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Kannauj News: बिना हैंडओवर तैनाती से प्रशिक्षण संस्थान में अटका काम
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कन्नौज। क्षेत्रीय पंचायतीराज प्रशिक्षण संस्थान अनौगी का नवनिर्मित भवन शासकीय व्यवस्था और नियमों के उलटफेर में उलझ गया है। एक तरफ जहां घटिया निर्माण और तकनीकी कमियों को लेकर शासन स्तर पर जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर विभाग को आधिकारिक हैंडओवर मिलने से पहले ही वहां अधिकारी की संबद्धता का आदेश जारी कर दिया गया है। बिना प्रभार और स्टाफ के हुई इस तैनाती से विभागीय कार्यों में प्रशासनिक असमंजस की स्थिति है।
शासन के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है। इस जांच टीम में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), सिंचाई विभाग और विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के साथ कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि व पंचायतीराज अधिकारी शामिल हैं। यह समिति स्थल का निरीक्षण कर तकनीकी गुणवत्ता की जांच करेगी। कमेटी की हरी झंडी और रिपोर्ट मिलने के बाद ही भवन पंचायतीराज विभाग को सौंपा जाएगा।
दूसरी तरफ, भवन का हस्तांतरण हुए बिना ही शासन ने आठ सितंबर को जिला पंचायत राज अधिकारी व उपनिदेशक पंचायत राजेंद्र प्रकाश को अनौगी संस्थान में संबद्ध करने का निर्देश जारी कर दिया। हालांकि, जिले में नए डीपीआरओ की तैनाती न होने के कारण उन्हें अब तक रिलीव नहीं किया जा सका है। शासकीय परंपरा के विपरीत, भवन तैयार होने और प्रभार मिलने से पहले ही अधिकारी का आदेश जारी होने से यह फैसला गले की फांस बन गया है। संस्थान में कर्मचारियों की तैनाती भी नहीं हुई है। नतीजतन, राजेंद्र प्रकाश न तो पुराना पद छोड़ पा रहे हैं और न ही नई जगह पूरी तरह से कार्यभार संभाल पा रहे हैं। सीडीओ ने बताया कि डीपीआरओ की स्थिति को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है और जल्द ही तकनीकी जांच पूरी कर भवन का हैंडओवर पूरा कराया जाएगा।
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तैनाती बनी गले की फांस
शासकीय कार्यप्रणाली को दरकिनार कर अनौगी प्रशिक्षण संस्थान में अधूरी तैयारियों के बीच की गई अधिकारी की तैनाती अब गले की फांस बन गई है। आमतौर पर भवन का निर्माण पूरा होने और हस्तांतरण के बाद ही अधिकारियों की नियुक्ति होती है पर यहां मामला उल्टा है। वर्तमान में प्रशिक्षण संस्थान का भवन जांच के दायरे में है और कागजों में विभाग को सौंपना बाकी है। इसके बावजूद अधिकारी की संबद्धता का आदेश जारी कर दिया गया। शासन के इस फैसले से स्थानीय प्रशासनिक तालमेल गड़बड़ा गया है और अधिकारी दोहरी दुविधा में फंसकर रह गए हैं।
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शासन के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है। इस जांच टीम में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), सिंचाई विभाग और विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के साथ कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि व पंचायतीराज अधिकारी शामिल हैं। यह समिति स्थल का निरीक्षण कर तकनीकी गुणवत्ता की जांच करेगी। कमेटी की हरी झंडी और रिपोर्ट मिलने के बाद ही भवन पंचायतीराज विभाग को सौंपा जाएगा।
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दूसरी तरफ, भवन का हस्तांतरण हुए बिना ही शासन ने आठ सितंबर को जिला पंचायत राज अधिकारी व उपनिदेशक पंचायत राजेंद्र प्रकाश को अनौगी संस्थान में संबद्ध करने का निर्देश जारी कर दिया। हालांकि, जिले में नए डीपीआरओ की तैनाती न होने के कारण उन्हें अब तक रिलीव नहीं किया जा सका है। शासकीय परंपरा के विपरीत, भवन तैयार होने और प्रभार मिलने से पहले ही अधिकारी का आदेश जारी होने से यह फैसला गले की फांस बन गया है। संस्थान में कर्मचारियों की तैनाती भी नहीं हुई है। नतीजतन, राजेंद्र प्रकाश न तो पुराना पद छोड़ पा रहे हैं और न ही नई जगह पूरी तरह से कार्यभार संभाल पा रहे हैं। सीडीओ ने बताया कि डीपीआरओ की स्थिति को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है और जल्द ही तकनीकी जांच पूरी कर भवन का हैंडओवर पूरा कराया जाएगा।
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तैनाती बनी गले की फांस
शासकीय कार्यप्रणाली को दरकिनार कर अनौगी प्रशिक्षण संस्थान में अधूरी तैयारियों के बीच की गई अधिकारी की तैनाती अब गले की फांस बन गई है। आमतौर पर भवन का निर्माण पूरा होने और हस्तांतरण के बाद ही अधिकारियों की नियुक्ति होती है पर यहां मामला उल्टा है। वर्तमान में प्रशिक्षण संस्थान का भवन जांच के दायरे में है और कागजों में विभाग को सौंपना बाकी है। इसके बावजूद अधिकारी की संबद्धता का आदेश जारी कर दिया गया। शासन के इस फैसले से स्थानीय प्रशासनिक तालमेल गड़बड़ा गया है और अधिकारी दोहरी दुविधा में फंसकर रह गए हैं।