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सीएचसी में नहीं महिला डॉक्टर, खतरे में जननी सुरक्षा
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गुरसहायगंज। सीएचसी में महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। स्टाफ नर्स गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराती हैं। ऐसे में ज्यादातर गर्भवती को नर्सिंगहोम में प्रसव कराने की सलाह दी जाती है।
कस्बे के तिर्वा रोड पर सीएचसी परिसर में बने मैटरनिटी सेंटर में महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इस कारण यहां आने वाले गर्भवती महिलाओं को परेशानी होती है। यहां पर तैनात स्टाफ नर्स परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को नर्सिंगहोम में जाने की सलाह देकर टरका देती हैं। फर्नीचर और बेड के अभाव में गर्भवती महिलाओं को जमीन पर ही लेटना पड़ता है।
सफाई कर्मी न होने से चारों ओर गंदगी रहती है वार्डब्वाय भी नहीं है। स्टाफ नर्स निरुपमा ने बताया कि यहां सिर्फ तीन स्टाफ नर्स हैं। अन्य किसी की तैनाती न होने से रात में अस्पताल बंद हो जाता है। इससे रात में आने वाली गर्भवती महिलाओं को परेशानी होती है। प्रसव के लिए उन्हें नर्सिंगहोम का सहारा लेना पड़ता है या फिर कस्बे के मुख्य चौराहे पर स्थित प्रसव केंद्र पर भेजा जाता है।
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वहां पर भी कोई सुविधा नहीं है। इस केंद्र को कोविड-19 अस्पताल घोषित किया गया था, जिस कारण मुख्य गेट अभी भी बंद रहता है। सीएमओ डॉक्टर विनोद कुमार ने बताया कि जल्द महिला चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। अस्पताल में गंदगी मिलने की जानकारी पर निरीक्षण किया जाएगा।
सीएचसी में कुत्ता काटने पर मरीजों एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगाया जाता है। ऐसे मरीजों को जलालाबाद सीएचसी जाना पड़ता है। शनिवार को ग्राम रौरा निवासी अंबुज, कस्बे के मोहल्ला अफसरी निवासी श्याम कुमार की पुत्री परी कुत्ता काटने पर एंजी रैबीज इंजेक्शन लगवाने गईं तो इंजेक्शन न होने की बात कही गई। बताया गया कि करीब एक महीने से अस्पताल में इंजेक्शन नहीं है। ब्लाक चिकित्सा अधिकारी कुमारिल मैत्रीय ने बताया कि इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। जल्द वैक्सीन आ जाएगी।
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कस्बे के तिर्वा रोड पर सीएचसी परिसर में बने मैटरनिटी सेंटर में महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इस कारण यहां आने वाले गर्भवती महिलाओं को परेशानी होती है। यहां पर तैनात स्टाफ नर्स परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को नर्सिंगहोम में जाने की सलाह देकर टरका देती हैं। फर्नीचर और बेड के अभाव में गर्भवती महिलाओं को जमीन पर ही लेटना पड़ता है।
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सफाई कर्मी न होने से चारों ओर गंदगी रहती है वार्डब्वाय भी नहीं है। स्टाफ नर्स निरुपमा ने बताया कि यहां सिर्फ तीन स्टाफ नर्स हैं। अन्य किसी की तैनाती न होने से रात में अस्पताल बंद हो जाता है। इससे रात में आने वाली गर्भवती महिलाओं को परेशानी होती है। प्रसव के लिए उन्हें नर्सिंगहोम का सहारा लेना पड़ता है या फिर कस्बे के मुख्य चौराहे पर स्थित प्रसव केंद्र पर भेजा जाता है।
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वहां पर भी कोई सुविधा नहीं है। इस केंद्र को कोविड-19 अस्पताल घोषित किया गया था, जिस कारण मुख्य गेट अभी भी बंद रहता है। सीएमओ डॉक्टर विनोद कुमार ने बताया कि जल्द महिला चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। अस्पताल में गंदगी मिलने की जानकारी पर निरीक्षण किया जाएगा।
सीएचसी में कुत्ता काटने पर मरीजों एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगाया जाता है। ऐसे मरीजों को जलालाबाद सीएचसी जाना पड़ता है। शनिवार को ग्राम रौरा निवासी अंबुज, कस्बे के मोहल्ला अफसरी निवासी श्याम कुमार की पुत्री परी कुत्ता काटने पर एंजी रैबीज इंजेक्शन लगवाने गईं तो इंजेक्शन न होने की बात कही गई। बताया गया कि करीब एक महीने से अस्पताल में इंजेक्शन नहीं है। ब्लाक चिकित्सा अधिकारी कुमारिल मैत्रीय ने बताया कि इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। जल्द वैक्सीन आ जाएगी।

No female doctor in CHC, maternal safety in danger- फोटो : KANNAUJ