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आहार कंपनी के यहां मिला 121 करोड़ का काला धन, 52 लाख के आभूषण, अभी भी टीमें कर रहीं जांच पड़ताल
Sat, 21 Nov 2020 01:17 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर/नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर/नई दिल्ली
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 21 Nov 2020 01:17 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
पशुआहार बनाने वाली कंपनी के यहां आयकर छापे में 121 करोड़ रुपये का काला धन मिला है। साथ ही 52 लाख के सोने व हीरे के आभूषण जब्त किए गए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बोर्ड की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि 18 नवंबर को कानपुर, गोरखपुर, नोएडा, दिल्ली और लुधियाना में 16 स्थानों पर छापे मारे गए।
इनमें 121 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता चला। वहीं, शेष गहनों के स्रोतों का सत्यापन किया जा रहा है। सात लॉकरों का भी पता चला है, जिनकी तलाश बाकी है। आहार बनाने वाली देश की अग्रणी कंपनी और आरती चिटफंड मामले में नया खुलासा भी हुआ है। आयकर विभाग की जांच में पता चला है कि कंपनी की कमाई को पहले 13 मुखौटा कंपनियाें में लगाया गया।
फिर लोन के माध्यम से इसे वापस लेकर इसे एक नंबर का करा लिया गया। इन कंपनियों को दिल्ली, कोलकाता में दिखाया गया था। जबकि वास्तविकता में इनका अस्तित्व नहीं है। इन कंपनियों में फर्जी लोगों को निदेशक बनाया गया था। जैसे एक निदेशक टैक्सी चालक था, जिसके नाम पर 11 बैंक खाते थे और इन खातों में भारी लेनदेन हुआ था।
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इनमें 121 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता चला। वहीं, शेष गहनों के स्रोतों का सत्यापन किया जा रहा है। सात लॉकरों का भी पता चला है, जिनकी तलाश बाकी है। आहार बनाने वाली देश की अग्रणी कंपनी और आरती चिटफंड मामले में नया खुलासा भी हुआ है। आयकर विभाग की जांच में पता चला है कि कंपनी की कमाई को पहले 13 मुखौटा कंपनियाें में लगाया गया।
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फिर लोन के माध्यम से इसे वापस लेकर इसे एक नंबर का करा लिया गया। इन कंपनियों को दिल्ली, कोलकाता में दिखाया गया था। जबकि वास्तविकता में इनका अस्तित्व नहीं है। इन कंपनियों में फर्जी लोगों को निदेशक बनाया गया था। जैसे एक निदेशक टैक्सी चालक था, जिसके नाम पर 11 बैंक खाते थे और इन खातों में भारी लेनदेन हुआ था।
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सीबीडीटी के मुताबिक 121 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज पूरी तरह बोगस है और यह कंपनी की अघोषित आय है। ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ गया है। यह पहला मौका है जब किसी कंपनी पर आयकर विभाग की टीमें लगातार तीसरे दिन तक जांच कर रही हैं। प्रधान आयकर निदेशक जांच कानपुर के निर्देश पर बुधवार को आहार कंपनी के अलावा आरती चिटफंड के 30 प्रतिष्ठानों पर अलग-अलग टीमों ने छापा मारा था।
यूपी, दिल्ली और पंजाब स्थित घर, कार्यालयों पर एक साथ कार्रवाई की गई थी। कंपनी का सालाना टर्न ओवर एक हजार करोड़ होने के दस्तावेज मिले थे। सूत्रों ने बताया कि अभी भी कानपुर स्थित आवास, गोदाम, फैक्टरियों समेत 20 स्थानों पर जांच-पड़ताल जारी है। कंपनी मालिकों के बैंक लॉकरों को पहले ही सील कर दिया गया है। जिसे बाद में खोला जाएगा। सूत्रों ने बताया कि काले धन को खपाने का खेल लंबे समय से चल रहा था। अब यह देखा जा रहा है कि कितने समय से इन कंपनियों में रुपया लगाया गया और लोन के जरिये वापस लिया गया। यह भी देखा जा रहा है कि किन-किन लोगों के रुपयों का इस्तेमाल किया गया है।
ये होती हैं मुखौटा कंपनियां
मुखौटा कंपनियां केवल कागजों पर ही चलती हैं। इनमें कोई भौतिक लेन-देन नहीं दिखाया जाता है। मनीलॉड्रिंग का यह बेहतर जरिया माना जाता है। इन कंपनियों का कोई अस्तित्व न होने से रुपयों का लेन-देन बेहद आसान होता है। ज्यादातर कंपनियां दिल्ली या कोलकाता की दिखाई जाती हैं।
यूपी, दिल्ली और पंजाब स्थित घर, कार्यालयों पर एक साथ कार्रवाई की गई थी। कंपनी का सालाना टर्न ओवर एक हजार करोड़ होने के दस्तावेज मिले थे। सूत्रों ने बताया कि अभी भी कानपुर स्थित आवास, गोदाम, फैक्टरियों समेत 20 स्थानों पर जांच-पड़ताल जारी है। कंपनी मालिकों के बैंक लॉकरों को पहले ही सील कर दिया गया है। जिसे बाद में खोला जाएगा। सूत्रों ने बताया कि काले धन को खपाने का खेल लंबे समय से चल रहा था। अब यह देखा जा रहा है कि कितने समय से इन कंपनियों में रुपया लगाया गया और लोन के जरिये वापस लिया गया। यह भी देखा जा रहा है कि किन-किन लोगों के रुपयों का इस्तेमाल किया गया है।
ये होती हैं मुखौटा कंपनियां
मुखौटा कंपनियां केवल कागजों पर ही चलती हैं। इनमें कोई भौतिक लेन-देन नहीं दिखाया जाता है। मनीलॉड्रिंग का यह बेहतर जरिया माना जाता है। इन कंपनियों का कोई अस्तित्व न होने से रुपयों का लेन-देन बेहद आसान होता है। ज्यादातर कंपनियां दिल्ली या कोलकाता की दिखाई जाती हैं।