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कॉमन सिविल कोड से 40 आयतों पर रुकावट

Tue, 01 Nov 2016 09:58 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 01 Nov 2016 09:58 PM IST
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40 signs common civil code interruption
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली - फोटो : सुहेल खान
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और लखनऊ के प्रमुख आलिम-ए-दीन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कानपुर में कहा कि शरीअत में छेड़छाड़ और कॉमन सिविल कोड लागू नहीं हो सकता है। यह मुसलमानों की धार्मिक मान्यता पर पाबंदी लगाता है। अगर शरीअत में छेड़छाड़ की साजिश सफल हुई तो मुसलमानों के कुरान की 40 आयतों और सैकड़ों हदीसों के पालन करने में रुकावट होगी।
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सोमवार को कानपुर, चमनगंज के न्यू जुबली गर्ल्स इंटर कॉलेज के मैदान में हुए महिलाओं के जलसे में मौलाना खालिद ने कहा कि मुस्लिमों के पर्सनल लॉ सिविल लॉ में आते हैं। इसमें सामाजिक व सांस्कृतिक मामले आते हैं। निकाह, तलाक, खुला, विरासत, खजानत आदि 17 मामले हैं। अदालतें इन्हीं के आधार पर मुसलमानों के सामाजिक मामलों में फैसले करती हैं। 
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने कहा कि तीन तलाक का मामला ऐसा बनाया गया है, जैसे देश की सभी समस्याएं खत्म हो गईं। भुखमरी, महंगाई खत्म हो गई है। महिलाओं के साथ अपराध करने वाले मुसलमानों के धार्मिक मामलों को हवा दे रहे हैं। देश में तलाक के कुल 55 हजार मामले विचाराधीन हैं, जिनमें मुस्लिमों के आधा प्रतिशत हैं। 
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