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Kannauj News: महज 17 दिन पहले ही फैक्टरी पहुंची थी पुलिस मुख्य आरोपी के दोनों बेटे अब भी पकड़ से बाहर

Wed, 23 Sep 2026 11:32 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 11:32 PM IST
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The police had arrived at the factory just 17 days ago; both sons of the main accused remain at large.
छिबरामऊ। अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद हुई मौत ने पुलिस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 22 सितंबर को हुई इस घटना से महज 17 दिन पहले यानी चार सितंबर को पुलिस फायर ब्रिगेड टीम के साथ आरोपी शिवकुमार भुर्जी के यहां पहुंची थी। लेकिन, लापरवाही का आलम यह रहा कि महज स्टॉक चेक कर चली आई। अब हादसे के बाद फिलहाल एसपी विनोद कुमार ने बहबलपुर चौकी प्रभारी और तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, मुख्य आरोपी के दोनों बेटों संतोष और महेश पुलिस की गिरफ्त से अब भी बाहर है।
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वहीं, बुधवार को शिवकुमार भुर्जी के घर के बाहर ही नगर पालिका के खंडहर पड़े शौचालय को ध्वस्त करा दिया गया। इसमें पुलिस को भारी मात्रा में आतिशबाजी मिली है। ईओ अजय कुमार ने बताया कि शौचालय की जमीन की पैमाइश कराकर किसी अन्य कार्य में प्रयोग में लाया जाएगा। साथ ही समय समय पर शौचालय का निरीक्षण न करने के कारण सफाई नायक सुजीत कुमार को नोटिस जारी किया जा रहा है।
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यह है मामला
ग्राम बहवलपुर का शिवकुमार भुर्जी चोरी छिपे आतिशबाजी बनाने का काम करता रहा। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे घर के बाहर टिनशेड में विस्फोट हो गया। धमाके में आतिशबाजी बना रहा गांव का ही शिवकुमार चिक (55) घायल हो गया था। इलाज के दौरान तिर्वा मेडिकल कालेज में उसकी मौत हो गई।
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बांदा से आकर शुरू किया आतिशबाजी का अवैध कारोबार

छिबरामऊ। मुख्य आरोपी शिवकुमार भुर्जी मूलरूप बांदा का रहने वाला है। करीब 30 साल पहले वह यहां आया और बहबलपुर गांव में रहने लगा। बाद में उसने जमीन खरीद कर मकान बनवा लिया और आतिशबाजी का धंधा करने लगा था। पहले उसने पटाखा बनाने का लाइसेंस लिया था, बाद में उसे निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उसने बिक्री का लाइसेंस लिया, लेकिन निर्माण कार्य जारी रखा। वह गांव के बाहर एक ट्यूबवेल की कोठरी में पटाखे बनाता था। वहां जब पुलिस ने छापा मारकर बंद कराया तो घर में ही बनाने लगा। दो बार विस्फोट होने के बाद उसके सभी लाइसेंस निरस्त कर दिए। मगर इसके बाद भी वह चोरी-छिपे आतिशबाजी बनाने का काम करता रहता था।
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पुलिस की तरफ से जब सत्यापन कराया गया तो बहबलपुर में चौकी प्रभारी रावेंद्र सिंह स्वयं मौके पर नहीं गए थे, बल्कि बीट सिपाही को भेज दिया था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आने पर चौकी प्रभारी व तीन सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और इसकी जांच सीओ तिर्वा कुलवीर सिंह को सौंप दी गई है। जांच रिपोर्ट आने पर कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक

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भाजपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का नगर अध्यक्ष है मुख्य आरोपी का बेटा

अवैध फैक्टरी संचालक शिवकुमार भुर्जी का बड़ा बेटा संतोष भाजपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का नगर अध्यक्ष है। पूर्व में इस परिवार का संबंध सपा और बसपा से भी रह चुका है।
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वर्ष 2024 व 25 में दर्ज किए गए मामले
पुलिस के अनुसार शिवकुमार भुर्जी के पुत्र संतोष कुमार के खिलाफ 12 सितंबर 2025 को थाना छिबरामऊ में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए जेल भेजा गया था। 31 अक्तूबर 2024 को दूसरे बेटे महेश के खिलाफ भी इसी अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा गया था। दोनों मामलों में विवेचना जारी है। दोनों जमानत पर हैं।

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आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित

आरोपी संतोष और महेश की गिरफ्तारी के लिए दो टीमें बनाई गईं हैं। कोतवाल कपिल दुबे ने बताया कि एसआई मनुज चौधरी व एसआई सूरज पाल सिंह के नेतृत्व में टीमों का गठन किया गया है। साथ ही सर्विलांस टीम की भी मदद ली जा रही है।
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दो साल बाद भी चल रहा है करीना का इलाज

