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बच्चों को दिया जाएगा कृषि का प्रयोगात्मक ज्ञान
Updated Fri, 23 Jun 2017 07:54 PM IST
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गौरव राठौर
कानपुर देहात। अब परिषदीय विद्यालय के बच्चे मिड-डे मील में ताजी हरी सब्जियों का स्वाद चखेंगे। ये सब्जियां बाजार से खरीदने के बजाय स्कूलों में ही उगाई जाएंगी। इसका मकसद बच्चों को कृषि विज्ञान का प्रयोगात्मक ज्ञान देने के साथ ही उनके माध्यम से किसानों तक ज्यादा से ज्यादा जैविक खाद के इस्तेमाल का संदेश पहुंचाना भी होगा। इसके लिए जिले में ऐसे स्कूलों को चिह्नित करने का काम शुरू हो गया है जिनके पास पर्याप्त जगह है।
गौरतलब है कि तीन दशक पीछे तक परिषदीय स्कूलों में फूलों के साथ हरी सब्जियों के पौधे भी दिखते थे। स्कूलों में जमीन की अधिकता के चलते उसका उपयोग सब्जी उगाने के काम में किया जाता था। कक्षा पांच व जूनियर कक्षाओं के बच्चे अपनी अपनी क्यारियां शिक्षकों के निर्देशन में तैयार करते थे और उसमें सब्जियां, फूल आदि उगाते थे। इससे परिसर भी हरा भरा व अच्छा दिखता था। वहीं, कृषि विज्ञान की प्रयोगात्मक पढ़ाई भी चलती रहती थी। समय के साथ व्यवस्था बदली तो परिषदीय स्कूलों में काफी तब्दीली हो गई। खाली जगहों में एकल कक्ष, रसोई घर, आंगनबाड़ी आदि बनने से इन कार्यों के लिए जगह कम होती चली गई। इसी के साथ फूल, सब्जियां उगाने का सिलसिला बंद हो गया। आज स्थिति यह है कि कुछ स्कूलों में तो बच्चों के पढ़ने व शिक्षा संबंधी कार्य कलापों के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। शासन व विभाग ने एक बार फिर पुरानी परंपरा शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार अब परिषदीय स्कूलों की खाली पड़ी जमीन में पौधे व बेल वाली हरी सब्जी उगाई जाएंगी। सब्जियों के लिए क्यारी बनाई जाएंगी जिन्हें एमडीएम क्यारी का नाम दिया जाएगा।
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जैविक पद्धति से उगाई जाएंगी सब्जियां
स्कूलों की क्यारियों में सब्जी उगाने के लिए रसायनिक खाद व दवाओं का इस्तेमाल नहीं होगा। केवल जैविक पद्धति पर जोर रहेगा।
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जुलाई के पहले सप्ताह तक देनी है रिपोर्ट
सब्जी उगाने के लिए ऐसे स्कूलों को चिह्निकरण शुरू हो गया है। सभी दस ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारियों को शासन की इस मंशा से अवगत करा दिया गया है। जुलाई के पहले सप्ताह तक रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को भेजनी है।
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पूर्व आईएएस ने किया था यह प्रयोग
जिले में तैनाती के दौरान आईएएस अपूर्वा दुबे ने अकबरपुर ब्लाक के जूनियर हाईस्कूल हसनापुर में काफी जगह खाली पड़ी देख किचेन गार्डन बनाने का प्रयोग किया था। वह अकबरपुर में बतौर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट तैनात थी। बेहतर परिणाम मिलने पर वह इसे अन्य स्कूलों में भी लागू करना चाहतीं थीं। लेकिन उनके स्थानांतरण से व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।
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बोले जिम्मेदार
स्कूलों में क्यारी बना कर सब्जियां उगाने का शासनादेश आया है। इसके अनुपालन के लिए सभी बीईओ को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही स्कूलों का चिह्नित कर जुलाई से इसे लागू कराने का प्रयास किया जाएगा। जिले के अधिकांश स्कूलों में पर्याप्त जगह है। उनमें सब्जियां उगाई जा सकेंगी।
- दीपा शुक्ला, जिला समन्वयक एमडीएम
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कानपुर देहात। अब परिषदीय विद्यालय के बच्चे मिड-डे मील में ताजी हरी सब्जियों का स्वाद चखेंगे। ये सब्जियां बाजार से खरीदने के बजाय स्कूलों में ही उगाई जाएंगी। इसका मकसद बच्चों को कृषि विज्ञान का प्रयोगात्मक ज्ञान देने के साथ ही उनके माध्यम से किसानों तक ज्यादा से ज्यादा जैविक खाद के इस्तेमाल का संदेश पहुंचाना भी होगा। इसके लिए जिले में ऐसे स्कूलों को चिह्नित करने का काम शुरू हो गया है जिनके पास पर्याप्त जगह है।
गौरतलब है कि तीन दशक पीछे तक परिषदीय स्कूलों में फूलों के साथ हरी सब्जियों के पौधे भी दिखते थे। स्कूलों में जमीन की अधिकता के चलते उसका उपयोग सब्जी उगाने के काम में किया जाता था। कक्षा पांच व जूनियर कक्षाओं के बच्चे अपनी अपनी क्यारियां शिक्षकों के निर्देशन में तैयार करते थे और उसमें सब्जियां, फूल आदि उगाते थे। इससे परिसर भी हरा भरा व अच्छा दिखता था। वहीं, कृषि विज्ञान की प्रयोगात्मक पढ़ाई भी चलती रहती थी। समय के साथ व्यवस्था बदली तो परिषदीय स्कूलों में काफी तब्दीली हो गई। खाली जगहों में एकल कक्ष, रसोई घर, आंगनबाड़ी आदि बनने से इन कार्यों के लिए जगह कम होती चली गई। इसी के साथ फूल, सब्जियां उगाने का सिलसिला बंद हो गया। आज स्थिति यह है कि कुछ स्कूलों में तो बच्चों के पढ़ने व शिक्षा संबंधी कार्य कलापों के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। शासन व विभाग ने एक बार फिर पुरानी परंपरा शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार अब परिषदीय स्कूलों की खाली पड़ी जमीन में पौधे व बेल वाली हरी सब्जी उगाई जाएंगी। सब्जियों के लिए क्यारी बनाई जाएंगी जिन्हें एमडीएम क्यारी का नाम दिया जाएगा।
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जैविक पद्धति से उगाई जाएंगी सब्जियां
स्कूलों की क्यारियों में सब्जी उगाने के लिए रसायनिक खाद व दवाओं का इस्तेमाल नहीं होगा। केवल जैविक पद्धति पर जोर रहेगा।
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जुलाई के पहले सप्ताह तक देनी है रिपोर्ट
सब्जी उगाने के लिए ऐसे स्कूलों को चिह्निकरण शुरू हो गया है। सभी दस ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारियों को शासन की इस मंशा से अवगत करा दिया गया है। जुलाई के पहले सप्ताह तक रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को भेजनी है।
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पूर्व आईएएस ने किया था यह प्रयोग
जिले में तैनाती के दौरान आईएएस अपूर्वा दुबे ने अकबरपुर ब्लाक के जूनियर हाईस्कूल हसनापुर में काफी जगह खाली पड़ी देख किचेन गार्डन बनाने का प्रयोग किया था। वह अकबरपुर में बतौर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट तैनात थी। बेहतर परिणाम मिलने पर वह इसे अन्य स्कूलों में भी लागू करना चाहतीं थीं। लेकिन उनके स्थानांतरण से व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।
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बोले जिम्मेदार
स्कूलों में क्यारी बना कर सब्जियां उगाने का शासनादेश आया है। इसके अनुपालन के लिए सभी बीईओ को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही स्कूलों का चिह्नित कर जुलाई से इसे लागू कराने का प्रयास किया जाएगा। जिले के अधिकांश स्कूलों में पर्याप्त जगह है। उनमें सब्जियां उगाई जा सकेंगी।
- दीपा शुक्ला, जिला समन्वयक एमडीएम