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Kannauj News: लंच पैकेट में एक लाख खर्च, फिर भी परोसा गया घटिया भोजन
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छिबरामऊ। नेहरू महाविद्यालय में भारी अव्यवस्थाओं के बीच मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह हुआ। वर-वधू के भोजन की थाली का सलाद, पापड़ और अचार समाज कल्याण विभाग स्वयं डकार गया। लंच पैकेटों के माध्यम से परोसा गया घटिया भोजन कई लोग थोड़ा खाने के बाद पांडाल में ही छोड़कर चले गए।
नेहरू महाविद्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के कंधों पर थी। पानी के लिए नगर पालिका परिषद से एक पानी का टैंकर मंगवाया गया था, जो दोपहर करीब एक बजे खत्म हो गया, उसके बाद लोग पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। वहीं, विवाह समारोह होने के बाद दो पिकअप लोडर से जिला मुख्यालय से दोपहर दो बजे लंच पैकेट भिजवाए गए। इस बीच लोग भूख से बिलबिला उठे। तीन बजे तक लंच पैकेटों का वितरण होने तक पूड़ियां सूखकर पापड़ हो चुकी थी। घटिया भोजन मिलने के कारण लोगों ने जहां का तहां छोड़ दिया। वहीं, कई लोग अंतिम समय तक भोजन न मिलने की शिकायत करते हुए भी दिखे।
शिकायत के बाद बंटवाए गए पायल व बिछुआ
विवाह समारोह में शादी रचाने वाली वधू को उपहार स्वरूप चांदी की पायल व बिछुआ देने के निर्देश दिए हैं। शादी समारोह संपन्न होने के बाद भी छिबरामऊ विकास खंड की वधूओं को उपहार नहीं मिला। नववधुओं के परिजनों ने हंगामा करते हुए इसकी शिकायत बीडीओ दीपांकर आर्य से दर्ज कराई। उसके बाद आनन-फानन में सभी पंचायत सचिवों को लगाकर उपहार वितरित कराए गए।
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विवाह संपन्न होने के बाद कराई गई एक जोड़े की शादी
सामूहिक विवाह समारोह के लिए असालताबाद की राजकुमारी पुत्री रामनिवास ने भी पंजीकरण कराया था। रामनिवास राजस्थान के जयपुर में बेटी व परिवार के साथ एक भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। दूल्हा संजू परिवार के साथ निर्धारित समय पर पहुंच गया, लेकिन वधू पक्ष शादी समारोह संपन्न होने के बाद पहुंची। तब तक शादी कराने वाले आचार्य गिरीश चंद्र मिश्रा भी जा चुके थे। बीडीओ दीपांकर आर्य के निर्देश पर पल्यौरा के बीडीसी प्रतिनिधि विवेक दीक्षित ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वर वधू का विवाह संपन्न कराया।
ट्रैक्टर-ट्राॅली से वर व वधू के साथ पहुंचे लोग
ट्रैक्टर-ट्राॅलियों में सवारियों को ढोने पर प्रदेश सरकार ने रोक लगा रखी है। इसके बाद भी कई ट्रैक्टर-ट्राॅलियों में बैठकर वर व वधू के साथ लोग विवाह समारोह में पहुंचे। यहां मौजूद अधिकारी व पुलिस कर्मी मूकदर्शक बने यह सब देखते रहे।
129 जोड़ों ने लिए अग्नि के सात फेरे, आठ का पढ़वाया निकाह
छिबरामऊ। नेहरू महाविद्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में 161 जोड़ों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 129 जोड़ों ने अग्नि को साक्षी मानकर एक दूसरे का हाथ थामा। वहीं, आठ मुस्लिम जोड़ों का निकाह पढ़वाया गया। 24 जोड़े विवाह समारोह में शामिल नहीं हुए। सीडीओ रामकृपाल चौधरी ने कविता के माध्यम से नव दंपतियों को उनके उत्तरदायित्वों का पाठ पढ़ाया और आशीर्वाद दिया। विधायक अर्चना पांडेय ने भी नवदंपतियों को आशीर्वाद व उपहार प्रदान किए।
एक जोड़े पर खर्च हो रहे छह हजार रुपये
जिला समाज कल्याण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि शासन की तरफ से एक जोड़े पर छह हजार रुपये खर्च करने का बजट मिलता है, जिसमें भोजन और जलपान भी शामिल होता है। एक जोड़े के साथ 10 लंच पैकेट दिए जाते हैं। इसी खर्च में आचार्य दक्षिणा, टेंट, माइक और भोजन शामिल होता है। खाने के लिए पूड़ी सब्जी, मिष्ठान और सलाद देने का भी नियम है। खानपान का ठेका अलग दिया जाता है, जिसमें एक लंच पैकेट का 80 रुपये की दर से भुगतान किया जाता है। ऐेसे में 137 जोड़ों पर पर कुल 109600 रुपये खानपान में खर्च किया गया। इसके बाद शादी में आए लोगों को बासी भोजन मिला।
