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Kanpur News: 25 गांवों में 667 हेक्टेयर फसल नुकसान का अनुमान, घर गिरी का सर्वे शुरू
Thu, 07 Aug 2025 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 07 Aug 2025 12:35 AM IST
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कानपुर देहात। यमुना का जलस्तर घट चुका है। बाढ़ का पानी उतर गया है। अब यमुना खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है। बाढ़ प्रभावित भोगनीपुर व सिकंदरा तहसील के 25 गांवाें में करीब 667 हेक्टयर (2668 बीघा लगभग) फसल नुकसान का अनुमान है। सर्वे के बाद सही स्थिति सामने आएगी। फिलहाल घर गिरी का सर्वे शुरू हो गया है।
जिले में यमुना में बाढ़ से भोगनीपुर तहसील के 15 गांव व सिकंदरा तहसील में 10 गांव प्रभावित हैं। अब जलस्तर घट गया है। राहत शिविरों से लोग अपने घरों को लौट आए हैं। घरों में भी गृहस्थी व्यवस्थित की जा रही है। आबादी क्षेत्र में बाढ़ का पानी पूरी तरह से उतरने से अब घरों में हुई क्षति का सर्वे शुरू कराया गया है। इसके लिए राजस्व कर्मी गांवों में जाकर जानकारी कर रहे हैं।
मूसानगर गेज में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 3 मीटर नीचे पहुंच गया। अभी आढ़न-पथार की पुलिया डूबी है। बाकी क्षेत्रों का सड़क मार्ग से संपर्क बहाल हो गया है। घर लौटे लोग अब सामान शिफ्ट कर रहे हैं। फसल बर्बादी और मवेशियों के चारे की समस्या की चिंता बरकरार है। पथार के रविंद्र, छोटे, सुरेश, राम सजीवन, भागेलाल, बीरन आदि ने बताया कि गांव से पानी उतर गया है। मगर पुलिया डूबी है। इससे नाव से ही आगमन आवागमन हो रहा है। गलियों व घरों में कीचड़ व सिल्ट है। साफ सफाई की जा रही है।
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भोगनीपुर एसडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 15 गांवों में 472 हेक्टेयर फसल नुकसान का अनुमान है। कितने किसानों की फसलें खराब हुईं और कौन सी फसल में नुकसान हुआ। इसकी सटीक जानकारी सर्वे के बाद ही सामने आएगी। खेतों में अभी पानी है। इसकी वजह से फसल नुकसान के सर्वे की शुरुआत एक दो दिन बाद ही होने की उम्मीद है। इधर सिकंदरा तहसीलदार राकेश चंद्रा ने बताया कि करीब 10 गांवों में 195 हेक्टेयर फसल नुकसान का अनुमान है। सर्वे के लिए राजस्व कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल घर गिरी का सर्वे शुरू किया जा रहा है। फसल नुकसान की सही जानकारी के लिए राजस्व व कृषि विभाग संयुक्त सर्वे कराएगा।
..................वर्जन
बाढ़ प्रभावित सभी गांवों की बस्ती से पानी पूरी तरह से उतर गया है। अब यमुना नदी जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। फसल नुकसान और घर गिरी नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने पर जांच कराकर प्रभावितों को आर्थिक मदद दी जाएगी। खेतों में अभी पानी भरा है। इसलिए फसल नुकसान के सर्वे में समय लगेगा। - दुष्यंत कुमार मौर्य, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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यमुना का जलस्तर अब खतरे के निशान से काफी नीचे है। बुधवार दोपहर 2 बजे मूसानगर गेज में यमुना नदी जलस्तर 104.50 मीटर दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान से 3 मीटर नीचे है। - अनिल गुप्ता, मूसानगर गेज स्थल प्रभारी केंद्रीय जल आयोग
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बाढ़ चौकियों तक आकर लौट जाते जिम्मेदार
राजपुर। यमुना का जलस्तर घटने के बाद खाने, आशियाने और बीमारी के खतरे को लेकर मुश्किलें अभी बरकरार है। जैसलपुर बाढ़ प्रभावित अशोक कुमार, गुडडी, सुनीता, प्रियंका, शीतला आदि ने बताया कि पांच दिनों तक बाढ़ के पानी से घर घिरा रहा है। प्रशासन ने जो राहत सामग्री दी थी वो खत्म हो गई। अधिकारी स्कूल और बाढ़ चौकी से लौट जाते हैं। इससे समस्या उन्हें नहीं बता पा रहे हैं।
