मां अन्नपूर्णा भक्तों पर करती धन की बारिश

ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Sun, 18 Oct 2015 12:27 AM IST
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Mother Annapurna devotees that money spinner

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नवरात्र के पर्व को लेकर इन दिनों कसबे के सिद्धपीठ मां अन्नपूर्णा देवी के दरबार में नित्य हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा के दरबार में मनौती मांगने वाले श्रद्धालुओं के घरों में धन-धान्य की कमी नहीं होती।
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सिद्धपीठ मां अन्नपूर्णा देवी का मंदिर 16वीं शताब्दी का है। बताते हैं कि तिर्वा रियासत के पूर्व राजाओं ने वर्ष 1526 में इस मंदिर का निर्माण कराया था। विशुद्ध पत्थरों से निर्मित यह मंदिर वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है। मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा श्रीयंत्र पर स्थापित है। इस वजह से उन्हें मां लक्ष्मी का प्रतिरूप माना जाता है।
मंदिर परिसर में बाबा बजरंगबली का भी दरबार है। मंदिर परिसर के सामने विशाल पंचवटी सरोवर है। इस सरोवर में पानी के ऊपर पांच मंदिरों का निर्माण तिर्वा स्टेट के पूर्व राजा प्रीतम सिंह ने कराया था। इस वजह से यह प्रीतम सरोवर के नाम से भी विख्यात है। पांच मंदिरों में भगवान शिव, मां दुर्गा, भगवान सूर्य, भगवान गणेश व मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं विराजमान हैं।
मां अन्नपूर्णा के दर्शन करने के बाद श्रद्धालु इस पंचवटी सरोवर की परिक्रमा करते हैं। करीब एक किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले मंदिर परिसर में प्रतिदिन बाजार लगता है। करीब एक सैकड़ा से अधिक दुकानदार पूजा सामग्री के अलावा फल व मिठाई की दुकानें लगाते हैं।

मंदिर परिसर में माह दिसंबर व मई के दौरान प्रतिवर्ष एक माह तक चलने वाले मेले का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा प्रतिवर्ष अषाढ़ी पूर्णिमा पर्व पर प्रदेश के कई जिलों से हजारों की तादात में श्रद्धालु आकर मनौतियां मानते हैं। मंदिर के पुजारी अनूप बाजपेयी के मुताबिक, मां अन्नपूर्णा के दरबार में देश के कोने-कोने से लोग आकर पूजा करते हैं।

मुरादें पूरी होने पर मंदिर परिसर में ही हवन-पूजन व भंडारे का भी सिलसिला चलता है। उनके मुताबिक औसतन प्रतिमाह करीब 50 हजार श्रद्धालु मां के दरबार में आकर मत्था टेकते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। अन्नपूर्णा का ही यह प्रताप है कि तिर्वा क्षेत्र में कभी अकाल की नौबत नहीं आई।

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