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65 बीघे में नहीं फूटा आलू का किल्ला
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इंदरगढ़। कमाई के चक्कर में कीटनाशक दवा विक्रेता किसानों के भविष्य से खेल रहे हैं। जिले में अब नकली दवा से बीज शोधित करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। क्षेत्र का एक और किसान इन दवा विक्रेताओं के लपेटे में आया है, जिसकी आलू की फसल गढ़ाई के 19 दिन बाद भी मिट्टी के बाहर नहीं उगी।
इंदरगढ़ क्षेत्र के विशुनापुर गांव निवासी किसान हरीशचंद्र ने बताया कि 22 अक्तूबर को उन्होंने 65 बीघे खेत में 310 पैकेट आलू बीज की बोआई की थी। इसमें 45 बीघे बंटाई पर खेत लिया था। इसके बाद पटेल नगर तिराहे पर स्थित एक बीज भंडार से आलू बीज शोधित करने के लिए कीटनाशक दवा खरीदी थी। आलू बीज को शोधित करने के बाद गढ़ाई की। 15 दिनों में बीज अंकुरित होकर मिट्टी के बाहर आना चाहिए था पर ऐसा नहीं हुआ। इस कारण चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो गया है।
जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह का कहना है कि किसान कार्यालय में आकर पूरा प्रकरण बताएं। कौन सी दवा प्रयोग की और कहां से खरीदी गई। मामले की जांच कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।
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इंदरगढ़ क्षेत्र के विशुनापुर गांव निवासी किसान हरीशचंद्र ने बताया कि 22 अक्तूबर को उन्होंने 65 बीघे खेत में 310 पैकेट आलू बीज की बोआई की थी। इसमें 45 बीघे बंटाई पर खेत लिया था। इसके बाद पटेल नगर तिराहे पर स्थित एक बीज भंडार से आलू बीज शोधित करने के लिए कीटनाशक दवा खरीदी थी। आलू बीज को शोधित करने के बाद गढ़ाई की। 15 दिनों में बीज अंकुरित होकर मिट्टी के बाहर आना चाहिए था पर ऐसा नहीं हुआ। इस कारण चार लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो गया है।
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जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह का कहना है कि किसान कार्यालय में आकर पूरा प्रकरण बताएं। कौन सी दवा प्रयोग की और कहां से खरीदी गई। मामले की जांच कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।
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