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मेडिकल कालेज के हॉस्टल में स्टाफ नर्स ने लगा ली फांसी

Fri, 21 May 2021 11:19 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 21 May 2021 11:19 PM IST
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medikal kaalej ke hostal mein staaph nars ne laga lee phaansee
तिर्वा (कन्नौज)। मेडिकल कालेज आवास टाइप थ्री के कमरा नंबर नौ में स्टाफ नर्स रंजना रसल ने फांसी लगाकर जान दे दी। रंजना ने 17 मई को इमरजेंसी में ड्यूटी की थी। 18 मई से उनका किसी कर्मचारी से संपर्क नहीं हुआ। शक होने पर तीन दिन बाद आवास में भीतर से बंद ताला तोड़ा गया। स्टाफ नर्स का शव कमरे की चौखट की जाली में दुपट्टे के फंदे से लटका मिला। छानबीन में पुलिस को सुसाइड नोट मिला है। इसमें पारिवारिक वजह का जिक्र है।
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गोरखपुर जिले के गांव धर्मपुर शाहपुर(पोस्ट गीता वाटिका) निवासी रंजना रसल(35) का विवाह 2008 में स्तुति रसल के साथ हुआ था। पति लखनऊ में दो बच्चों के साथ रहते हैं। रंजना रसल 2018 में आजमगढ़ से ट्रांसफर होकर राजकीय मेडिकल कालेज में आई थीं। वह कालेज के आवास टाइप थ्री के कमरा नंबर नौ में रहती थीं। इनकी ड्यूटी 17 मई को इमरजेंसी में लगी थी। 18 मई को अवकाश था। वह अपने कमरे में अकेली थीं। 18 मई की सुबह से कालेज के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हुआ था। दो दिन तक किसी से संपर्क न होने पर स्टाफ नर्स ने सुबह फोन किया। कॉल रिसीव नहीं हुई। इस पर कालेज प्रशासन को सूचना दी गई।
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टाइप थ्री के आवास के पास पहुंचने पर गंध लगी तो कर्मचारियों से अंदर से लगे ताले को तुड़वाया गया। कमरे के अंदर दूसरे कमरे की चौखट वाली जाली के सहारे फांसी लगाई गई थी। कालेज प्रशासन की सूचना पर पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर कमरे की तलाशी ली। पास में सुसाइड नोट रखा मिला। इसमें पारिवारिक दिक्कत बयां की गई थी। पुलिस ने स्टाफ नर्स रंजना के परिजनों को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया है।
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छह लाइन में लिख डाली जीवन की व्यथा
तिर्वा। स्टाफ नर्स रंजना रसल खुश मिजाज थीं। ऐसे में उन्हें देखकर कोई यह नहीं कह सकता था कि वह अपने भीतर जीवन की पूरी व्यथा समेटे हैं। सुसाइड नोट की छह लाइनों ने रंजना की हकीकत सामने ला दी।
वरिष्ठ स्टाफ नर्स कुसुम मौर्या का कहना है कि रंजना रसल को वह भी जानती थीं। मेडिकल कालेज में वह सभी से खुश मिजाजी से मिलती थीं। मरीजों और तीमारदारों के साथ व्यवहार काफी अच्छा था। यह कतई पता नहीं था कि वह भीतर से कितनी दुखी हैं। वहीं सुसाइड नोट पढ़ने के बाद सहकर्मियों व स्टाफ नर्स में अपने-अपने तरीके से बातचीत होती रही। कोई यह नहीं बता पाया कि आखिर वह कौन सा सच रहा, जिसके लिए स्टाफ नर्स बता पाने की जद्दोजहद कर रही थीं। पुलिस ने पति से बात की तो उनका कहना था कि वह आने के बाद ही कुछ बताएंगे। इससे पहले नहीं। ऐसे में पुलिस का मानना है कि परिवार में ही कुछ ऐसा चल रहा था जिसमें रंजना रसल अपने को सत्य साबित करना चाह रही थीं। वह ऐसा कर नहीं पा रही थीं। लावारिस की तरह शव के अंतिम संस्कार की इच्छा को देखते हुए परिवार में गंभीर विवाद को बल मिल रहा है। सीओ दीपक दुबे का कहना है कि पति व बच्चों के आने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
रंजना रसल ने सुसाइड नोट में यह लिखा
‘मेरी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं है। मैं अपने सामने सत्य साबित नहीं कर सकी। पुलिस को अनुरोध है कि मेरा अंतिम संस्कार लावारिस शव की तरह किया जाए।’ - रंजना रसल।
रंजना ने कलाई की नस भी काटी
मेडिकल कालेज की स्टाफ नर्स रंजना रसल की आत्महत्या की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतारा। हाथ में कलाई के पास से खून टपककर सूख चुका था। हाथ की नस कटी होने पर कयास लगाया गया कि रंजना ने मरने के लिए कलाई की नस भी काटी थी।

कमरे के दूसरी तरफ खिड़की मिली खुली
स्टाफ नर्स रंजना ने अंदर से दरवाजा बंद कर ताला लगा लिया था। फंदे पर लटकते शव को दूसरी इमारत से देख लिया जाए, इसके लिए दूसरी तरफ के कमरे की खिड़की खोल दी थी। खिड़की में जाल लगा हुआ था। सिर्फ शीशे खोले गए थे।
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