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सातवें दिन जिंदगी की जंग हार गया जिले का लाल
Fri, 05 Apr 2019 12:13 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
kannauj
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Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 05 Apr 2019 12:13 AM IST
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शहीद पंकज दुबे की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
कन्नौज। कश्मीर घाट के सर्च आपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सेना की गोली का शिकार हुए जिले के लाल पंकज दुबे ने सात दिन बाद दम तोड़ दिया। पंकज के शहीद होने की सूचना लगते ही परिवार में कोहराम मच गया। उनके घर पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों की भीड़ जुट गई। शहीद के दिव्यांग पिता और भाई बेसुध हो गए। पूरे गांव में मातम सा छा गया।
जिला मुख्यालय से सटे गांव गंगधरापुर निवासी पंकज दुबे (20) पुत्र शांति स्वरूप दुबे भारतीय सेना में रेडियो आपरेटर के पद पर तैनात हुए थे। मौजूदा समय उनकी तैनाती जम्मू कश्मीर के तंगधार इलाके में थी। कानपुर में मार्च 2017 में सेना में भर्ती हुए थे। दिसंबर 2018 में वह छुट्टी लेकर गांव आया था। 55 दिन की छुट्टी बीताने के बाद वह 31 जनवरी को तंगधार रवाना हो गया था।
29 मार्च को सर्च आपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर हुई गोलीबारी में उनके सिर में गोली लग गई थी। उनका इलाज आर्मी के जम्मू स्थित कैंप हास्पिटल में चल रहा था। गुरुवार शाम करीब आठ बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हास्पिटल में मौजूद उनके भाई रामू दुबे ने दिव्यांग पिता शांति स्वरूप और दिव्यांग भाई जवाहर को फोन पर पंकज के शहीद होने की जानकारी दी। इससे परिवार में कोहराम मच गया। उसके घर पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ पंकज के दोस्त पहुंच गए। शहीद के भाई जवाहर दुबे ने बताया कि उसका भाई बहादुर था, दुश्मनों की गोली लगने के बावजूद भी सात दिन तक जिंदगी से जंग लड़ता रहा।
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भैया मकान की छत डलवाने के बाद करूंगा शादी
कन्नौज। शहीद हुए जवान पंकज का परिवार खेतीबाड़ी करता है। पंकज सबसे छोटे थे। उनका बड़ा भाई जवाहर दुबे दिव्यांग है। इसके बाद भाई रामू दुबे बेरोजगार हैं। जवाहर ने बताया कि उसने कोचिंग पढ़ाकर भाई को काबिल बनाया था। जबकि बहन रुचि की हाल में ही फतेहगढ़ से शादी हुई थी। पंकज के परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है। 25 मार्च को उसने फोन पर बड़े भाई रामू दुबे से कहा था कि जल्द छुट्टी लेकर वह आयेगा। मकान की छत डलवाने के बाद ही वह शादी करेगा। पंकज के कमरे में करीब 20 मेडल और शील्ड देखकर उसके हर किसी की आंखे नम हैं।
दोस्तों ने शहीद पंकज के नाम से की स्कूल की मांग
कन्नौज। शहीद पंकज दुबे का गांव में मकान सबसे किनारे है। उसके मकान के पास उच्च प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालय है। उसने दोनों विद्यालयों से शिक्षा हासिल की है। इससे उसके दोस्त विवेक सैनी, लालजी, राजा बाबू, जानू, और शनि ने गांव के विद्यालयों का नाम शहीद पंकज दुबे के नाम से होने की मांग की है।
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जिला मुख्यालय से सटे गांव गंगधरापुर निवासी पंकज दुबे (20) पुत्र शांति स्वरूप दुबे भारतीय सेना में रेडियो आपरेटर के पद पर तैनात हुए थे। मौजूदा समय उनकी तैनाती जम्मू कश्मीर के तंगधार इलाके में थी। कानपुर में मार्च 2017 में सेना में भर्ती हुए थे। दिसंबर 2018 में वह छुट्टी लेकर गांव आया था। 55 दिन की छुट्टी बीताने के बाद वह 31 जनवरी को तंगधार रवाना हो गया था।
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29 मार्च को सर्च आपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर हुई गोलीबारी में उनके सिर में गोली लग गई थी। उनका इलाज आर्मी के जम्मू स्थित कैंप हास्पिटल में चल रहा था। गुरुवार शाम करीब आठ बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हास्पिटल में मौजूद उनके भाई रामू दुबे ने दिव्यांग पिता शांति स्वरूप और दिव्यांग भाई जवाहर को फोन पर पंकज के शहीद होने की जानकारी दी। इससे परिवार में कोहराम मच गया। उसके घर पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ पंकज के दोस्त पहुंच गए। शहीद के भाई जवाहर दुबे ने बताया कि उसका भाई बहादुर था, दुश्मनों की गोली लगने के बावजूद भी सात दिन तक जिंदगी से जंग लड़ता रहा।
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भैया मकान की छत डलवाने के बाद करूंगा शादी
कन्नौज। शहीद हुए जवान पंकज का परिवार खेतीबाड़ी करता है। पंकज सबसे छोटे थे। उनका बड़ा भाई जवाहर दुबे दिव्यांग है। इसके बाद भाई रामू दुबे बेरोजगार हैं। जवाहर ने बताया कि उसने कोचिंग पढ़ाकर भाई को काबिल बनाया था। जबकि बहन रुचि की हाल में ही फतेहगढ़ से शादी हुई थी। पंकज के परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है। 25 मार्च को उसने फोन पर बड़े भाई रामू दुबे से कहा था कि जल्द छुट्टी लेकर वह आयेगा। मकान की छत डलवाने के बाद ही वह शादी करेगा। पंकज के कमरे में करीब 20 मेडल और शील्ड देखकर उसके हर किसी की आंखे नम हैं।
दोस्तों ने शहीद पंकज के नाम से की स्कूल की मांग
कन्नौज। शहीद पंकज दुबे का गांव में मकान सबसे किनारे है। उसके मकान के पास उच्च प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालय है। उसने दोनों विद्यालयों से शिक्षा हासिल की है। इससे उसके दोस्त विवेक सैनी, लालजी, राजा बाबू, जानू, और शनि ने गांव के विद्यालयों का नाम शहीद पंकज दुबे के नाम से होने की मांग की है।