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- लाल की तस्वीर देख फफकती रही मां कैलाशी
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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। शहीद श्यामबाबू की अंत्येष्टि के दूसरे दिन रैगांव में मातमी सन्नाटा छाया रहा। गलियों व नुक्कड़ों पर खड़े लोगों की जुबां पर श्याम बाबू के ही चर्चे थे। लोग पुराने स्मरणों को याद कर गमगीन दिखे। इस दौरान मां कैलाशी देवी और पत्नी रूबी की करुण चित्कार सन्नाटे को चीरती रही।
पिता रामप्रसाद परिवार के सभी सदस्यों को संभालने के साथ ही एकांत में जाकर अपने दर्द को आंसुओं के रुप में निकाल कई बार फफक कर रोये। गांव की गलियों व नुक्कड़ों में 8-10 की संख्या में मौजूद ग्रामीणों में शहीद श्याम बाबू की चर्चा होती रही। लोग उसके पुराने स्मरणों को याद कर गम में डूबे रहे। गांव में मातमी सन्नाटा साफ झलकता हुआ दिख रहा था। जबकि कुछ घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
इस दौरान जन प्रतिनिधियों के साथ ही सामाजिक संगठनों के लोग बारी बारी से आते रहे और शहीद परिजनों को ढांढ़स बंधाते रहे। लेकिन नजदीकी रिश्तेदार व आस पड़ोस की महिलाओं के पहुंचने पर मां कैलाशी व पत्नी रूबी की करुण चित्कार इस सन्नाटे को जरूर चीरती रही। बच्चों को पड़ोस की महिलाएं व आने जाने वाले लोग दुलारते रहे। गांव में सबकी निगाहें आने जाने वाले लोगों पर ही टिकी रहीं। मां अपने पुत्र के गम पर बेहाल रही पुत्र की तस्वीर को सीने से लगा बस एक ही शब्द रटती रही बेटा तुम कहां चले गए। वहीं पत्नी रूबी भी बच्चे को गोद में लिए खुद तो सिसकती रही, लेकिन मां को संभालने में भी लगी रही। बच्चा भी अपनी मां व दादी को बेहाल देख बेसुध सा बना रहा।
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रैगांव में छाया सन्नाट, नहीं जले चूल्हे
- लाल की तस्वीर देख फफकती रही मां कैलाशी
- बच्चे को गोद में लिए सिसकती रही रूबी
कानपुर देहात। शहीद श्यामबाबू की अंत्येष्टि के दूसरे दिन रैगांव में मातमी सन्नाटा छाया रहा। गलियों व नुक्कड़ों पर खड़े लोगों की जुबां पर श्याम बाबू के ही चर्चे थे। लोग पुराने स्मरणों को याद कर गमगीन दिखे। इस दौरान मां कैलाशी देवी और पत्नी रूबी की करुण चित्कार सन्नाटे को चीरती रही।
पिता रामप्रसाद परिवार के सभी सदस्यों को संभालने के साथ ही एकांत में जाकर अपने दर्द को आंसुओं के रुप में निकाल कई बार फफक कर रोये। गांव की गलियों व नुक्कड़ों में 8-10 की संख्या में मौजूद ग्रामीणों में शहीद श्याम बाबू की चर्चा होती रही। लोग उसके पुराने स्मरणों को याद कर गम में डूबे रहे। गांव में मातमी सन्नाटा साफ झलकता हुआ दिख रहा था। जबकि कुछ घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
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इस दौरान जन प्रतिनिधियों के साथ ही सामाजिक संगठनों के लोग बारी बारी से आते रहे और शहीद परिजनों को ढांढ़स बंधाते रहे। लेकिन नजदीकी रिश्तेदार व आस पड़ोस की महिलाओं के पहुंचने पर मां कैलाशी व पत्नी रूबी की करुण चित्कार इस सन्नाटे को जरूर चीरती रही। बच्चों को पड़ोस की महिलाएं व आने जाने वाले लोग दुलारते रहे। गांव में सबकी निगाहें आने जाने वाले लोगों पर ही टिकी रहीं। मां अपने पुत्र के गम पर बेहाल रही पुत्र की तस्वीर को सीने से लगा बस एक ही शब्द रटती रही बेटा तुम कहां चले गए। वहीं पत्नी रूबी भी बच्चे को गोद में लिए खुद तो सिसकती रही, लेकिन मां को संभालने में भी लगी रही। बच्चा भी अपनी मां व दादी को बेहाल देख बेसुध सा बना रहा।
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रैगांव में छाया सन्नाट, नहीं जले चूल्हे
- लाल की तस्वीर देख फफकती रही मां कैलाशी
- बच्चे को गोद में लिए सिसकती रही रूबी