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मेडिकल कालेज इमरजेंसी के अग्निशमल यंत्र एक्सपायरी
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तिर्वा मेडिकल कालेज में लगी एक्सपायरा अग्निशमन यंत्र।
- फोटो : KANNAUJ
तिर्वा (कन्नौज)। तिर्वा राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लगे अग्निशमन यंत्र एक्सपायरी हो चुके हैं। करीब दो महीने पहले उनकी समायावधि समाप्त हो चुकी है लेकिन रीफिल कराने के लिए कॉलेज प्रशासन के पास पैसा नहीं है। अगर कोई हादसा हो गया तो मरीज, तीमारदार, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी भगवान भरोसे ही रहेंगे।
आग लगने पर तत्काल काबू पाने के लिए मेडिकल कालेज में जगह-जगह पांच-पांच किलोग्राम के (एक्सटिंग्यूसर) अग्निशामक यंत्र लगाए गए हैं। यंत्रों का प्रत्येक वर्ष दमकल विभाग की ओर से निरीक्षण और रीफिलिंग करने का नियम है। इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन 50 से 100 मरीज भर्ती होते हैं। यहां गंभीर मरीज ही भर्ती होते हैं। सबसे ज्यादा सावधानी यहीं बरतने की जरूरत होती है। आग पर काबू के लिए इमरजेंसी में भी यंत्र लगे हैं।
इमरजेंसी के अग्निशामक यंत्र पिछले वर्ष 25 मई रीफिल कराए गए थे। अंतिम तिथि 20 मई 2020 को निकल चुकी है। दो महीने बाद भी इन्हें रीफिल नहीं कराया गया है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डा. दिलीप सिंह ने कहा कि अग्निशामक यंत्र एक्सपायरी होने की जानकारी नहीं है। अग्निशामक यंत्र की देखरेख की जिम्मेदारी लिपिक संजीव तिवारी को दी गई है। उनसे जानकारी कर दमकल विभाग से यंत्र चेक कराए जाएंगे। लिपिक संजीव तिवारी ने कहा कि कोविड वार्ड समेत अन्य वार्डों के यंत्रों की रीफिलिंग कराकर दमकल विभाग से चेक करा लिया गया है। इमरजेंसी के यंत्रों की भी जल्द ही दमकल टीम से जांच कराई जाएगी। एक्सपायरी मिलने पर रीफलिंग कराई जाएगी।
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भवनों में लगे अग्निशामक यंत्रों की साल समाप्ति के बाद जांच कराना अवश्य होता है। एक्सपायरी होने पर रीफिलिंग करानी चाहिए। मेडिकल कालेज से सूचना मिलने पर विभाग के लोग जांच के लिए भेजे जाते हैं। - एमपी सिंह, अग्निशमन अधिकारी
बजट न होने कारण सभी अग्निशमन यंत्रों की रीफलिंग नहीं कराई जा सकी। बजट को लेकर कई बार शासन को पत्र भेज चुके हैं। बजट आते ही सभी उपकरणों को सही कराया जाएगा। डा.नवनीत कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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आग लगने पर तत्काल काबू पाने के लिए मेडिकल कालेज में जगह-जगह पांच-पांच किलोग्राम के (एक्सटिंग्यूसर) अग्निशामक यंत्र लगाए गए हैं। यंत्रों का प्रत्येक वर्ष दमकल विभाग की ओर से निरीक्षण और रीफिलिंग करने का नियम है। इमरजेंसी वार्ड में प्रतिदिन 50 से 100 मरीज भर्ती होते हैं। यहां गंभीर मरीज ही भर्ती होते हैं। सबसे ज्यादा सावधानी यहीं बरतने की जरूरत होती है। आग पर काबू के लिए इमरजेंसी में भी यंत्र लगे हैं।
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इमरजेंसी के अग्निशामक यंत्र पिछले वर्ष 25 मई रीफिल कराए गए थे। अंतिम तिथि 20 मई 2020 को निकल चुकी है। दो महीने बाद भी इन्हें रीफिल नहीं कराया गया है। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डा. दिलीप सिंह ने कहा कि अग्निशामक यंत्र एक्सपायरी होने की जानकारी नहीं है। अग्निशामक यंत्र की देखरेख की जिम्मेदारी लिपिक संजीव तिवारी को दी गई है। उनसे जानकारी कर दमकल विभाग से यंत्र चेक कराए जाएंगे। लिपिक संजीव तिवारी ने कहा कि कोविड वार्ड समेत अन्य वार्डों के यंत्रों की रीफिलिंग कराकर दमकल विभाग से चेक करा लिया गया है। इमरजेंसी के यंत्रों की भी जल्द ही दमकल टीम से जांच कराई जाएगी। एक्सपायरी मिलने पर रीफलिंग कराई जाएगी।
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भवनों में लगे अग्निशामक यंत्रों की साल समाप्ति के बाद जांच कराना अवश्य होता है। एक्सपायरी होने पर रीफिलिंग करानी चाहिए। मेडिकल कालेज से सूचना मिलने पर विभाग के लोग जांच के लिए भेजे जाते हैं। - एमपी सिंह, अग्निशमन अधिकारी
बजट न होने कारण सभी अग्निशमन यंत्रों की रीफलिंग नहीं कराई जा सकी। बजट को लेकर कई बार शासन को पत्र भेज चुके हैं। बजट आते ही सभी उपकरणों को सही कराया जाएगा। डा.नवनीत कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज