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Kanpur News: स्कूल परिसरों में शिफ्ट हुए 30 आंगनबाड़ी केंद्र
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कानपुर। तीन से छह वर्ष की उम्र के नौनिहालों को शुरुआती शिक्षा के लिए बेहतर माहौल देने की कवायद तेज हो गई है। शासन के निर्देश पर प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों से 200 मीटर की परिधि में गैर-विभागीय भवनों में संचालित 30 आंगनबाड़ी केंद्रों को संबंधित स्कूल परिसरों में स्थानांतरित कर दिया गया है। इन केंद्रों पर अब नौनिहालों को पढ़ाई के साथ भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा।
जिले में कुल 2182 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनके माध्यम से करीब 56 हजार बच्चों को पठन-पाठन और प्रारंभिक बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। केंद्रों के संचालन में दो हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं लगी हैं। स्कूल परिसरों में केंद्र संचालित होने से बच्चों को कम उम्र से ही विद्यालयी वातावरण से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे उनमें स्कूल जाने की आदत विकसित करने, सीखने की प्रक्रिया को सहज बनाने और प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। शासन की इस पहल का उद्देश्य बाल वाटिका की अवधारणा को प्रभावी ढंग से लागू करना भी है।
डीपीओ कार्यालय से निजी भवनों में संचालित केंद्रों की सूची मांगी गई थी। 200 मीटर की परिधि के समीप करीब 30 केंद्र मिले थे जिन्हें प्राथमिक विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया है। अब वहीं नौनिहालों को पढ़ाई और भोजन मिलेगा। - हरिओम सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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जिले में कुल 2182 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनके माध्यम से करीब 56 हजार बच्चों को पठन-पाठन और प्रारंभिक बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। केंद्रों के संचालन में दो हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं लगी हैं। स्कूल परिसरों में केंद्र संचालित होने से बच्चों को कम उम्र से ही विद्यालयी वातावरण से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे उनमें स्कूल जाने की आदत विकसित करने, सीखने की प्रक्रिया को सहज बनाने और प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। शासन की इस पहल का उद्देश्य बाल वाटिका की अवधारणा को प्रभावी ढंग से लागू करना भी है।
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डीपीओ कार्यालय से निजी भवनों में संचालित केंद्रों की सूची मांगी गई थी। 200 मीटर की परिधि के समीप करीब 30 केंद्र मिले थे जिन्हें प्राथमिक विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया है। अब वहीं नौनिहालों को पढ़ाई और भोजन मिलेगा। - हरिओम सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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