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नेहरू महाविद्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के कंधों पर थी। पानी के लिए नगर पालिका परिषद से एक पानी का टैंकर मंगवाया गया था, जो दोपहर करीब एक बजे खत्म हो गया, उसके बाद लोग पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। वहीं, विवाह समारोह होने के बाद दो पिकअप लोडर से जिला मुख्यालय से दोपहर दो बजे लंच पैकेट भिजवाए गए। इस बीच लोग भूख से बिलबिला उठे। तीन बजे तक लंच पैकेटों का वितरण होने तक पूड़ियां सूखकर पापड़ हो चुकी थी। घटिया भोजन मिलने के कारण लोगों ने जहां का तहां छोड़ दिया। वहीं, कई लोग अंतिम समय तक भोजन न मिलने की शिकायत करते हुए भी दिखे।
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शिकायत के बाद बंटवाए गए पायल व बिछुआ
विवाह समारोह में शादी रचाने वाली वधू को उपहार स्वरूप चांदी की पायल व बिछुआ देने के निर्देश दिए हैं। शादी समारोह संपन्न होने के बाद भी छिबरामऊ विकास खंड की वधूओं को उपहार नहीं मिला। नववधुओं के परिजनों ने हंगामा करते हुए इसकी शिकायत बीडीओ दीपांकर आर्य से दर्ज कराई। उसके बाद आनन-फानन में सभी पंचायत सचिवों को लगाकर उपहार वितरित कराए गए।
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विवाह संपन्न होने के बाद कराई गई एक जोड़े की शादी
सामूहिक विवाह समारोह के लिए असालताबाद की राजकुमारी पुत्री रामनिवास ने भी पंजीकरण कराया था। रामनिवास राजस्थान के जयपुर में बेटी व परिवार के साथ एक भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। दूल्हा संजू परिवार के साथ निर्धारित समय पर पहुंच गया, लेकिन वधू पक्ष शादी समारोह संपन्न होने के बाद पहुंची। तब तक शादी कराने वाले आचार्य गिरीश चंद्र मिश्रा भी जा चुके थे। बीडीओ दीपांकर आर्य के निर्देश पर पल्यौरा के बीडीसी प्रतिनिधि विवेक दीक्षित ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वर वधू का विवाह संपन्न कराया।
ट्रैक्टर-ट्राॅली से वर व वधू के साथ पहुंचे लोग
ट्रैक्टर-ट्राॅलियों में सवारियों को ढोने पर प्रदेश सरकार ने रोक लगा रखी है। इसके बाद भी कई ट्रैक्टर-ट्राॅलियों में बैठकर वर व वधू के साथ लोग विवाह समारोह में पहुंचे। यहां मौजूद अधिकारी व पुलिस कर्मी मूकदर्शक बने यह सब देखते रहे।
129 जोड़ों ने लिए अग्नि के सात फेरे, आठ का पढ़वाया निकाह
छिबरामऊ। नेहरू महाविद्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में 161 जोड़ों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 129 जोड़ों ने अग्नि को साक्षी मानकर एक दूसरे का हाथ थामा। वहीं, आठ मुस्लिम जोड़ों का निकाह पढ़वाया गया। 24 जोड़े विवाह समारोह में शामिल नहीं हुए। सीडीओ रामकृपाल चौधरी ने कविता के माध्यम से नव दंपतियों को उनके उत्तरदायित्वों का पाठ पढ़ाया और आशीर्वाद दिया। विधायक अर्चना पांडेय ने भी नवदंपतियों को आशीर्वाद व उपहार प्रदान किए।
एक जोड़े पर खर्च हो रहे छह हजार रुपये
जिला समाज कल्याण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि शासन की तरफ से एक जोड़े पर छह हजार रुपये खर्च करने का बजट मिलता है, जिसमें भोजन और जलपान भी शामिल होता है। एक जोड़े के साथ 10 लंच पैकेट दिए जाते हैं। इसी खर्च में आचार्य दक्षिणा, टेंट, माइक और भोजन शामिल होता है। खाने के लिए पूड़ी सब्जी, मिष्ठान और सलाद देने का भी नियम है। खानपान का ठेका अलग दिया जाता है, जिसमें एक लंच पैकेट का 80 रुपये की दर से भुगतान किया जाता है। ऐेसे में 137 जोड़ों पर पर कुल 109600 रुपये खानपान में खर्च किया गया। इसके बाद शादी में आए लोगों को बासी भोजन मिला।