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अब पशुओं के चारे का संकट गहराया
राजपुर। धीरे-धीरे बाढ़ के पानी से घिरे गांवों के लोगों का जीवन अब पटरी पर लौटना शुरू हो गया है। हालांकि अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पशुओं का पेट भरने की है। जैसलपुर, महदेवा, गौहानी बांगर, बेहमई, बैजामऊ बांगर, भुपैय्यापुर गांव में अधिक समस्या है। पशुओं के चारे को लेकर लोग परेशान हैं। जैसलपुर निवासी नरेंद्र सिंह ने बताया की बाढ़ की वजह से जैसलपुर व महदेवा में फसलें खराब हो गईं। चारा भी बर्बाद हो गया। अब चिंता पशुओं के चारे को लेकर हैं।
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राहत शिविरो में सन्नाटा, घर लौटे लोग
राजपुर। बाढ़ प्रभावित गौहानी बांगर, भुपैय्यापुर-अमराहट, बैजामऊ बांगर व जैसलपुर के महदेवा गांवों में बाढ़ चौकिया के अलावा बाढ़ पीड़ितों के राहत शिविर बनाए गए हैं। इन सभी राहत शिविरों में 200 से अधिक बाढ़ पीड़ित ठहरे थे। पिछले दो दिनों में अधिकतर बाढ़ पीड़ित अपने घरों में लौट आए हैं। तहसीलदार राकेश चंद्रा ने बताया कि पानी उतरने पर अब लोग घरों में लौट गए हैं। अब राहत शिविर हटाए जाएंगे। (संवाद)
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व्यक्तिगत फसल बीमा आवेदन भी कर सकते किसान
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि भोगनीपुर व सिकंदरा तहसील में बाढ़ से फसल नुकसान पर किसान व्यक्तिगत बीमा के तहत दावा कर क्षतिपूर्ति पा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीमित किसान तीन दिन में नजदीकी राजकीय बीज भंडार में आवेदन कर दें। इसके साथ ही वह माती में जिला कृषि अधिकारी कार्यालय अथवा उप निदेशक कृषि के कार्यालय में भी व्यक्तिगत बीमा क्षतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। सत्यापन के बाद किसानों को बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति राशि दिलाई जाएगी।
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जिले में यमुना में बाढ़ से भोगनीपुर तहसील के 15 गांव व सिकंदरा तहसील में 10 गांव प्रभावित हैं। अब जलस्तर घट गया है। राहत शिविरों से लोग अपने घरों को लौट आए हैं। घरों में भी गृहस्थी व्यवस्थित की जा रही है। आबादी क्षेत्र में बाढ़ का पानी पूरी तरह से उतरने से अब घरों में हुई क्षति का सर्वे शुरू कराया गया है। इसके लिए राजस्व कर्मी गांवों में जाकर जानकारी कर रहे हैं।
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मूसानगर गेज में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 3 मीटर नीचे पहुंच गया। अभी आढ़न-पथार की पुलिया डूबी है। बाकी क्षेत्रों का सड़क मार्ग से संपर्क बहाल हो गया है। घर लौटे लोग अब सामान शिफ्ट कर रहे हैं। फसल बर्बादी और मवेशियों के चारे की समस्या की चिंता बरकरार है। पथार के रविंद्र, छोटे, सुरेश, राम सजीवन, भागेलाल, बीरन आदि ने बताया कि गांव से पानी उतर गया है। मगर पुलिया डूबी है। इससे नाव से ही आगमन आवागमन हो रहा है। गलियों व घरों में कीचड़ व सिल्ट है। साफ सफाई की जा रही है।
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भोगनीपुर एसडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 15 गांवों में 472 हेक्टेयर फसल नुकसान का अनुमान है। कितने किसानों की फसलें खराब हुईं और कौन सी फसल में नुकसान हुआ। इसकी सटीक जानकारी सर्वे के बाद ही सामने आएगी। खेतों में अभी पानी है। इसकी वजह से फसल नुकसान के सर्वे की शुरुआत एक दो दिन बाद ही होने की उम्मीद है। इधर सिकंदरा तहसीलदार राकेश चंद्रा ने बताया कि करीब 10 गांवों में 195 हेक्टेयर फसल नुकसान का अनुमान है। सर्वे के लिए राजस्व कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल घर गिरी का सर्वे शुरू किया जा रहा है। फसल नुकसान की सही जानकारी के लिए राजस्व व कृषि विभाग संयुक्त सर्वे कराएगा।