शिवकुमार के बेटे महेश ने साल 2024 में आतिशबाजी बाजार में दुकान के लिए लाइसेंस बनवाया था। उसने घर में आतिशबाजी का स्टॉक किया था। 31 अक्तूबर की सुबह करीब आठ बजे पड़ोस में रहने वाले सत्यप्रकाश की बेटी करीना (12) उसके घर से आतिशबाजी की पॉलीथीन लेकर छत से उतर रही थी। छत पर पड़े जाल में पैर फंसने से वह आतिशबाजी की पॉलीथीन समेत छत पर गिर पड़ी। तेज धमाके के साथ विस्फोट होने से उसका हाथ व पैर समेत पूरा शरीर बुरी तरह से झुलस गया। साथ ही उसका जबड़ा हिल गया था। दो साल बीतने के बाद भी उसके जबड़े का इलाज चल रहा है। जबकि गर्दन और पैर सामान्य से अधिक मोटे हो गए हैं, अभी भी फफोले जैसे निशान बने हुए हैं।
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नियमित निगरानी न होने का फायदा उठाया
लाइसेंस धारक आतिशबाजों को 15 किलो विस्फोटक का स्टॉक रखने की अनुमति दी गई है। पिछले साल चार सितंबर को सिकंदरपुर में भारतीय शिक्षा सदन इंटर कालेज के पास स्थित आतिशबाजी गोदाम में छापे के दौरान अफसरों को तीन बोरियों में करीब 77 किलो विस्फोटक मिला, जिसे पुलिस ने जब्त किया था। मामले में आतिशबाज मोहम्मद अशफाक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद प्रशासन ने आतिशबाजों की सुध नहीं ली।

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तहसील क्षेत्र में 12 व जिला में 22 आतिशबाजों के पास लाइसेंस

तहसील छिबरामऊ क्षेत्र में 12 आतिशबाजों के स्थायी लाइसेंस हैं। इनमें चौधरियान निवासी राधाकृष्ण, सिकंदरपुर निवासी मोहम्मद अशफाक व मालवीय नगर निवासी शहनाज, गुरसहायगंज के मोहल्ला दिलशाद नगर निवासी शबाना, नईम खां, मोहल्ला पठान निवासी मोहम्मद युनूस, अशोक नगर निवासी प्रशांत कुमार अभिलेखों में दर्ज आतिशबाज हैं। सौरिख के इंदिरा नगर निवासी फजले रसूल, रफीक अहमद, रसीद, मोहल्ला ऊंचा निवासी शफीक अहमद को भी आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस दिया गया है। वहीं, तालग्राम में एकमात्र लाइसेंस मोहल्ला गढ़ी गोखर निवासी जमील के पास है। अग्निशमन अधिकारी संदीप तंवर ने बताया कि जिले में छह आतिशबाजों के पास रेडीमेड पटाखा बिक्री व 16 के पास देशी पटाखा बिक्री का लाइसेंस है।
अब तक बड़े हादसे
28 मई 2012 : छिबरामऊ के मोहल्ला बनवारीनगर में मकान में विस्फोट में संजू सागर व राजू कमल की मौत हो गई। इस हादसे में मकान जमींदोज हो गया। जांच में पता चला था कि मकान में अवैध पटाखा फैक्टरी चल रही थी।
04 नवंबर 2012 : छिबरामऊ के बहबलपुर में एक मकान में अवैध आतिशबाजी कारखाना चल रहा था। यहां विस्फोट से दो मासूम बच्चियों के चीथड़े उड़ गए थे। मकान में भारी मात्रा में विस्फोटक भरा था।

18 जून 2017 : छिबरामऊ की कांशीराम कॉलोनी में एक मकान में ऊपरी मंजिल में भीषण विस्फोट हुआ था, जिसमें मकान मालिक नीरज की जान चली गई थी और छह लोग घायल हुए थे। कानपुर से आए बम निरोधक दस्ते ने बताया कि मकान में विस्फोटक रखा था।
25 अक्टूबर 2019 : ठठिया कस्बे के पास दौलतपुर गांव में एक मकान में विस्फोट हुआ था, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी और तीन झुलस गए थे। जांच में पता चला कि यहां अवैध पटाखा फैक्टरी चल रही थी।
03 नवंबर 2024 : सदर कोतवाली क्षेत्र के पनियारेपुरवा गांव में एक मकान में हुए विस्फोट में 11 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। हालांकि बाद में पुलिस ने बताया कि एलपीजी सिलिंडर फटने से हादसा हुआ था।
22 सितंबर 2026 : छिबरामऊ के बहबलपुर गांव में शिवकुमार भुर्जी के मकान के पास विस्फोट में कारीगर शिवकुमार चिक की मौत हो गई। जांच में बताया गया कि अवैध रूप से यहां पटाखे बनाए जा रहे थे।


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निरस्त लाइसेंसों का दोबारा सत्यापन

तीनों तहसीलों में एसडीएम व सीओ की टीम बनाकर लाइसेंसों का सत्यापन कराया जा रहा है। वर्ष 2002 में पांच लाइसेंस निरस्त किए गए थे। इनका दोबारा सत्यापन होगा और देखा जाएगा कि कहीं ये लोग फिर से सक्रिय तो नहीं हैं। इसी तरह चार नए आवेदन हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है कि कहीं लाइसेंस निर्गत होने से पहले ही ये लोग निर्माण तो नहीं करने लगे। इसके अलावा टीम में जीएसटी विभाग और एआरटीओ को भी शामिल किया गया है। 25 लाइसेंस हैं, जिनमें 20 विक्रेता और पांच देसी पटाखा बनाने के लाइसेंस हैं। इन सभी का नए सिरे से सत्यापन होगा।
- आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, डीएम
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