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इत्रनगरी की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान : तरुण विजय
Tue, 05 Aug 2025 01:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Tue, 05 Aug 2025 01:00 AM IST
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कन्नौज। गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर में कन्नौज को उत्तर प्रदेश की इत्र राजधानी का खिताब मिलने के दूसरे ही दिन भारत सरकार के राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय इत्रनगरी पहुंचे। उन्होंने शहर के सभी प्राचीन स्मारकों व धरोहरों को देखा और बताया कि इत्रनगरी की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत को अब राष्ट्रीय पहचान मिलेगी, जिससे इसका गौरव पुन: विश्वपटल पर स्थापित होगा।
सोमवार को पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय इत्रनगरी पहुंचे। उन्होंने राजा जयचंद के किले के भग्नावशेष देखे तो 52 खंभा मजार का निरीक्षण किया। इसके बाद सिद्धपीठ बाबा गौरीशंकर मंदिर में जाकर स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन किए। हाजी शरीफ दरगाह समेत राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में रखे पुरापाषाण कालीन मूर्तियों का अवलोकन किया।
उन्होंने इत्र निर्माण इकाई में जाकर पांच हजार साल पुरानी आसवन विधि द्वारा इत्र व एसेंसियल ऑयल के निर्माण की प्रक्रिया देखी। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अध्यक्ष ने इन स्थलों की ऐतिहासिक महत्ता, उनके संरक्षण की आवश्यकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की संभावनाओं पर विशेष रूप से बल दिया।
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उन्होंने इत्रनगरी की प्राचीन एवं विशिष्ट इत्र परंपरा जो सदियों पुरानी स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, उसका समीप से अनुभव किया और इत्र शिल्पकारों व इतिहासकारों से संवाद भी किया। उन्होंने बताया कि कन्नौज पुरातन काल से एक सांस्कृतिक नगर रहा है, जिसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने बसाया था, इसलिए इसका पूर्व नाम कुशानगरी भी रहा है। कई पुराणों में इसका नाम महोदया भी लिखा है।
भगवान राम के गुरु महर्षि विश्वामित्र की जन्मस्थली होने के नाते यह तपोभूमि है, जहां ऋषि परंपरा हजारों साल तक जीवंत रही। इसको वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार तथा राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की तरफ से विशेष प्रयास किए जाएंगे। इस दौरान द अतर्स एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के प्रवीण टंडन, समन्वयक एवं जिला दिव्यांग सुरक्षा अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी वेद मिश्र,उत्तर प्रदेश पर्यटन प्रतिनिधि एवं सीएम टूरिज़्म फेलो नमन दुआ समेत कई अधिकारी साथ रहे।
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सोमवार को पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय इत्रनगरी पहुंचे। उन्होंने राजा जयचंद के किले के भग्नावशेष देखे तो 52 खंभा मजार का निरीक्षण किया। इसके बाद सिद्धपीठ बाबा गौरीशंकर मंदिर में जाकर स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन किए। हाजी शरीफ दरगाह समेत राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में रखे पुरापाषाण कालीन मूर्तियों का अवलोकन किया।
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उन्होंने इत्र निर्माण इकाई में जाकर पांच हजार साल पुरानी आसवन विधि द्वारा इत्र व एसेंसियल ऑयल के निर्माण की प्रक्रिया देखी। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अध्यक्ष ने इन स्थलों की ऐतिहासिक महत्ता, उनके संरक्षण की आवश्यकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की संभावनाओं पर विशेष रूप से बल दिया।
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उन्होंने इत्रनगरी की प्राचीन एवं विशिष्ट इत्र परंपरा जो सदियों पुरानी स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, उसका समीप से अनुभव किया और इत्र शिल्पकारों व इतिहासकारों से संवाद भी किया। उन्होंने बताया कि कन्नौज पुरातन काल से एक सांस्कृतिक नगर रहा है, जिसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने बसाया था, इसलिए इसका पूर्व नाम कुशानगरी भी रहा है। कई पुराणों में इसका नाम महोदया भी लिखा है।
भगवान राम के गुरु महर्षि विश्वामित्र की जन्मस्थली होने के नाते यह तपोभूमि है, जहां ऋषि परंपरा हजारों साल तक जीवंत रही। इसको वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार तथा राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की तरफ से विशेष प्रयास किए जाएंगे। इस दौरान द अतर्स एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के प्रवीण टंडन, समन्वयक एवं जिला दिव्यांग सुरक्षा अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी वेद मिश्र,उत्तर प्रदेश पर्यटन प्रतिनिधि एवं सीएम टूरिज़्म फेलो नमन दुआ समेत कई अधिकारी साथ रहे।