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बाढ़ प्रभावित सभी गांवों की बस्ती से पानी पूरी तरह से उतर गया है। अब यमुना नदी जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। फसल नुकसान और घर गिरी नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने पर जांच कराकर प्रभावितों को आर्थिक मदद दी जाएगी। खेतों में अभी पानी भरा है। इसलिए फसल नुकसान के सर्वे में समय लगेगा। - दुष्यंत कुमार मौर्य, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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यमुना का जलस्तर अब खतरे के निशान से काफी नीचे है। बुधवार दोपहर 2 बजे मूसानगर गेज में यमुना नदी जलस्तर 104.50 मीटर दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान से 3 मीटर नीचे है। - अनिल गुप्ता, मूसानगर गेज स्थल प्रभारी केंद्रीय जल आयोग
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बाढ़ चौकियों तक आकर लौट जाते जिम्मेदार
राजपुर। यमुना का जलस्तर घटने के बाद खाने, आशियाने और बीमारी के खतरे को लेकर मुश्किलें अभी बरकरार है। जैसलपुर बाढ़ प्रभावित अशोक कुमार, गुडडी, सुनीता, प्रियंका, शीतला आदि ने बताया कि पांच दिनों तक बाढ़ के पानी से घर घिरा रहा है। प्रशासन ने जो राहत सामग्री दी थी वो खत्म हो गई। अधिकारी स्कूल और बाढ़ चौकी से लौट जाते हैं। इससे समस्या उन्हें नहीं बता पा रहे हैं।
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अब पशुओं के चारे का संकट गहराया
राजपुर। धीरे-धीरे बाढ़ के पानी से घिरे गांवों के लोगों का जीवन अब पटरी पर लौटना शुरू हो गया है। हालांकि अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पशुओं का पेट भरने की है। जैसलपुर, महदेवा, गौहानी बांगर, बेहमई, बैजामऊ बांगर, भुपैय्यापुर गांव में अधिक समस्या है। पशुओं के चारे को लेकर लोग परेशान हैं। जैसलपुर निवासी नरेंद्र सिंह ने बताया की बाढ़ की वजह से जैसलपुर व महदेवा में फसलें खराब हो गईं। चारा भी बर्बाद हो गया। अब चिंता पशुओं के चारे को लेकर हैं।
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राहत शिविरो में सन्नाटा, घर लौटे लोग
राजपुर। बाढ़ प्रभावित गौहानी बांगर, भुपैय्यापुर-अमराहट, बैजामऊ बांगर व जैसलपुर के महदेवा गांवों में बाढ़ चौकिया के अलावा बाढ़ पीड़ितों के राहत शिविर बनाए गए हैं। इन सभी राहत शिविरों में 200 से अधिक बाढ़ पीड़ित ठहरे थे। पिछले दो दिनों में अधिकतर बाढ़ पीड़ित अपने घरों में लौट आए हैं। तहसीलदार राकेश चंद्रा ने बताया कि पानी उतरने पर अब लोग घरों में लौट गए हैं। अब राहत शिविर हटाए जाएंगे। (संवाद)
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व्यक्तिगत फसल बीमा आवेदन भी कर सकते किसान
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि भोगनीपुर व सिकंदरा तहसील में बाढ़ से फसल नुकसान पर किसान व्यक्तिगत बीमा के तहत दावा कर क्षतिपूर्ति पा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीमित किसान तीन दिन में नजदीकी राजकीय बीज भंडार में आवेदन कर दें। इसके साथ ही वह माती में जिला कृषि अधिकारी कार्यालय अथवा उप निदेशक कृषि के कार्यालय में भी व्यक्तिगत बीमा क्षतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। सत्यापन के बाद किसानों को बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति राशि दिलाई जाएगी।