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बीमार कर रहा कच्चा और अधपका दूध

Tue, 08 Sep 2020 11:58 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2020 11:58 PM IST
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पराग डेरी में दूघ की जांच करते रवि वर्मा। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज/उमर्दा। कच्चा और अधपका दूध सेहत के लिए हानिकारक है। बारिश में ये और अधिक हानिकारक हो जाता है। दूध निकालने के दो घंटे में 30 लाख से अधिक बैक्टीरिया उसमें पैदा हो जाते हैं। कच्चा और अधपका दूध पीने से बैक्टीरिया पीने वाले के शरीर में पहुंच कर नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा पशु में मौजूद टीबी के बैक्टीरिया भी दूध के साथ सेवन करने वाले के शरीर में पहुंच जाते हैं।
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जिले में इस समय 234517 दुधारू गोवंश 430954 भैंसें हैं। इनसे प्रतिदिन साढ़े चार लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। पशुपालकों को दूध संकल के लिए 565 दुग्ध संग्रह केंद्र और पांच डेयरी हैं।
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पराग दूध डेयरी उमर्दा के मैनेजर पीके वर्मा के अनुसार बारिश में कच्चे दूध के फेफड़ों की बीमारी, खांसी, जुकाम, बुखार और दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। कच्चे दूध में 30 लाख से अधिक बैक्टीरिया होते हैं। बारिश में ये 30 फीसदी अधिक घातक हो जाते हैं। ज्यादातर लोग दूध को 75 डिग्री या इससे कम तापमान पर ही गर्म करते हैं। इससे दूध के हानिकारक बैक्टीरिया खत्म नहीं होते। 100 डिग्री तापमान में पकाने पर ही बैक्टीरिया निष्क्रिय होते हैं। दूध को उच्च तापमान में पकाकर ही सेवन करना चाहिए। अगर दूध का सेवन दो से पांच घंटे बाद करना है तो उसे पहले फ्रिज में रख दें फिर अच्छे से उबालकर सेवन करें।
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गंदगी में बंधे पशुओं से हो सकती है टीबी
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय शाल्या ने बताया कि गाय और भैंसों में भी टीबी की बीमारी पाई जाती है। बेहद गंदगी वाले स्थानों पर बांधे जाने वाले दुधारू पशुओं के थनों में बैक्टीरिया चिपक जाते हैं। इसके अलावा बैक्टीरिया सांस के जरिये पेट में पशुओं के पहुंच जाता है और दूध में मिल जाता है। कच्चे दूध का सेवन करने से टीबी के बैक्टीरिया सेवन करने वाले के शरीर में प्रवेश कर आंतों की टीबी को जन्म देते हैं। गाय-भैंसों में टीबी की जांच के लिए ट्यूबर कुनीन टेस्ट करना पड़ता है। जांच के लिए जानवर के गले में इंजेक्शन से माध्यम से सैंपल लिया जाता है। यदि इंजेक्शन वाले स्थान पर सूजन बढ़ जाए तो जानवरों में टीबी की मानी जाती है। बारिश में टीबी की आशंका अधिक रहती है।
जिला अस्पताल पहुंच रहे 70 से 100 बच्चे
कच्चे और अधपके दूध का सेवन करने वाले 10 साल तक बच्चे बारिश में अधिक बीमार पड़ रहे हैं। उल्टी दस्त से पीड़ित 70 से 100 बच्चे प्रतिदिन जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग चिकित्सक डा. कुलदीप यादव ने कहा कि जल्दबाजी में अक्सर महिलाएं दूध कम उबालती हैं। ऐसे ही दूध के सेवन से बच्चे बीमार हाते हैं। रखा हुआ दूध पीने से भी बच्चे उल्टी और दस्त करने लगते हैं। बारिश में दूध उच्च तापमान में ही गर्म करना चाहिए। छोटे बच्चों बोतल गर्म पानी से धुलने के बाद ही दूध देना चाहिए।

इस तरह दूध को बैक्टीरियां से बचाएं
दूध डेयरी के माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट रवि वर्मा ने बताया कि जानवर को साफ स्थान में बांधे और साफ बर्तन में ही दूध निकालें। दूध को फ्रिज या ठंडे स्थान पर रखें। अगर डेयरी ले जाना है तो जल्द से जल्द पहुंचा दें। घर में सेवन करने के लिए दूध को गर्म कर कुछ देर बाद ही सेवन कर लें। दूध को कम से कम 100 डिग्री तापमान में उबालें। पनीर और दही भी कच्चे दूध से न बनाएं।
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