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कोरोना सिमटा तो पटरी पर लौटा जरदोजी का कारोबार
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कढाई करते कारीगर। संवाद
- फोटो : KANNAUJ
तालग्राम (कन्नौज)। कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के चलते जरदोजी का कारोबार तकरीबन चौपट गया था। अनलॉक होने के बाद से जरदोजी का कारोबार फिर पटरी पर लौट रहा है। हालांकि अभी पहले की तरह तेजी नहीं है, लेकिन 60 से 70 फीसदी तक कारोबार शुरू हो चुका है।
करीब डेढ़ साल से हो रहे घाटे से टूट चुके कारोबारी सरकार से सहयोग की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सरकारी योजनाओं से सहायता मिल जाए तो व्यापारी तेजी पकड़ ले। कारीगर जुल्फिकार, वाहिद, ज़ावेद, शमनम, रिचा, रचना और शफीक ने बताया कि इलाके के तालग्राम, रसूलाबाद, सलेमपुर, भवानीसराय, अकरमाबाद, अमोलर, नेकनामपुर, गोविदपुर समेत कई गांवों में जरदोजी का कारोबार कुटीर उद्योग का रूप ले रहा है।
कस्बे में 10 से 12 कारीगरों वाले छोटे-छोटे कारखाने अब फिर शुरू हो गए हैं। जरदोजी कारोबारी भरसक प्रयास कर रहे हैं कि कारोबार पहले जैसी रफ्तार पकड़ ले। काफी हद तक इसमें कारोबारियों को सफलता भी मिली है। हाथों के हुनर से तैयार लहंगा, चुनरी, दुपट्टों और कढ़ी साड़ी की दूसरे शहरों में एक बार फिर डिमांड बढ़ गई है।
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ढर्रे पर आ रहा कारोबार
रसूलाबाद निवासी कारोबारी शीबू कुरैशी का कहना है कि कोरोना में जमा पूंजी खत्म हो गई है। बाजार में रुपया फंस जाने से कारोबार में परेशानी हो रही है। कारोबार में तेजी लाने के लिए रुपयों की सबसे अधिक जरूरत है। रुपयों की कमी से कारोबार में मंदी है, लेकिन धीरे-धीरे व्यापार बढ़ रहा है।
सरकारी मदद मिले तो बने बात
रसूलाबाद निवासी शरीफ अंसारी का कहना है कि आसपास के शहरों से आर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। साथ ही देश के प्रमुख शहरों से भी आर्डर मिल रहे हैं। अगर इस समय सरकारी मदद मिल जाए कारोबार को पंख लग सकते हैं। कारोबारियों के अलावा कारीगरों के दिन फिर से बहुर सकते हैं।
लोन देने में बैंक कर रहे आनाकानी
कस्बा तालग्राम निवासी मोहम्मद फहीम खान का कहना है कि जरदोजी कारोबार के लिए बैंक लोन देने में आनाकानी कर रहे हैं। जिला उद्योग केंद्र से भी योजनाएं पता नहीं चलती हैं। कुटीर उद्योग की तरह मदद मिले तो जरदोजी कारोबार में चार चांद लग सकते है। कारोबार में फिर से तेजी आ सकती है।
कारीगरों को मिलने लगा काम
तालग्राम निवासी कारीगर रिजवान का कहना है कि जरदोजी से इलाके लगभग चार हजार से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। इस कारोबार से महिलाएं भी जुड़ी हैं जो कारीगरी का काम घरों में करती हैं। अब फिर काम मिलने लगा है। मुनाफ की कुछ आस जगी है। अनलॉक होने से धीरे-धीरे कारोबार पटरी पर आ रहा है।
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करीब डेढ़ साल से हो रहे घाटे से टूट चुके कारोबारी सरकार से सहयोग की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सरकारी योजनाओं से सहायता मिल जाए तो व्यापारी तेजी पकड़ ले। कारीगर जुल्फिकार, वाहिद, ज़ावेद, शमनम, रिचा, रचना और शफीक ने बताया कि इलाके के तालग्राम, रसूलाबाद, सलेमपुर, भवानीसराय, अकरमाबाद, अमोलर, नेकनामपुर, गोविदपुर समेत कई गांवों में जरदोजी का कारोबार कुटीर उद्योग का रूप ले रहा है।
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कस्बे में 10 से 12 कारीगरों वाले छोटे-छोटे कारखाने अब फिर शुरू हो गए हैं। जरदोजी कारोबारी भरसक प्रयास कर रहे हैं कि कारोबार पहले जैसी रफ्तार पकड़ ले। काफी हद तक इसमें कारोबारियों को सफलता भी मिली है। हाथों के हुनर से तैयार लहंगा, चुनरी, दुपट्टों और कढ़ी साड़ी की दूसरे शहरों में एक बार फिर डिमांड बढ़ गई है।
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ढर्रे पर आ रहा कारोबार
रसूलाबाद निवासी कारोबारी शीबू कुरैशी का कहना है कि कोरोना में जमा पूंजी खत्म हो गई है। बाजार में रुपया फंस जाने से कारोबार में परेशानी हो रही है। कारोबार में तेजी लाने के लिए रुपयों की सबसे अधिक जरूरत है। रुपयों की कमी से कारोबार में मंदी है, लेकिन धीरे-धीरे व्यापार बढ़ रहा है।
सरकारी मदद मिले तो बने बात
रसूलाबाद निवासी शरीफ अंसारी का कहना है कि आसपास के शहरों से आर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। साथ ही देश के प्रमुख शहरों से भी आर्डर मिल रहे हैं। अगर इस समय सरकारी मदद मिल जाए कारोबार को पंख लग सकते हैं। कारोबारियों के अलावा कारीगरों के दिन फिर से बहुर सकते हैं।
लोन देने में बैंक कर रहे आनाकानी
कस्बा तालग्राम निवासी मोहम्मद फहीम खान का कहना है कि जरदोजी कारोबार के लिए बैंक लोन देने में आनाकानी कर रहे हैं। जिला उद्योग केंद्र से भी योजनाएं पता नहीं चलती हैं। कुटीर उद्योग की तरह मदद मिले तो जरदोजी कारोबार में चार चांद लग सकते है। कारोबार में फिर से तेजी आ सकती है।
कारीगरों को मिलने लगा काम
तालग्राम निवासी कारीगर रिजवान का कहना है कि जरदोजी से इलाके लगभग चार हजार से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। इस कारोबार से महिलाएं भी जुड़ी हैं जो कारीगरी का काम घरों में करती हैं। अब फिर काम मिलने लगा है। मुनाफ की कुछ आस जगी है। अनलॉक होने से धीरे-धीरे कारोबार पटरी पर आ रहा है।