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24 घंटे साफ सुथरे मिलेंगे गंगा घाट

Wed, 17 Feb 2016 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Wed, 17 Feb 2016 02:02 AM IST
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24 hours will clean Ganga Ghats

गंगा बैराज से लेकर जाजमऊ के बीच नदी के किनारे के सभी घाट अब 24 घंटे साफ सुथरे नजर आएंगे। फ्लोटिंग ट्रैस स्किमर के जरिए घाटों के किनारे इकट्ठा होने वाले कचरे को रोजाना साफ किया जाएगा। मिशन फॉर क्लीन गंगा और नमामि गंगे समिति की तरफ से गंगा सफाई अभियान का मंगलवार को औपचारिक शुभारंभ किया गया। केंद्र सरकार के इस अभियान में नगर निगम, आईआईटी और गेल इंडिया का भी सहयोग लिया जाएगा।

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केंद्र सरकार की एजेंसी ईआईएल के जरिए परमट घाट पर सफाई अभियान शुरू होने के दौरान नगर निगम की टीम भी पहुंची। पिछले दो दिनों से गंगा से निकलने वाले कचरे को फेंकने का स्थान तय नहीं था। नगर स्वास्थ्य अधिकारी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि गंगा से कचरा निकालने वाली टीम को कूड़ा इकट्ठा करने के लिए पास में ही एक स्थान बता दिया गया है।
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यहां से नगर निगम अपने वाहन से रोजाना कचरा उठाकर बाहर ले जाएगा। निगम घाटों की सफाई और उसकी मरम्मत में भी केंद्रीय एजेंसी का सहयोग करेगा। गंगा सफाई अभियान के लिए आया यह स्कीमर और केंद्रीय टीम को स्थायी रूप से यहां रखने की योजना है। फिलहाल टेस्टिंग चल रही है।
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30 जून तक टीम का काम देखा जाएगा। यदि बेहतर होता है, तो इसे आगे बढ़ाया जाएगा। टीम के आठ मेंबर सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक सफाई करते हैं। सफाई अभियान का शुभारंभ नमामि गंगे समिति के राष्ट्रीय सचिव संजय चतुर्वेदी ने किया।

उन्होंने बताया कि गंगा सफाई की स्थायी व्यवस्था केंद्र सरकार से की गई है। इसमें समय-समय पर दूसरे विभागों और प्रदेश सरकार का सहयोग लिया जाएगा। समिति के प्रांतीय सदस्य श्रीकृष्ण दीक्षित ने बताया कि स्किमर की देखरेख के लिए एक निगरानी समिति बनाई है, जिसमें विजय गौड़, अनूप चौधरी, दिव्यांशु शर्मा शामिल हैं।

गंगा में मिला बच्चे का शव
कानपुर। परमट घाट से आगे भैरोघाट के पास स्किमर से हो रही गंगा सफाई के दौरान एक बच्चे का शव मिलने से कुछ देर के लिए सफाई कार्य बंद रहा। बच्चा करीब तीन महीने का था, उसके शरीर पर कपड़ा लिपटा था। जिस समय स्किमर घाट के किनारे सफाई कर रहा था, उसी दौरान बच्चे का शव उतराता दिखा। टीम के सदस्यों ने बच्चे के शव को कुछ दूर ले जाकर दफना दिया।

विदेशी कंपनियों की मदद से निर्मल गंगा

गंगा बेसिन को गंगोत्री से ऋषिकेश (भीमगोडा बैराज), भीमगोडा से वाराणसी और वाराणसी से गंगा सागर तक तीन जोन में बांटा गया है। भीमगोडा से वाराणसी तक गंगा का फ्लो काफी कम है, जहां प्रदूषण ज्यादा है। इस क्षेत्र में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी माडल) पर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर पानी को शोधित करने की जरूरत बताई गई है।

एनजीआरबीए के समन्वयक और आईआईटी के प्रो. विनोद तारे ने बताया कि गंगा किनारे बसे 11 राज्यों के 200 शहरों में अरबन रिवर मैनेजमेंट प्लान बनाया गया है। इसमें कानपुर, वाराणसी, कन्नौज भी शामिल हैं। अब प्लान बनाने के बाद ही गंगा पर बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी जा सकेगी।

गंगोत्री से गंगा सागर तक की 2500 किलो मीटर गंगा को क्लीन बनाने का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। इसका क्रियान्वयन 2020 तक संभव है। प्रो. तारे ने बताया कि अमेरिका सहित तमाम देशों में नदियों को सुरक्षित, संरक्षित किया गया है। इससे जुड़ी तमाम कंपनियां भारत आना चाहती हैं।


केंद्र सरकार और विज्ञानियों के साथ मिलकर गंगा को साफ-सुथरा बनाना चाहती हैं। इसका लाभ भारत को उठाना चाहिए। इस सिलसिले में पर्यावरण मंत्रालय के सचिव से बात की गई है। ट्रीटमेंट प्लांट लगाने और प्रदूषित पानी को शोधित करके बेचने की अनुमति पर आपसी सहमति भी बनी है। जल्द ही औपचारिक आदेश जारी हो सकता है।

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