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किशोरों व युवाओं की सोच बदल देती है सत्ता
ब्यूरो/अमर उजाला कन्नौज
Updated Sat, 09 Apr 2016 12:53 AM IST
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मेडिकल कालेज में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते शिक्षा राज्यमंत्री।
- फोटो : अमर उजाला
राजकीय मेडिकल कालेज में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एज ग्रुप 11 से 19 वर्ष के किशोर व किशोरियों के मानसिक व शारीरिक विकास के दौरान उनकी बदलती लाइफ स्टाइल व मानसिक सोच पर चिंता जताई।
बताया कि देश में इस एज ग्रुप की आबादी 23 फीसदी के करीब है, इनमें यदि 25 वर्ष तक के युवाओं को शामिल कर लिया जाए तो इनकी आबादी 32 फीसदी तक हो जाती है। इन किशोर व युवाओं की सोच लगभग एक जैसी होती है। सभी अपने लाइफ स्टाइल व कैरियर के प्रति चिंतित नजर आते है। इस एज ग्रुप की सोच देश के किसी भी सरकार का सत्ता परिवर्तन कर सकती है। पिछले चार सालों के दौरान यूपी, दिल्ली व केंद्र की सरकार इसका जीता जागता उदाहरण है। इस आशय के विचार विशेषज्ञों की रायशुमारी के दौरान आए।
सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डा.वीएन त्रिपाठी ने कहा कि इस टीन ऐज ग्रुप को शारीरिक, सामाजिक मानसिक व अध्यात्मिक रूप से स्वस्थ होने की जरुरत है। इस एज ग्रुप के किशोर व किशोरी शारीरिक परिवर्तन के साथ हताशा का शिकार होने लगते हैं, उन्हें लगता है कि माता-पिता, परिवार व समाज के लोग उनकी मानसिकता व लाइफ स्टाइल को समझ नहीं पा रहे है। इस वजह से उनमें नशीले पदार्थो के सेवन की लतें पड़ जाती है, जिससे आत्महत्या की घटनाएं काफी अधिक बढ़ी है।
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प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल ने कहा कि मेडिकल स्टूडेंटस अपनी नैतिक जिम्मेदारी को खुद समझें। खुद स्वस्थ रहकर लोगों को स्वस्थ रखने में मदद करें। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो सूरज की तरह तपना भी सीखो। राज्यमंत्री ने कहा कि कुछ साल पहले कन्नौज में मेडिकल कालेज एक सपने की तरह था। इस सपने को सीएम अखिलेश यादव ने पूरा किया। यही नहीं प्रदेश में छह और मेडिकल कालेज स्थापित किए, जिससे 600 सीटें बढ़ गई।
ह्दय रोग संस्थान कानपुर के निदेशक डा. विनय कृष्णा ने कहा कि टीन एज ग्रुप के किशोरों में फास्ट फूड का प्रचलन बढ़ रहा है। इस वजह से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर व डिप्रेशन की बीमारियां उनमें बढ़ रही है। इस एज ग्रुप के लोगों को फिजिकल एक्सरसाइज पर प्रतिदिन ध्यान देना होगा। दिल्ली की विशेषज्ञ चिकित्सक डा. प्रेमावाली ने सलाह देते हुए कहा कि किशोर व किशोरियों को नैतिक शिक्षा के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से यौन शिक्षा भी दी जानी चाहिए। इससे किशोर भटकेंगे नहीं, उन्हें सभी चीजों का ज्ञान होगा।
मौलाना आजाद मेडिकल कालेज दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सक डा. जुगुल किशोर ने कहा कि राजनैतिक दल, समाज सुधारक, चिकित्सक सभी का यह दायित्व है कि टीन एज ग्रुप के लोगों के लिए अच्छी योजनाएं बनाए। कहा कि 11 से 19 वर्ष तक के किशोर व किशोरियों की आबादी देश में 23 फीसदी है। इन सभी की मानसिकता लगभग एक जैसी है। इनका लाइफ स्टाइल भी एक जैसा है।
सेमिनार को भोपाल मेडिकल कालेज के डा. दिनेश कुमार पाल, एम्स दिल्ली के डा. पुनीत मिश्रा, अहमदाबाद मेडिकल कालेज के डा. निखिल खराडे ने भी संबोधित किया। इस दौरान मेडिकल कालेज के चिकित्सक डा. प्रदीप खारया, डा. संजीव त्रिपाठी, डा. नरेंद्र तिवारी, डा. तनु मिड्ढा, डा. संदीप कौशिक, डा. डाली रस्तोगी, डा. एसके वर्मन, डा. एसके ध्रुव, डा. शशांक, डा. रीना संत, डा. मृदुल भूषण समेत कई चिकित्सक व मेडिकल स्टूडेंटस मौजूद रहे।
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बताया कि देश में इस एज ग्रुप की आबादी 23 फीसदी के करीब है, इनमें यदि 25 वर्ष तक के युवाओं को शामिल कर लिया जाए तो इनकी आबादी 32 फीसदी तक हो जाती है। इन किशोर व युवाओं की सोच लगभग एक जैसी होती है। सभी अपने लाइफ स्टाइल व कैरियर के प्रति चिंतित नजर आते है। इस एज ग्रुप की सोच देश के किसी भी सरकार का सत्ता परिवर्तन कर सकती है। पिछले चार सालों के दौरान यूपी, दिल्ली व केंद्र की सरकार इसका जीता जागता उदाहरण है। इस आशय के विचार विशेषज्ञों की रायशुमारी के दौरान आए।
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सेमिनार को संबोधित करते हुए प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डा.वीएन त्रिपाठी ने कहा कि इस टीन ऐज ग्रुप को शारीरिक, सामाजिक मानसिक व अध्यात्मिक रूप से स्वस्थ होने की जरुरत है। इस एज ग्रुप के किशोर व किशोरी शारीरिक परिवर्तन के साथ हताशा का शिकार होने लगते हैं, उन्हें लगता है कि माता-पिता, परिवार व समाज के लोग उनकी मानसिकता व लाइफ स्टाइल को समझ नहीं पा रहे है। इस वजह से उनमें नशीले पदार्थो के सेवन की लतें पड़ जाती है, जिससे आत्महत्या की घटनाएं काफी अधिक बढ़ी है।
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प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल ने कहा कि मेडिकल स्टूडेंटस अपनी नैतिक जिम्मेदारी को खुद समझें। खुद स्वस्थ रहकर लोगों को स्वस्थ रखने में मदद करें। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो सूरज की तरह तपना भी सीखो। राज्यमंत्री ने कहा कि कुछ साल पहले कन्नौज में मेडिकल कालेज एक सपने की तरह था। इस सपने को सीएम अखिलेश यादव ने पूरा किया। यही नहीं प्रदेश में छह और मेडिकल कालेज स्थापित किए, जिससे 600 सीटें बढ़ गई।
ह्दय रोग संस्थान कानपुर के निदेशक डा. विनय कृष्णा ने कहा कि टीन एज ग्रुप के किशोरों में फास्ट फूड का प्रचलन बढ़ रहा है। इस वजह से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर व डिप्रेशन की बीमारियां उनमें बढ़ रही है। इस एज ग्रुप के लोगों को फिजिकल एक्सरसाइज पर प्रतिदिन ध्यान देना होगा। दिल्ली की विशेषज्ञ चिकित्सक डा. प्रेमावाली ने सलाह देते हुए कहा कि किशोर व किशोरियों को नैतिक शिक्षा के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से यौन शिक्षा भी दी जानी चाहिए। इससे किशोर भटकेंगे नहीं, उन्हें सभी चीजों का ज्ञान होगा।
मौलाना आजाद मेडिकल कालेज दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सक डा. जुगुल किशोर ने कहा कि राजनैतिक दल, समाज सुधारक, चिकित्सक सभी का यह दायित्व है कि टीन एज ग्रुप के लोगों के लिए अच्छी योजनाएं बनाए। कहा कि 11 से 19 वर्ष तक के किशोर व किशोरियों की आबादी देश में 23 फीसदी है। इन सभी की मानसिकता लगभग एक जैसी है। इनका लाइफ स्टाइल भी एक जैसा है।
सेमिनार को भोपाल मेडिकल कालेज के डा. दिनेश कुमार पाल, एम्स दिल्ली के डा. पुनीत मिश्रा, अहमदाबाद मेडिकल कालेज के डा. निखिल खराडे ने भी संबोधित किया। इस दौरान मेडिकल कालेज के चिकित्सक डा. प्रदीप खारया, डा. संजीव त्रिपाठी, डा. नरेंद्र तिवारी, डा. तनु मिड्ढा, डा. संदीप कौशिक, डा. डाली रस्तोगी, डा. एसके वर्मन, डा. एसके ध्रुव, डा. शशांक, डा. रीना संत, डा. मृदुल भूषण समेत कई चिकित्सक व मेडिकल स्टूडेंटस मौजूद रहे।