{"_id":"5f12e2ca8ebc3e637a264806","slug":"111595073226-kanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सावन के तीसरे सोमवार को सोमवती अमावस्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावन के तीसरे सोमवार को सोमवती अमावस्या
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राहुल शुक्ला कानपुर। राहुल शुक्ला ------------------ श्रावण मास के तीसरे सोमवार को सोमवती अमावस्या पड़ रही है।इससे तीसरा सोमवार ज्यादा फलदायी हो गया है,इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। क्योंकि 20 साल बाद सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। इससे पहले 31 जुलाई 2000 में ऐसा संयोग बना था।इसे हरियाली अमावस्या भी कहते हैं। इस अमावस्या पर शिवजी के साथ ही देवी पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय स्वामी और नंदी का विशेष पूजा की जाती है। पंडित केए दुबे पद्मेश का कहना है कि सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। ये वर्ष में लगभग एक अथवा दो ही बार पड़ती है। इस अमावस्या का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व होता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल मिलता है।शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष।इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर १०८ बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है।और कुछ अन्य परम्पराओं में भँवरी देने का भी विधान होता है। धान, पान और खड़ी हल्दी को मिला कर उसे विधान पूर्वक तुलसी के पेड़ को चढाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व है। ज्योतिष सेवा संस्थान के अध्यक्ष आचार्य पवन तिवारी का कहना है कि नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान, देव पूजा एवं पौधारोपण आदि शुभ काम करने से अक्षय फल प्राप्ति होती है। जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष, शनि की दशा और पितृ दोष है। उन्हें इस दिन शिवलिंग पर पंचामृत अवश्य चढ़ाना चाहिए। हरियाली अमावस्या पर हर्षण योग और पुनर्वसु नक्षत्र का विशेष संयोग भी बन रहा है, जो शुभ फलदायी है ----------------- 5 ग्रह होंगे स्वराशि में हरियाली अमावस्या पर 5 ग्रह (चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र और शनि) अपनी-अपनी राशियों में रहेंगे। 5 ग्रहों के स्वगृही होने से इस दिन किया गया स्नान और दान और भी पुण्य फलदायी रहेगा। इस पर्व पर किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितर तृप्त होते हैं। भगवान शिव-पार्वती की पूजा भी इस दिन की जाती है। हरियाली अमावस्या पर खेती में काम आने वाले औजार हल, हंसिया आदि की पूजा करने की परंपरा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन