फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   16 convicted; eight, including a teacher, sentenced to eight years in prison for culpable homicide

जमीनी विवाद को लेकर खूनी संघर्ष: 16 दोषियों को सजा, गैर इरादतन हत्या में शिक्षक सहित आठ को आठ साल की जेल

Wed, 15 Jul 2026 09:44 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: Shikha Pandey Updated Wed, 15 Jul 2026 09:44 PM IST
सार

दूसरे पक्ष के पिता व उसके चार पुत्रों सहित आठ दोषियों को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। कमालगंज थाना क्षेत्र के नगला दाउद में जमीनी विवाद को लेकर जनवरी 2024 में खूनी संघर्ष हुआ था।

विज्ञापन
16 convicted; eight, including a teacher, sentenced to eight years in prison for culpable homicide
सजा सुनाए जाने के बाद अदालत से बाहर निकलते दोषी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पट्टे की जमीन विवाद में हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अभिनितम उपाध्याय की अदालत ने बुधवार को 16 दोषियों को सजा सुनाई। एक पक्ष के आठ दोषियों को आठ वर्ष का कठोर कारावास और दूसरे पक्ष के आठ दोषियों को जानलेवा हमले के आरोप में पांच वर्ष का कठोर कारावास दिया गया। दोनों पक्षों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को छह महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
विज्ञापन


कमालगंज क्षेत्र के नगला दाऊद गांव में 10 जनवरी 2024 को जमीन विवाद में दो पक्ष लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से भिड़ गए थे। हमले में कई लोग घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल तौहीद खां की 15 जनवरी 2024 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद मुकदमा गैर इरादतन हत्या की धारा में परिवर्तित किया गया। अदालत ने इन सभी को नौ जुलाई को दोषी ठहराया था। गैर इरादतन हत्या के मामले में शिक्षक वसीम, वसीम के भांजे आसिफ उर्फ मुन्ना, बाबर, अरशद उर्फ अक्कू, आमिर, ईशान, ममेरे भाई सादाब व तशरीफ शानू को आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, दूसरे पक्ष से इदरीस, इदरीस के बेटे तमजीद, तमहीद, जुनैद, नाजिम, साले का बेटा आजम, शिक्षक भाई तौसीफ और साले का बेटा मगरूल को पांच वर्ष की सजा सुनाई।
विज्ञापन

विवेचक और दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर विचार करने की संस्तुति
अदालत ने मामले की विवेचना पर भी कड़ी टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा कि जांच अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज, खून लगी मिट्टी और घायल के कपड़ों जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों का विधिवत संकलन नहीं किया। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अदालत ने तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक महेंद्र सिंह और उपनिरीक्षक राजेश राय के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई पर विचार करने की संस्तुति की। साथ ही, जांच पूरी होने तक उन्हें किसी जघन्य अपराध की विवेचना न सौंपने के निर्देश दिए। आदेश की प्रति एसपी को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
 
विज्ञापन

वीडियो फुटेज और मोबाइल लोकेशन बने अहम साक्ष्य
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि घटनास्थल पर आरोपियों की मौजूदगी मोबाइल लोकेशन, वीडियो फुटेज, एफएसएल रिपोर्ट और घायल प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों से प्रमाणित हुई। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर दोनों मुकदमों में दोष सिद्ध हुए, जबकि कुछ धाराओं में साक्ष्य के अभाव में बरी भी किया गया।

 
विज्ञापन

दोनों पक्षों में शिक्षक भी पाए गए दोषी
घटना के दौरान दोषी वसीम कमालगंज के राजेपुर सरायमेदा में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे, वहीं दूसरे पक्ष के तौसीफ शमसाबाद थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर विद्यालय में अध्यापक थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed