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छुट्टा मवेशी बंद करने में बड़ा खेल

Fri, 22 Feb 2019 01:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 22 Feb 2019 01:06 AM IST
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छुट्टा मवेशी बंद करने में बड़ा खेल

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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। आश्रय स्थलों में मवेशी बंद करने में प्रशासन महज आंकड़ेबाजी कर रहा है। ज्यादातर आश्रय स्थलों में कागजों में दर्शाए आंकड़े से कहीं कम मवेशी हैं।

संदलपुर ब्लॉक के जसापुर गांव में बनाए गए गोआश्रय स्थल में प्रशासन ने छह दिन पहले बनाई गई रिपोर्ट में 45 मवेशी बंद दिखाए थे। बुधवार को इस आश्रय स्थल की पड़ताल की गई। वहां केवल 13 मवेशी ही बंद थे। मवेशियों के लिए चारा और पानी की व्यवस्था भी नहीं थी। इस आश्रय स्थल में मवेशियों की देखरेख के लिए राहुल व राजू को लगाया गया था।
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दोनों सफाईकर्मी भी मौके पर नहीं मिले। संदलपुर ब्लॉक के ही असवी गांव के गो आश्रय स्थल में 33 मवेशी बंद दिखाए गए हैं। इसमें केवल 21 मवेशी ही बंद मिले। इस आश्रय स्थल में भी मवेशियों के लिए चारा और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। रनियां के बिलसरायां आश्रय स्थल में शासन को भेजी रिपोर्ट में दर्शाए गए सभी 209 मवेशी मौजूद मिले।
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इस आश्रय स्थल में छाया तो है लेकिन चारे व पानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। गांव की प्रधान रामबेटी ने बताया कि 12 फरवरी रात सबर्मसिबल चोरी हो गया था। तहरीर दी थी लेकिन अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके पहले मंगलवार को डेरापुर तहसील के नंदपुर गांव के गो आश्रय स्थल की पड़ताल की गई थी। वहां एक भी मवेशी नहीं मिला था, जबकि शासन को भेजी गई रिपोर्ट में 40 मवेशी बंद बताए गए थे।


किसान अयोध्या पाल, राजेश कुमार, महेश सिंह और रामचरन ने कहा कि आश्रय स्थलों में छुट्टा मवेशी बंद करने में अधिकारी केवल खानापूरी कर रहे हैं। शुरुआत में चार-छह गांवों व कुछ नगरों में मवेशी पकड़वाए कर बंद कराए थे। अब जिले में कहीं भी छुट्टा मवेशी नहीं पकड़े जा रहे हैं। आश्रय स्थलों में मवेशी बंद तो ज्यादा दिखाए जा रहे हैं लेकिन हकीकत में वहां संख्या कम है। जिलाधिकारी समेत आला अधिकारियों को खुद आश्रय स्थलों की जांच करनी चाहिए। किसानों ने आरोप लगाया कि चारा पानी के नाम पर पैसा हजम किया जा रहा है।



पशु पालन विभाग के अनुसार जिले में छुट्टा मवेशियों (गोवंश) की संख्या दस हजार से अधिक है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. डीसी अग्रवाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के 23 आश्रय स्थलों में 1897 व शहरी क्षेत्र के तीन आश्रय स्थलों में 29 मवेशी बंद कराए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आश्रय स्थलों की संख्या बढने पर ही पूरी तरह से छुट्टा मवेशियों से निजात मिलेगी। जिन गांवों में आश्रय स्थल बनाए गए हैं वहां के आसपास के किसानों को राहत मिल गई है। वहीं आश्रय स्थलों के लिए धन दिया गया है जिससे चारा की व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाएगी।



छुट्टा मवेशी बंद करने में बड़ा खेल
संदलपुर ब्लॉक के जसापुर व असवी आश्रय स्थल में भी कम मिले मवेशी
क्रासर
संदलपुर में दर्शाए गए थे 45 मवेशी, मिले केवल 13
असवी में दर्शाए गए 33 मवेशियों में मात्र 21 ही मिले

फोटो संख्या-21 एकेबीपी8- असवी आश्रय स्थल में बंधे पालतू मवेशी
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