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यूपी: 3624 लोगों ने फर्जी तरीके से ली किसान सम्मान निधि, 1267 मृतकों के खातों में भी धनराशि भेजी गई, बड़ा खुलासा
Sat, 23 Jan 2021 10:24 AM IST
शिखा पांडेय
रजत यादव, कानपुर
रजत यादव, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 23 Jan 2021 10:24 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का पैसा 3624 लोगों ने गलत तरीके से हड़प लिया है। यह खुलासा कृषि विभाग के कर्मचारियों की सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। इनमें नौकरी करने वाले और दूसरे जिलों से शहर में आकर किराये पर रहने वाले लोग हैं।
वहीं, 1267 मृतकों के खातों में भी धनराशि भेजी गई है। विभाग ने इन सभी के खाते सीज कर दिए हैं। धनराशि वसूलने की तैयारी की जा रही है। गरीब किसानों की आर्थिक मदद के लिए केंद्र सरकार 500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से एक वर्ष में तीन बार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देती है।
योजना 2016-17 में शुरू हुई थी। कृषि विभाग ने 2 लाख 75 हजार किसानों को पात्र श्रेणी में रखा था। पहली किस्त पहुंचने के बाद कई किसानों ने शिकायत की थी कि कई लोग फर्जी तरीके से सम्मान निधि का पैसा ले रहे हैं।
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करीब छह माह पहले विभाग ने सत्यापन कार्य शुरू कराया था। विभाग के कर्मचारियों द्वारा जब रिपोर्ट कृषि उपनिदेशक को दी तो इसमें 638 लोग नौकरी में और 2986 लोग ऐसे मिले जो गैर जिलों से यहां आकर किराये पर रहते हैं।
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वहीं, 1267 मृतकों के खातों में भी धनराशि भेजी गई है। विभाग ने इन सभी के खाते सीज कर दिए हैं। धनराशि वसूलने की तैयारी की जा रही है। गरीब किसानों की आर्थिक मदद के लिए केंद्र सरकार 500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से एक वर्ष में तीन बार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देती है।
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योजना 2016-17 में शुरू हुई थी। कृषि विभाग ने 2 लाख 75 हजार किसानों को पात्र श्रेणी में रखा था। पहली किस्त पहुंचने के बाद कई किसानों ने शिकायत की थी कि कई लोग फर्जी तरीके से सम्मान निधि का पैसा ले रहे हैं।
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करीब छह माह पहले विभाग ने सत्यापन कार्य शुरू कराया था। विभाग के कर्मचारियों द्वारा जब रिपोर्ट कृषि उपनिदेशक को दी तो इसमें 638 लोग नौकरी में और 2986 लोग ऐसे मिले जो गैर जिलों से यहां आकर किराये पर रहते हैं।
जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनके खाते सीज कर दिए गए हैं। जो लोग नौकरी कर रहे या बाहरी हैं, उन लोगों से पैसे की वसूली होगी। धनराशि वापस न करने पर कार्रवाई की जाएगी। -धीरेंद्र कुमार, उपनिदेशक कृषि