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गर्मी पड़ रही भारी, कहीं हो न जाए पशुओं को बीमारी
Updated Thu, 29 Jun 2017 12:35 AM IST
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औरैया। भीषण उमस भरी गर्मी आम लोगों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी मुसीबत भरी है। उमस भरी गर्मी व बारिश में दुधारू पशुओं को कई तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है।
ऐसे में जरा सी लापरवाही दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा साबित होती है। इसलिए यह आवश्यक है कि पशुओं की विशेष देखभाल की जाए। खास तौर पर रहने का स्थान साफ-सुथरा व सूखा होना चाहिए। यदि रहने का स्थान गंदा और कीचड़युक्त हुआ तो दुधारू पशु गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। विभाग ने पशुपालकों को एडवाइजरी जारी की है।
मौजूदा मौसम में पशुओं में सबसे ज्यादा खतरा खुरपका, मुंहपका व गला घोंटू का होता है। जीवाणु व विषाणु से होने वाले ये रोग जरा सी लापरवाही में पशुओं के लिए जानलेवा बन जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक वातावरण में आर्द्रता अधिक होने पर पशुओं को गर्मी ज्यादा लगती है।
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इसलिए पशुओं को नियमित रूप से साफ व ठंडा पानी पिलाते रहना चाहिए। पशु चिकित्सकों के मुताबिक लंगड़ी बुखार का खतरा भी बना रहता है। ये रोग जीवाणु व विषाणु की वजह से होते हैं।
पशुओं को नदी व तालाब के किनारे नहीं चरने देना चाहिए। यहां परजीवियों के प्रवेश का खतरा बना रहता है। ऐसे में पशुओं को डायरिया के साथ दूसरे रोगों का भी खतरा रहता है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह यादव ने बताया कि शत प्रतिशत टीकाकरण का काम हुआ है। पशुपालक बचाव करें और परेशानी होने पर पशु अस्पताल लेकर जाए।
ऐसे करें रोगों की पहचान: पशुओं को गलाघोंटू होने पर गले में सूजन आ जाती है और बुखार भी बना रहता है। सांस लेने में दिक्कत होती है। गले में सूजन व बुखार हो तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बीमारी को नजरंदाज करने पर पशु की जान भी जा सकती है।
खुरपका में पशु के पैर में छाले पड़ जाते हैं। बुखार के साथ खुर फट जाते हैं, जिससे पशु ठीक से चल नहीं पाते। इसी तरह मुंहपका में बुखार के साथ मुंह में छाले पड़ जाते हैं, जिससे पशुओं को खाने-पीने में दिक्कत होने लगती हैं। लंगड़ी बुखार में तेज बुखार आता है और पशु के पिछले पैर की मांस पेशियों में सूजन आ जाती है।
- विभाग शत प्रतिशत टीकाकरण का कर रहा दावा
- बचाव की भी जारी की एडवाइजरी
अमर उजाला ब्यूरो
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ऐसे में जरा सी लापरवाही दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा साबित होती है। इसलिए यह आवश्यक है कि पशुओं की विशेष देखभाल की जाए। खास तौर पर रहने का स्थान साफ-सुथरा व सूखा होना चाहिए। यदि रहने का स्थान गंदा और कीचड़युक्त हुआ तो दुधारू पशु गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। विभाग ने पशुपालकों को एडवाइजरी जारी की है।
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मौजूदा मौसम में पशुओं में सबसे ज्यादा खतरा खुरपका, मुंहपका व गला घोंटू का होता है। जीवाणु व विषाणु से होने वाले ये रोग जरा सी लापरवाही में पशुओं के लिए जानलेवा बन जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक वातावरण में आर्द्रता अधिक होने पर पशुओं को गर्मी ज्यादा लगती है।
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इसलिए पशुओं को नियमित रूप से साफ व ठंडा पानी पिलाते रहना चाहिए। पशु चिकित्सकों के मुताबिक लंगड़ी बुखार का खतरा भी बना रहता है। ये रोग जीवाणु व विषाणु की वजह से होते हैं।
पशुओं को नदी व तालाब के किनारे नहीं चरने देना चाहिए। यहां परजीवियों के प्रवेश का खतरा बना रहता है। ऐसे में पशुओं को डायरिया के साथ दूसरे रोगों का भी खतरा रहता है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह यादव ने बताया कि शत प्रतिशत टीकाकरण का काम हुआ है। पशुपालक बचाव करें और परेशानी होने पर पशु अस्पताल लेकर जाए।
ऐसे करें रोगों की पहचान: पशुओं को गलाघोंटू होने पर गले में सूजन आ जाती है और बुखार भी बना रहता है। सांस लेने में दिक्कत होती है। गले में सूजन व बुखार हो तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बीमारी को नजरंदाज करने पर पशु की जान भी जा सकती है।
खुरपका में पशु के पैर में छाले पड़ जाते हैं। बुखार के साथ खुर फट जाते हैं, जिससे पशु ठीक से चल नहीं पाते। इसी तरह मुंहपका में बुखार के साथ मुंह में छाले पड़ जाते हैं, जिससे पशुओं को खाने-पीने में दिक्कत होने लगती हैं। लंगड़ी बुखार में तेज बुखार आता है और पशु के पिछले पैर की मांस पेशियों में सूजन आ जाती है।
- विभाग शत प्रतिशत टीकाकरण का कर रहा दावा
- बचाव की भी जारी की एडवाइजरी
अमर उजाला ब्यूरो