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घर पहुंचा सैनिक का शव, शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग
Updated Tue, 05 Jun 2018 01:12 AM IST
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सिकंदरा। तहसील क्षेत्र के अनवां गांव में सोमवार की सुबह सैनिक का शव पहुंचा। गांव के बाहर खड़े लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। बाद में शव को गांव में लाया गया, जहां परिजनों ने शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया गया। सांसद, विधायक ने उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया पर वह नहीं माने। बाद में ब्रिगेडियर से फोन पर बात कराए जाने के बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार कराने को तैयार हो गए। शाम 5 बजे शव का सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
अनवां गांव निवासी राजपाल सिंह राष्ट्रीय राइफल्स की 24 आरआर बटालियन बी कंपनी में जम्मू-कश्मीर के शिविर सरफरी कैंप गंदर बल में तैनात थे। एक जून की रात शिविर में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। जिनका शव सैनिक टोली के साथ सोमवार की सुबह गांव लाया गया, जहां ग्रामीणों ने गांव के बाहर सैनिक के शहीद चाचा करनसिंह के नाम से बने द्वार के पास श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सैनिकों शव लेकर घर पहुंचे। वहीं, सूबेदार ताराचंद ने राजपाल सिंह के आत्महत्या की बात कहकर कागजात सौंपे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से मौत का जिक्र किया गया। इस पर राजपाल के भाई सर्वेश सिंह और अन्य परिजन बिफर पड़े। शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए शव का दाह संस्कार करने से इंकार कर दिया। परिजन मुख्यमंत्री के आने या प्रतिनिधि के आकर जांच कराने का आश्वासन देने पर अंतिम संस्कार कराने की बात कही। एसडीएम दीपाली कौशिक, सिकंदरा डीएसपी अर्पित कपूर, डेरापुर के डीएसपी तेज बहादुर सिंह, थाना इंचार्ज राजपुर शशिभूषण मिश्र, सट्टी के प्रभात सिंह, सिकंदरा के मानिकचंद्र पहले से ही पुलिस बल के साथ मौजूद थे। सूचना पर सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधायक अजीत सिंह पाल, पुलिस अधीक्षक राधेश्याम, मुख्य विकास अधिकारी केदारनाथ सिंह पहुंच गए। सांसद ने जांच कराने परिवार की हर संभव मदद का आश्वासन दिया। बाद में सेना के ब्रिगेडियर से फोन पर सर्वेश सिंह से बात कराई गई। ब्रिगेडियर ने भी जांच और मदद मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
वहीं, मुख्य विकास अधिकारी केदारनाथ सिंह के निर्देशन पर एसडीएम दीपाली कौशिक ने राज्य सरकार की ओर से सैनिक सहायता राशि पांच लाख रुपये, किसान दुर्घटना राशि पांच लाख रुपये और आपदा राशि दो लाख रुपये का मुआवजा दिलाए जाने की घोषणा की। शाम 5 बजे सैनिक के शहीद करन सिंह शहीद पार्क में 8 रेजीमेंट के सूबेदार इंद्रजीत सिंह की टुकड़ी ने सैनिक को अंतिम सलामी दी। इसके बाद दाह संस्कार कर दिया गया। वहीं सैनिक की मां किशोरी देवी, पत्नी रूबी देवी, पुत्र विशाल और पुत्री राधिका शव से लिपट कर बिलख पड़ी।
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अनवां गांव निवासी राजपाल सिंह राष्ट्रीय राइफल्स की 24 आरआर बटालियन बी कंपनी में जम्मू-कश्मीर के शिविर सरफरी कैंप गंदर बल में तैनात थे। एक जून की रात शिविर में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। जिनका शव सैनिक टोली के साथ सोमवार की सुबह गांव लाया गया, जहां ग्रामीणों ने गांव के बाहर सैनिक के शहीद चाचा करनसिंह के नाम से बने द्वार के पास श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सैनिकों शव लेकर घर पहुंचे। वहीं, सूबेदार ताराचंद ने राजपाल सिंह के आत्महत्या की बात कहकर कागजात सौंपे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से मौत का जिक्र किया गया। इस पर राजपाल के भाई सर्वेश सिंह और अन्य परिजन बिफर पड़े। शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए शव का दाह संस्कार करने से इंकार कर दिया। परिजन मुख्यमंत्री के आने या प्रतिनिधि के आकर जांच कराने का आश्वासन देने पर अंतिम संस्कार कराने की बात कही। एसडीएम दीपाली कौशिक, सिकंदरा डीएसपी अर्पित कपूर, डेरापुर के डीएसपी तेज बहादुर सिंह, थाना इंचार्ज राजपुर शशिभूषण मिश्र, सट्टी के प्रभात सिंह, सिकंदरा के मानिकचंद्र पहले से ही पुलिस बल के साथ मौजूद थे। सूचना पर सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधायक अजीत सिंह पाल, पुलिस अधीक्षक राधेश्याम, मुख्य विकास अधिकारी केदारनाथ सिंह पहुंच गए। सांसद ने जांच कराने परिवार की हर संभव मदद का आश्वासन दिया। बाद में सेना के ब्रिगेडियर से फोन पर सर्वेश सिंह से बात कराई गई। ब्रिगेडियर ने भी जांच और मदद मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
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वहीं, मुख्य विकास अधिकारी केदारनाथ सिंह के निर्देशन पर एसडीएम दीपाली कौशिक ने राज्य सरकार की ओर से सैनिक सहायता राशि पांच लाख रुपये, किसान दुर्घटना राशि पांच लाख रुपये और आपदा राशि दो लाख रुपये का मुआवजा दिलाए जाने की घोषणा की। शाम 5 बजे सैनिक के शहीद करन सिंह शहीद पार्क में 8 रेजीमेंट के सूबेदार इंद्रजीत सिंह की टुकड़ी ने सैनिक को अंतिम सलामी दी। इसके बाद दाह संस्कार कर दिया गया। वहीं सैनिक की मां किशोरी देवी, पत्नी रूबी देवी, पुत्र विशाल और पुत्री राधिका शव से लिपट कर बिलख पड़ी।
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