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जांच के लिए मूर्ति पुरातत्व विभाग को सौंपी जाएगी
kannauj, uttar pradesh, india
Updated Mon, 18 Apr 2016 12:21 AM IST
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देवी मूर्ति
- फोटो : amar ujala
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भगवंतापुर गांव में मिट्टी के टीले से मिली माता की मूर्ति की जांच करने के लिए तिर्वा तहसीलदार ऋषिकांत बाजपेयी पहुंचे। उन्होंने मूर्ति को सील कराकर एसओ इंदरगढ़ को सौंप दिया। इसके बाद यह मूर्ति पुरातत्व विभाग को सौंप दी जाएंगी। इसके बाद भी मूर्ति के काल और धातु का पता चल सकेगा। विदित हो कि भगवंतापुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। भंडारा कार्यक्रम होने के बाद शनिवार को यहां साफ-सफाई का काम किया जा रहा था।
इसी दौरान मिट्टी के टीले को हटाते समय मूर्ति दिखाई दी। मूर्ति के निकलते गांव में मजमा लगना शुरू हो गया। लोगों ने इसे दैवी चमत्कार मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। मूर्ति की चमक के आधार पर ग्रामीणों ने इसको अष्टधातु की मूर्ति बताया। सभी की जुबान पर मूर्ति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं थीं। शनिवार तक मूर्ति को लेकर कोई अधिकारी सही जवाब नहीं दे सका। रविवार को डीएम अनुज कुमार झा के निर्देश पर तहसीलदार तिर्वा मौके पर पहुंचे।
उन्होंने बताया कि मूर्ति को सील कराकर एसओ इंदरगढ़ सुरेश चंद्र की सुपर्द कर दिया गया है। वे मूर्ति को ट्रेजरी में जमा करेंगे। जहां से पुरातत्व विभाग को सौंपी जाएगी। पुरातत्व विभाग की जांच के बाद पता चल सकेगा कि मूर्ति पीतल अथवा किस धातु की बनी है। हालांकि मूर्ति की चमक के आधार पर लगता है कि वह नई है।
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इसी दौरान मिट्टी के टीले को हटाते समय मूर्ति दिखाई दी। मूर्ति के निकलते गांव में मजमा लगना शुरू हो गया। लोगों ने इसे दैवी चमत्कार मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। मूर्ति की चमक के आधार पर ग्रामीणों ने इसको अष्टधातु की मूर्ति बताया। सभी की जुबान पर मूर्ति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं थीं। शनिवार तक मूर्ति को लेकर कोई अधिकारी सही जवाब नहीं दे सका। रविवार को डीएम अनुज कुमार झा के निर्देश पर तहसीलदार तिर्वा मौके पर पहुंचे।
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उन्होंने बताया कि मूर्ति को सील कराकर एसओ इंदरगढ़ सुरेश चंद्र की सुपर्द कर दिया गया है। वे मूर्ति को ट्रेजरी में जमा करेंगे। जहां से पुरातत्व विभाग को सौंपी जाएगी। पुरातत्व विभाग की जांच के बाद पता चल सकेगा कि मूर्ति पीतल अथवा किस धातु की बनी है। हालांकि मूर्ति की चमक के आधार पर लगता है कि वह नई है।
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