फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kannauj News ›   nrsing Home or pickpoketer

नर्सिंग होम गए तो जेब कटनी पक्की

Mon, 19 Jan 2015 11:53 PM IST
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज Updated Mon, 19 Jan 2015 11:53 PM IST
विज्ञापन
nrsing Home or pickpoketer
नार्मल डिलीवरी संभव होने के बाद भी आपरेशन से बच्चा पैदा कराने को निजी नर्सिंग होम संचालकों ने कमाई का जरिया बना लिया है। कुछ निजी डाक्टरों की बदली सोच धरती के भगवान का दर्जा प्राप्त डाक्टरों की छवि पर बट्टा लगा रही है। जिले के कई नर्सिंग होम ऐसे ही केस की कमाई से चल रहे हैं।
विज्ञापन


इस खेल के संचालकों ने सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक अपने गुर्गों का जाल बिछा रखा है। जो तीमारदारों को बातों में फंसाकर नर्सिंग होम पहुंचाते हैं और अपना कमीशन सीधा करते हैं। कमाई के लालच में कई आशा बहू भी इस गोरखधंधे में लगी हैं। पढ़िए हमारे रिपोर्टर योगेंद्र मिश्रा की खास रिपोर्ट।
विज्ञापन


जिले में नर्सिंग होम का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। कई सरकारी डाक्टर अपने परिजनों के जरिए नर्सिंग होम खोलकर इस क्षेत्र में किस्मत आजमा रहे हैं। वे मौका मिलते ही अपने नर्सिंग होम में पहुंचकर सेवाएं भी देते हैं। लिखापढ़ी में वह कहीं नजर नहीं आते, लेकिन जमीनी तौर पर ज्यादातर गतिविधियां वही संचालित करते हैं। वहीं कई सफेदपोश लोग भी निजी नर्सिंग होम खोलकर प्रसव के ज्यादा से ज्यादा केस अपने यहां लाकर सीजर कराने की फिराक में लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कन्नौज मुख्यालय के साथ ही छिबरामऊ और गुरसहायगंज में भी निजी नर्सिंग होम की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां पर हर साल 20 से 125 तक सीजर प्रत्येक नर्सिंग होम में होना दिखाया जा रहा है। हालांकि कोई पुख्ता आंकड़े सीएमओ कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं।

नार्मल डिलीवरी के आंकड़े ही जुटाकर खानापूरी की जा रही हैै। वहीं जिला अस्पताल में बीते एक वर्ष के दौरान मात्र दो प्रसव ही आपरेशन से कराए गए। अन्य मामलों में महिला को रेफर करके पल्ला झाड़ लिया गया।

तिर्वा राजकीय मेडिकल कालेज में सर्वाधिक 41 सीजर एक साल के दौरान होने के आंकड़े सीएमओ कार्यालय में दर्ज हैं। कागजों पर सीएचसी में आपरेशन की सुविधा है, लेकिन हकीकत में डाक्टर व एनेस्थीसिया न होने से इस सुविधा का कोई मतलब नहीं है। ऐसे में कन्नौज, जलालाबाद, गुगरापुर, तालग्राम, छिबरामऊ, सौरिख, हसेरन के सीएचसी में साल भर में एक भी प्रसव आपरेशन से नहीं हुआ।
--
जवां दिखने की चाहत ने बढ़ाई कमाई
नार्मल डिलीवरी के बाद शरीर के कई अंगों में परिवर्तन आ जाते हैं। कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो मां तो बनना चाहती हैं लेकिन शरीर के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहतीं। मां बनने के बाद भी जवां दिखने की चाहत के कारण वे स्वयं ही डाक्टर से आपरेशन को कहती हैं। हालांकि जिले में ऐसी महिलाओं की तादात कम है।
---
ग्राहक की नजर से देखे जाते हैं मरीज
नर्सिंग होम में भर्ती होने के बाद से प्रसूता के परिजनों पर इतना ज्यादा मानसिक दबाव बना दिया जाता है कि वे कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं रहते। भर्ती होते ही ब्लड टेस्ट, हीमोग्लोबिन, यूरिन, अल्ट्रासाउंड आदि की जांच कराने के लिए कह दिया जाता है। तीमारदारों को यह नहीं बताया जाता है कि यह जांचें क्यों कराई जा रही हैं? कमाई के चलते अधिकतर नर्सिंग होम कैंपस में ही जांच सुविधा उपलब्ध करा देते हैं।

सीएमओ डा. पीएन वाजपेयी से बातचीत
प्रश्न : सरकारी अस्पतालों की तुलना में नर्सिंग होम में सीजर केस क्यों ज्यादा होते हैं ?
उत्तर : जिले के सरकारी अस्पतालों में सीजर की पुख्ता व्यवस्था न होने के कारण ऐसा हो रहा है। अब डाक्टर व एनेस्थीसिया आ गए हैं। जिला अस्पताल मे सीजर शुरू करा दिया गया है। यदि बिना किसी कारण के ही सीजर किया जाता है और कोई शिकायत करता है तो संबंधित नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रश्न: सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग होम का नेटवर्क तोड़ने के लिए क्या कर रहे हैं ?
उत्तर : सबसे पहले आशा बहुओं के कामकाज पर नजर रखने की व्यवस्था की जा रही है। यदि कोई आशा बहू गर्भवती महिला को निजी अस्पताल में लेकर जाती है तो उसे दंडित करेंगे। दोषी होने पर उसे नौकरी से हटाया जाएगा। इसके अलावा कोई सरकारी डाक्टर बिना किसी ठोस कारण के प्रसूता को रेफर करता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

प्रश्न : जिला अस्पताल में सुविधाएं हैं तो फिर सीजर कम क्यों हो रहे हैं?
उत्तर : सरकारी अस्पतालों में जरूरत पड़ने पर ही सीजर किया जाता है। बेवजह सीजर नहीं किया जाता। प्रसव के लिए महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में आना चाहिए। यदि कोई समस्या या शिकायत है तो बताएं, उसका समाधान कराएंगे।


जिले में ये हैं नर्सिंग होम
स्पर्श हास्पिटल, जीवन ज्योति, ओम साईं, अर्शी, गौरी, त्रिपाठी, निट किट, कटियार, रक्षा सर्जिकल सेंटर नामक नर्सिंग होम कन्नौज जिला मुख्यालय पर हैं, जबकि गुरसहायगंज मे सेवा हास्पिटल, सिद्धार्थ हास्पिटल, छिबरामऊ में कृष्णा हास्पिटल, स्वाती हास्पिटल, स्नेहा, हास्पिटल नर्सिंग के तौर पर काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed