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दो हत्याकांडों में चार को आजीवन कारावास
Updated Fri, 12 Jan 2018 11:53 PM IST
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फर्रुखाबाद। अलग-अलग दो हत्याकांडों में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने चार मुजरिमों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने हत्या के एक मुकदमे के तीन लोगों को सजा के साथ एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। दूसरे मामले में सजा के साथ 35 हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर मुजरिमों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
कंपिल थाना क्षेत्र के गांव अहिवरन नगला निवासी दुर्वीन सिंह और उसका भाई बालकराम 23 अप्रैल 2002 को बैठक में बैठे हुए थे। तभी गांव के रघुवीर, बादशाह और चक्रवाल वहां असलहें लेकर आए और पुरानी रंजिश में फायरिंग करने लगे। दुर्वीन सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी और बालकराम घायल हो गए थे। घटना की
रिपोर्ट मृतक के पुत्र मुकेश ने रघुवीर, बादशाह और चक्रपाल के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने दलीले पेश की। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों को दोषी पाकर हत्या के
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जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई, 20-20 हजारी रुपये जुर्माना किया। जान लेवा हमले के जुर्म में दोषी पाकर सात-सात साल की सजा सुनाई और 10-10 हजार रुपये जुर्माना किया। बादशाह को आर्म्स एक्ट के जुर्म में दोषी पाकर पांच साल की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये जुर्माना किया। न्यायाधीश ने सभी सजाए एक साथ चलने का आदेश दिया है।
सदर मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव महमूदपुर निवासी जगदीश कुमार की पुत्री भूरी उर्फ सुनीता (3) और पुत्र लालू (4) 7 सितंबर 2006 को गांव में दुकान से चूर्ण लेने गए थे। वहां से वापस लौटते समय रास्ते में गांव के प्रमोद कुमार ने दोनों बच्चों पर फायर कर दिया। इससे दोनों बच्चे घायल हो गए। गोली की आवाज सुनकर जगदीश की मां मुला और पुत्र विनोद दौड़ कर गया तो उन पर भी आरोपी ने फायर कर दिया। इससे वह भी गोली लगने से घायल
हो गए। तीन वर्षीय सुनीता उर्फ भूरी की घटना के थोड़ी देर बाद गोली लगने के कारण मौत हो गई थी। अन्य घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतक बालिका के पिता जगदीश ने प्रमोद कुमार, दुर्विजय, होशियार और सत्येंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील और सहायक जिला
शासकीय अधिवक्ता ने दलीले पेश की। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने आरोपी प्रमोद को हत्या केे जुर्म में दोषी पाकर आजीवन कारावास, 20 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जान लेवा हमले के जुर्म में दोषी पाकर पांच साल की सजा और दस हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। आर्म्स एक्ट में तीन साल की सजा सुनाई और पांच हजार रुपये जुर्माना किया। तीनों सजाए एक साथ चलेगी। आरेापी दुर्विजय, होशियार और सत्येंद्र को साक्ष्य के अभाव में न्यायाधीश ने मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया है।
दो हत्याकांडों में चार को उम्रकैद
कंपिल के गांव अहिवरन नगला में पुरानी रंजिश में युवक को गोली मारी थी
सदर के मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव महमूदपुर में बालिका की गोली लगने से हुई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो
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कंपिल थाना क्षेत्र के गांव अहिवरन नगला निवासी दुर्वीन सिंह और उसका भाई बालकराम 23 अप्रैल 2002 को बैठक में बैठे हुए थे। तभी गांव के रघुवीर, बादशाह और चक्रवाल वहां असलहें लेकर आए और पुरानी रंजिश में फायरिंग करने लगे। दुर्वीन सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी और बालकराम घायल हो गए थे। घटना की
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रिपोर्ट मृतक के पुत्र मुकेश ने रघुवीर, बादशाह और चक्रपाल के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने दलीले पेश की। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों को दोषी पाकर हत्या के
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जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई, 20-20 हजारी रुपये जुर्माना किया। जान लेवा हमले के जुर्म में दोषी पाकर सात-सात साल की सजा सुनाई और 10-10 हजार रुपये जुर्माना किया। बादशाह को आर्म्स एक्ट के जुर्म में दोषी पाकर पांच साल की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये जुर्माना किया। न्यायाधीश ने सभी सजाए एक साथ चलने का आदेश दिया है।
सदर मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव महमूदपुर निवासी जगदीश कुमार की पुत्री भूरी उर्फ सुनीता (3) और पुत्र लालू (4) 7 सितंबर 2006 को गांव में दुकान से चूर्ण लेने गए थे। वहां से वापस लौटते समय रास्ते में गांव के प्रमोद कुमार ने दोनों बच्चों पर फायर कर दिया। इससे दोनों बच्चे घायल हो गए। गोली की आवाज सुनकर जगदीश की मां मुला और पुत्र विनोद दौड़ कर गया तो उन पर भी आरोपी ने फायर कर दिया। इससे वह भी गोली लगने से घायल
हो गए। तीन वर्षीय सुनीता उर्फ भूरी की घटना के थोड़ी देर बाद गोली लगने के कारण मौत हो गई थी। अन्य घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतक बालिका के पिता जगदीश ने प्रमोद कुमार, दुर्विजय, होशियार और सत्येंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील और सहायक जिला
शासकीय अधिवक्ता ने दलीले पेश की। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने आरोपी प्रमोद को हत्या केे जुर्म में दोषी पाकर आजीवन कारावास, 20 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जान लेवा हमले के जुर्म में दोषी पाकर पांच साल की सजा और दस हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। आर्म्स एक्ट में तीन साल की सजा सुनाई और पांच हजार रुपये जुर्माना किया। तीनों सजाए एक साथ चलेगी। आरेापी दुर्विजय, होशियार और सत्येंद्र को साक्ष्य के अभाव में न्यायाधीश ने मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया है।
दो हत्याकांडों में चार को उम्रकैद
कंपिल के गांव अहिवरन नगला में पुरानी रंजिश में युवक को गोली मारी थी
सदर के मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव महमूदपुर में बालिका की गोली लगने से हुई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो