजीनियरिंग के कार्तिक केएन को डॉ. शंकर दयाल शर्मा मेडल मिला। कैंडेंस गोल्ड मेडल मेकेनिकल इंजीनियरिंग के तन्मय चटर्जी को मिला, लेकिन वे दीक्षांत समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। समारोह में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और रिसर्च के 1,327 स्टूडेंट्स को डिग्री और उपाधियां दी गईं। 88 मेधावियों को मेडल भी मिले।
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समारोह के दौरान डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने आईआईटी की प्रगति रिपोर्ट पेश की। बताया कि अब पोस्ट ग्रेजुएट एजूकेशन और रिसर्च पर ज्यादा फोकस होगा। इस बार पीएचडी की 132 उपाधियां दी गई हैं, जो अब तक का रिकार्ड है। अगली बार 200 उपाधियां देने की कोशिश होगी। डायरेक्टर ने आईआईटी की धाक विश्व पटल पर जमाने का भरोसा भी दिलाया। समारोह का संचालक डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. धीरज सांगी ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, डीन स्टूडेंट्स ऑफ अफेयर्स प्रो. एके घोष, प्रो. पी मुंशी, रजिस्ट्रार डॉ. आरके सचान मौजूद रहे।
अमेरिका में रिसर्च करेंगे शुभम
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के मेधावी शुभम तुलस्यानी को प्रेसिडेंट, डायरेक्टर गोल्ड मेडल मिला। शुभम जोधपुर के रहने वाले हैं। उनकी क्युमलेटिव परफारमेंस इंडेक्स (सीपीआई) 10 में 9.9 है। वह अमेरिका की बर्कले यूनिवर्सिटी से पीएचडी करेंगे। शुभम की मां डॉ. राजकुमारी, पिता डॉ. केएल तुलस्यानी पेशे के डॉक्टर हैं। एक अप्रैल 1992 को पैदा हुए शुभम ऑल टाइम टॉपर हैं। हाईस्कूल में 93 फीसदी, इंटरमीडिएट में 90.2 फीसदी मार्क्स मिले हैं। 2009 की जेईई में उनकी आल इंडिया रैंक दो थी। शुभम कंप्यूटर विजन पर रिसर्च करना चाह रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में रिसर्च की व्यवस्था ठीक हुई तो अमेरिका से आया जा सकता है। शुभम प्रशासनिक सेवा में नहीं जाना चाहते हैं। वह कहते हैं कि पब्लिक डीलिंग टफ है।
एमएनसी में काम करेंगे प्रांजल
केमिकल इंजीनियरिंग के प्रांजल सक्सेना को रतन स्वरूप मेमोरियल अवार्ड दिया गया। उनकी सीपीआई 9.5 है। वह बरेली के रहने वाले हैं। प्रारंभिक शिक्षा कानपुर से हुई है। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी से जुड़े हैं। सालाना 14 लाख रुपये का वेतन पाएंगे। पिता संजीव कुमार सक्सेना आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड कोलकाता में डिप्टी डायरेक्टर जनरल हैं। उनकी पोस्टिंग कानपुर में रही है। वह एचबीटीआई से बीटेक भी हैं। प्रांजल ने वीरेंद्र स्वरूप शारदा नगर और सर पदमपत सिंहानिया से पढ़ाई की है। आठ अगस्त 1991 को पैदा हुए प्रांजल भी ऑल टाइम टॉपर हैं। हाईस्कूल में 97.4 फीसदी, इंटरमीडिएट में 93 फीसदी मार्क्स पाकर टॉपर बने थे। बेटे की सफलता से मां नीरज सक्सेना भी उत्साहित दिखीं। प्रांजल की बहन प्रियांशी भी आईआईटी से बीटेक करना चाह रही हैं।
तन्मय की कमी खली
एयरो स्पेस इंजीनियरिंग के कार्तिक केएन को डॉ. शंकर दयाल शर्मा अवार्ड मिला है। उनकी सीपीआई 9.7 है। एमटेक के तन्मय चटर्जी को कैंडस अवार्ड दिया गया है। हालांकि तन्मय दीक्षांत समारोह में नहीं आ सके। वह उच्च शिक्षा के सिलसिले में विदेश गए हुए हैं। इस मौके पर तन्मय के साथियों को उनकी कमी खली।