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शिक्षित ही अधिकारों के प्रति होंगे सजग
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कानपुर देहात। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत बुधवार को डेरापुर क्षेत्र के कुड़ावल प्राथमिक विद्यालय में जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के माध्यम से बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें शिक्षित होने की सीख दी गई। साथ ही उन्हें नारी गरिमा के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से काम करने की शपथ भी दिलाई गई।
शनिवार को कुड़ावल गांव के कन्या विद्यालय में नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं एवं महिलाओं को संबोधित करते हुए एसडीएम दीपाली भार्गव ने कहा कि शिक्षा के बिना उनका सशक्त होना नामुमकिन है। शिक्षित व्यक्ति ही अधिकारों के प्रति सजग होता है। शिक्षा के साथ साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है। क्योंकि स्वस्थ्य मन ही स्वस्थ्य तन का परिचायक है। उन्होंने मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को हमेशा सकारात्मक सोच रखना चाहिए। तनाव की स्थिति में ईश्वर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये। मध्यकाल में नारी की गरिमा में कमी जरूर आई, लेकिन वक्त के साथ नारियों ने अपनी ताकत का भी एहसास कराया है। सरकार की ओर से भी महिला सशक्तीकरण को लेकर कार्यक्रम हो रहे हैं। जिनका एकमात्र उद्देश्य महिलाओं को समाज की मुख्य धारा में लाना है। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के बल पर पहचान बना रहीं हैं। वह किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। लेकिन आज भी समाज के कुछ लोग महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं। उन्हें पुरुषों की अपेक्षा कमतर आंकने की भूल करते हैं। इस दौरान प्रधान हिम्मत सिंह यादव, विद्यालय प्रधानाध्यापक राजेश सचान, शिक्षक नेहा, विनीता देवी, ममतेश्वरी, कल्पना कटियार, अमिता तिवारी, सुमन देवी, कुसमा, गीता देवी, लक्ष्मी देवी सहित शिक्षक व छात्र-छात्राएं मौजूद रही।
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शनिवार को कुड़ावल गांव के कन्या विद्यालय में नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं एवं महिलाओं को संबोधित करते हुए एसडीएम दीपाली भार्गव ने कहा कि शिक्षा के बिना उनका सशक्त होना नामुमकिन है। शिक्षित व्यक्ति ही अधिकारों के प्रति सजग होता है। शिक्षा के साथ साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है। क्योंकि स्वस्थ्य मन ही स्वस्थ्य तन का परिचायक है। उन्होंने मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को हमेशा सकारात्मक सोच रखना चाहिए। तनाव की स्थिति में ईश्वर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये। मध्यकाल में नारी की गरिमा में कमी जरूर आई, लेकिन वक्त के साथ नारियों ने अपनी ताकत का भी एहसास कराया है। सरकार की ओर से भी महिला सशक्तीकरण को लेकर कार्यक्रम हो रहे हैं। जिनका एकमात्र उद्देश्य महिलाओं को समाज की मुख्य धारा में लाना है। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के बल पर पहचान बना रहीं हैं। वह किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। लेकिन आज भी समाज के कुछ लोग महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं। उन्हें पुरुषों की अपेक्षा कमतर आंकने की भूल करते हैं। इस दौरान प्रधान हिम्मत सिंह यादव, विद्यालय प्रधानाध्यापक राजेश सचान, शिक्षक नेहा, विनीता देवी, ममतेश्वरी, कल्पना कटियार, अमिता तिवारी, सुमन देवी, कुसमा, गीता देवी, लक्ष्मी देवी सहित शिक्षक व छात्र-छात्राएं मौजूद रही।
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