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Kannauj News: चयन समिति ने बिना जांच किए शिक्षक का नाम भेजा था नाम
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कन्नौज। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बिना जांच किए राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए शिक्षक का नाम भेजा गया था। विवाद बढ़ने पर विभाग ने चयन सूची से शिक्षक का नाम मंगलवार को हटा दिया है। वहीं, डायट प्राचार्य का कहना से कि शिक्षकों की सूची शिक्षा विभाग ने दी थी। विभाग को शिक्षकों का नाम शामिल करने से पहले जांच करनी चाहिए थी।
जिला चयन समिति की बैठक 24 जुलाई को हुई थी। इसमें साक्षात्कार के ही दिन अभ्यर्थियों को औसतन अंक बांटे गए। चयन समिति ने सबसे अधिक अंक इंचार्ज प्रधानाध्यापक राकेंद्र सक्सेना को दिए थे। इसके बाद सुमनलता और मोहित दुबे को बराबर-बराबर अंक मिले, जबकि अरशद को सबसे कम अंक दिए गए। प्रदर्शन और कार्यपरक मानक की इस श्रेणी में सबसे अधिक अंक सुमनलता को मिले। दूसरे नंबर पर राकेंद्र सक्सेना, तीसरे पर मोहित दुबे और चौथे स्थान पर अरशद रहे।
इस चयन प्रक्रिया के खिलाफ यूटा ने 28 जुलाई को मोर्चा खोल दिया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और शिक्षक का नाम हटा दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जिला चयन समिति ने अपनी आख्या में लिखा था कि वर्तमान में संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक या विभागीय कार्रवाई गतिमान नहीं है और शिक्षक का कार्य, व्यवहार एवं चरित्र उत्तम है। जांच दबाकर भेजे गए इस नाम के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। डायट प्राचार्य अमित कुमार सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से सिर्फ शिक्षकों की सूची दी गई थी। उसी के अनुसार अंक दिए गए। सर्विस बुक की जांच करना बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी की जिम्मेदारी थी।
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जिला चयन समिति की बैठक 24 जुलाई को हुई थी। इसमें साक्षात्कार के ही दिन अभ्यर्थियों को औसतन अंक बांटे गए। चयन समिति ने सबसे अधिक अंक इंचार्ज प्रधानाध्यापक राकेंद्र सक्सेना को दिए थे। इसके बाद सुमनलता और मोहित दुबे को बराबर-बराबर अंक मिले, जबकि अरशद को सबसे कम अंक दिए गए। प्रदर्शन और कार्यपरक मानक की इस श्रेणी में सबसे अधिक अंक सुमनलता को मिले। दूसरे नंबर पर राकेंद्र सक्सेना, तीसरे पर मोहित दुबे और चौथे स्थान पर अरशद रहे।
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इस चयन प्रक्रिया के खिलाफ यूटा ने 28 जुलाई को मोर्चा खोल दिया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और शिक्षक का नाम हटा दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जिला चयन समिति ने अपनी आख्या में लिखा था कि वर्तमान में संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक या विभागीय कार्रवाई गतिमान नहीं है और शिक्षक का कार्य, व्यवहार एवं चरित्र उत्तम है। जांच दबाकर भेजे गए इस नाम के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। डायट प्राचार्य अमित कुमार सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से सिर्फ शिक्षकों की सूची दी गई थी। उसी के अनुसार अंक दिए गए। सर्विस बुक की जांच करना बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी की जिम्मेदारी थी।
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