{"_id":"5f08b96c8ebc3e63514289a0","slug":"other-kannauj-news-knp5705122158","type":"story","status":"publish","title_hn":"कलेजे को ठंडक मिली, विकास दुबे ने मेरा परिवार बर्बाद किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कलेजे को ठंडक मिली, विकास दुबे ने मेरा परिवार बर्बाद किया
विज्ञापन
सूरजमुखी।
- फोटो : KANNAUJ
मानीमऊ (कन्नौज)। तेजपुर्वा गांव में तीस बीघा जमीन के लिए एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी। इन हत्याओं में विकास दुबे का हाथ होने के आरोप लगे। विकास दुबे की मौत के बाद पीड़ित परिवार बहुत खुश है, परिवार की मुखिया सुरजमुखी ने कहा कि अब कलेजे को ठंडक मिली है।
सुरजमुखी ने बताया कि शुक्रवार सुबह रायबरेली में रहने वाले दूसरे देवर ने फोन पर बताया कि विकास दुबे मारा गया, ये सुनकर कलेजा ठंडा हो गया। उसने जैसा अत्याचार किया, वैसी ही उसको सजा मिली। सुरजमुखी मानीमऊ के तेजपुर्वा गांव में अकेली रहती हैं। उन्होंने बताया कि उसके पास 30 बीघा जमीन थी। चार दशक पहले जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। पति गिरीश ने मुकदमा कर दिया। इसकी रंजिश में विकास दुबे और उसके साथियों ने 1994 में गिरीश की गोली मार कर हत्या करा दी। इसके बाद गिरीश के छोटे भाई सरवन कुमार मुकदमे की पैरवी करने लगे। उनकी भी गोली मार कर हत्या कर दी गई। कोर्ट ने जमीन का फैसला गिरीश के परिवार के पक्ष में दिया।
विवाद से परेशान होकर बड़े देवर उमेश रायबरेली चले गए। इसके बाद गिरीश के बेटे कुलदीप को नेरा गांव जाते समय खाने में जहर खिला दिया गया। इससे उसकी भी मौत हो गई। कुछ दिनों बाद छोटे पुत्र संदीप की मार्ग दुर्घटना में मौत हो गई। तब से सूरजमुखी अकेली गांव में रह रही हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई नहीं बचा तो जमीन की तरफ से मुंह फेर लिया। आज भी जमीन मेरे नाम है, लेकिन जोत-बो दूसरे लोग रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुरजमुखी ने बताया कि शुक्रवार सुबह रायबरेली में रहने वाले दूसरे देवर ने फोन पर बताया कि विकास दुबे मारा गया, ये सुनकर कलेजा ठंडा हो गया। उसने जैसा अत्याचार किया, वैसी ही उसको सजा मिली। सुरजमुखी मानीमऊ के तेजपुर्वा गांव में अकेली रहती हैं। उन्होंने बताया कि उसके पास 30 बीघा जमीन थी। चार दशक पहले जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। पति गिरीश ने मुकदमा कर दिया। इसकी रंजिश में विकास दुबे और उसके साथियों ने 1994 में गिरीश की गोली मार कर हत्या करा दी। इसके बाद गिरीश के छोटे भाई सरवन कुमार मुकदमे की पैरवी करने लगे। उनकी भी गोली मार कर हत्या कर दी गई। कोर्ट ने जमीन का फैसला गिरीश के परिवार के पक्ष में दिया।
विज्ञापन
विवाद से परेशान होकर बड़े देवर उमेश रायबरेली चले गए। इसके बाद गिरीश के बेटे कुलदीप को नेरा गांव जाते समय खाने में जहर खिला दिया गया। इससे उसकी भी मौत हो गई। कुछ दिनों बाद छोटे पुत्र संदीप की मार्ग दुर्घटना में मौत हो गई। तब से सूरजमुखी अकेली गांव में रह रही हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई नहीं बचा तो जमीन की तरफ से मुंह फेर लिया। आज भी जमीन मेरे नाम है, लेकिन जोत-बो दूसरे लोग रहे हैं।
विज्ञापन