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Kannauj News: बेटे की निकाल ली थी किडनी, न्याय के लिए भटक रहा पिता
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कन्नौज। कानपुर में किडनी कांड ने स्वास्थ्य महकमे में खलबली मचा रखी है। वहीं 13 साल पहले बेटे की किडनी निकाले जाने के मामले में पिता न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। किडनी कांड उछलने के बाद पिता को एक बार फिर न्याय की आस जगी है।
सदर क्षेत्र के ग्राम भगवानपुर निवासी महेंद्र कुशवाहा ने बताया कि बेटे दीपक कुशवाहा के पेट में जून 2013 दर्द हुआ था और मंधना स्थित रामा मेडिकल काॅलेज में डाॅ. प्रफुल्ल को दिखाया था। डाॅ. प्रफुल्ल ने बेटे को भर्ती कर इलाज किया और 28 जून 2013 को छुट्टी कर दी। कुछ दिन बाद दोबारा दर्द होने पर दीपक ने फिर अस्पताल में दिखाया। इस पर डाॅ. प्रफुल्ल ने दीपक को भर्ती कर तीन जुलाई को ऑपरेशन किया और नौ जुलाई काे छुट्टी दे दी थी।
इसके बाद भी दर्द होने पर दीपक जब अस्पताल पहुंचे तो डाॅ. प्रफुल्ल नहीं मिले। इस पर उन्होंने दूसरे डॉक्टर को दिखा। उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराया था। रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने दीपक को बताया कि उसकी दायी किडनी गायब है। दीपक यह सुनकर घर लौट आया था। बाद में दीपक ने मामले की शिकायत बिठूर थाने में की थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर दीपक ने न्यायालय की शरण ली जिस पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। 11 साल तक न्यायालय में वाद चला और 28 मार्च 2024 को न्यायालय ने डाॅ. प्रफुल्ल को दोषी मानते हुए दीपक के पक्ष में फैसला सुनाया था। महेंद्र ने बताया कि अभी तक न्याय नहीं मिला है। डाॅ. प्रफुल्ल ने उच्च न्यायालय में अपील की है।
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सदर क्षेत्र के ग्राम भगवानपुर निवासी महेंद्र कुशवाहा ने बताया कि बेटे दीपक कुशवाहा के पेट में जून 2013 दर्द हुआ था और मंधना स्थित रामा मेडिकल काॅलेज में डाॅ. प्रफुल्ल को दिखाया था। डाॅ. प्रफुल्ल ने बेटे को भर्ती कर इलाज किया और 28 जून 2013 को छुट्टी कर दी। कुछ दिन बाद दोबारा दर्द होने पर दीपक ने फिर अस्पताल में दिखाया। इस पर डाॅ. प्रफुल्ल ने दीपक को भर्ती कर तीन जुलाई को ऑपरेशन किया और नौ जुलाई काे छुट्टी दे दी थी।
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इसके बाद भी दर्द होने पर दीपक जब अस्पताल पहुंचे तो डाॅ. प्रफुल्ल नहीं मिले। इस पर उन्होंने दूसरे डॉक्टर को दिखा। उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराया था। रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने दीपक को बताया कि उसकी दायी किडनी गायब है। दीपक यह सुनकर घर लौट आया था। बाद में दीपक ने मामले की शिकायत बिठूर थाने में की थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर दीपक ने न्यायालय की शरण ली जिस पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। 11 साल तक न्यायालय में वाद चला और 28 मार्च 2024 को न्यायालय ने डाॅ. प्रफुल्ल को दोषी मानते हुए दीपक के पक्ष में फैसला सुनाया था। महेंद्र ने बताया कि अभी तक न्याय नहीं मिला है। डाॅ. प्रफुल्ल ने उच्च न्यायालय में अपील की है।
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