फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   सरकारी इमारतों में भी नहीं जल संचयन व्यवस्था

सरकारी इमारतों में भी नहीं जल संचयन व्यवस्था

Wed, 05 Jul 2017 12:11 AM IST
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
सरकारी इमारतों में भी नहीं जल संचयन व्यवस्था
सरकारी इमारतों में भी नहीं जल संचयन के प्रबंध
विज्ञापन


उरई। सरकार की योजना सरकारी इमारतों से ही गुम है। वर्षा का जल संचय करने के लिए सालों पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भवनों में बनाने की तैयारी शुरू हुई थी जो पूरी नहीं हुई। हालत ये है कि जिले की सरकारी इमारतों में भी ये सिस्टम ढूंढने से भी नहीं मिलता, निजी भवनों की बात तो दूर है। भूगर्भ जलस्तर में हर साल दर्ज की जा रही गिरावट में जल संचय की योजना को गंभीरता से न लेना भी एक कारण है। पेश है एक रिपोर्ट...

अफसरों ने आज तक प्रस्ताव तक नहीं बनाया
विकास भवन में करीब 12 विभागों के दफ्तर हैं। यहां वह अधिकारी बैठते हैं, जिनके कंधों पर जिले के सूखे को खत्म करने की जिम्मेदारी है। विकास भवन की इमारत सोलर प्लांट, वाइफाई सिस्टम व अन्य तकनीकी सुविधाओं से लैस है, लेकिन आधुनिक युग की इस इमारत में रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम अब तक नहीं लगाया गया और न ही इस ओर कोई पहल की गई है। छत पर कबाड़ की भरमार है। किसी भी विभाग के अधिकारी अब तक सिस्टम के लिए प्रस्ताव भी नहीं तैयार किया है।
विज्ञापन


डीएम आफिस भी सिस्टम से लैस नहीं
वैसे तो जिलाधिकारी कार्यालय की इमारत आजादी से पहले की बनी है। कई बार यहां निर्माणकार्य के नाम पर सिर्फ खानापूरी की गई। इमारत कई आधुनिक तकनीकी से लैस तो है, लेकिन अभी तक इसमें वर्षा जल संचयन के कोई इंतजाम नहीं है। किसी भी हाकिम ने अब तक इस इमारत में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की जरूरत भी महसूस नहीं की। छत पर कबाड़ और झाड़ झंखाल जरूर रखे हैं। बारिश का सारा पानी छत की नाली के रास्ते बह जाता है और अफसर आंख मू्ंदे बैठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जलनिगम व जलसंस्थान के दफ्तर भी अछूते
जिले से जल संकट दूर करने क ी जिम्मेदारी जिन विभागों के कंधों पर है, उनके दफ्तर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से अछूता है। कर्मचारियों से बात की गई तो जवाब मिला कि इमारत ही इतनी जर्जर हो गई है, उसकी मरम्मत के लिए तक तो कोई सोच नहीं रहा है। ऐसे में पानी को बचाने के लिए सिस्टम की कौन सोचे। बरसात का पानी जमीन के अंदर भले ही न जाता हो लेकिन जर्जर दीवारों से उनके सिर पर जरूर टपकता है। मूलभूत सुविधाओं को तरस रही इमारत में अभी ये सिस्टम दूर की कौड़ी है।

क्लब बिल्ंिडग में भी नहीं बनाया हार्वेस्टिंग सिस्टम
अंबेडकर चौराहे स्थिति क्लब मार्केट की इमारत को शहर की सबसे आधुनिक इमारतों में गिना जाता है। डीएम इस इमारत के अध्यक्ष हैं। हाल ही में इस इमारत में एक बार फिर लाखों की कीमत से जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसमें टेनिस और बैडमिंटन कोर्ट व एक आलीशान सभाकक्ष बनाया जा रहा है लेकिन बारिश के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। अफसर तर्क ये दे रहे हैं कि इतना बड़ा मैदान किस लिए है, सीधे पानी जमीन के भीतर ही तो जाएगा।

क्या होता है रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने या फिर संभालकर रखने की प्रकिया को रैन वाटर हार्वेस्टिंग कहा जाता है। मोटे तौर पर इसकी दो प्रक्रिया अपनाई जाती हैं। पहली, सरफेस रूफ वाटर हार्वेस्टिंग और दूसरी रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग। बारिश के पानी से बोरवेल या कुओं को रिचार्ज किया जा सकता है। इसके लिए आजकल सस्ते और तैयार सिस्टम बाजारों में मिल रहे हैं।


जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडे का कहना है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम वाकई काफी उपयोगी है, वे संबंधित विभागों के अधिकारियों से वार्ता कर जल्द ही इसे कम से कम सरकारी इमारतों में लगवाने का प्रयास भी करेंगे।

- कहीं नहीं दिखता रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
- अफसरों के लचीले रुख के कारण नहीं दिया जा रहा इस ओर ध्यान
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed