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Kannauj News: 100 दिन से अधिक काम मिलने पर रिकवरी
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कन्नौज। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम करने वाले कई परिवारों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। हाल ही में हुए सोशल ऑडिट और वित्तीय समीक्षा में यह खुलासा हुआ है कि कई गांवों में सैकड़ों परिवारों को निर्धारित 100 दिनों की सीमा से अधिक काम दे दिया गया। साथ ही इस काम भुगतान भी कर दिया गया। सीडीओ ने शुक्रवार को जांच करने के निर्देश डीडीओ को दिए। अब उनसे रिकवरी कराई जाएगी।
मनरेगा के तहत एक वित्तीय वर्ष में एक परिवार को अधिकतम 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार दिया जा सकता है पर तकनीकी खामियों और स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण कई परिवारों के जॉब कार्ड पर 120 से 150 दिनों तक की हाजिरी दर्ज हो गई। उच्चाधिकारियों ने जब डेटा का मिलान किया, तो यह बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई। इसको लेकर जिला विकास अधिकारी नरेंद्र देव द्विवेदी ने मुख्य विकास अधिकारी राम कृपाल चौधरी को जांच रिपोर्ट सौंपी है।
इसके अलावा बीडीओ सौरिख, कार्यक्रम अधिकारी सौरिख और डीसी मनरेगा दिनेश कुमार को भी पत्र भेजा है। डीडीओ ने बताया कि सौरिख विकास खंड के ग्राम बौसिया के एक युवक ने कई परिवारों को 100 दिन से अधिक रोजगार देने की शिकायत की थी। इस पर डीडीओ ने गांव जाकर बीडीओ सौरिख मनोज कुमार गुप्ता, सचिव इंद्रपाल पटेल और प्रधान के साथ जांच की। जांच में मामला सही पाया गया। सीडीओ ने बताया कि 100 दिन से अधिक रोजगार देना अधिनियम के विरुद्ध है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और रिकवरी भी कराई जाएगी।
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मनरेगा के तहत एक वित्तीय वर्ष में एक परिवार को अधिकतम 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार दिया जा सकता है पर तकनीकी खामियों और स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण कई परिवारों के जॉब कार्ड पर 120 से 150 दिनों तक की हाजिरी दर्ज हो गई। उच्चाधिकारियों ने जब डेटा का मिलान किया, तो यह बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई। इसको लेकर जिला विकास अधिकारी नरेंद्र देव द्विवेदी ने मुख्य विकास अधिकारी राम कृपाल चौधरी को जांच रिपोर्ट सौंपी है।
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इसके अलावा बीडीओ सौरिख, कार्यक्रम अधिकारी सौरिख और डीसी मनरेगा दिनेश कुमार को भी पत्र भेजा है। डीडीओ ने बताया कि सौरिख विकास खंड के ग्राम बौसिया के एक युवक ने कई परिवारों को 100 दिन से अधिक रोजगार देने की शिकायत की थी। इस पर डीडीओ ने गांव जाकर बीडीओ सौरिख मनोज कुमार गुप्ता, सचिव इंद्रपाल पटेल और प्रधान के साथ जांच की। जांच में मामला सही पाया गया। सीडीओ ने बताया कि 100 दिन से अधिक रोजगार देना अधिनियम के विरुद्ध है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और रिकवरी भी कराई जाएगी।
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