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मेडिकल कालेज प्राचार्य हाईकोर्ट में तलब
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Wed, 18 Nov 2015 12:08 AM IST
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राजकीय मेडिकल कालेज में मृतक आश्रित कोटे से
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नियुक्ति न करने के मामले में हाईकोर्ट ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य व
प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक के खिलाफ दायर अवमानना मामले में तलब
किया है।
ज्ञात हो कि वर्ष 12 के दौरान गोरखपुर की मूल निवासी स्टाफ नर्स बिंदू शर्मा की सड़क दुर्घटना में तिर्वा में मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद बिंदू के भाई राजन ने अपने को एक मात्र उत्तराधिकारी बताते हुए मृतक आश्रित कोटे से नियुक्त की फरियाद मेडिकल कालेज प्रशासन से की थी। नियुक्ति न होने पर उसने एक रिट हाईकोर्ट इलाहाबाद में दायर की थी।
हाईकोर्ट ने गत छह दिसंबर 13 को आदेश पारित कर मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी उसकी नियुक्ति न होने पर उसने पुन: हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर न्यायालय के आदेश का पालन न होने का मामला दर्ज कराया।
इस पर हाईकोर्ट ने डीजीएमई डा. वीएन त्रिपाठी व मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. डीएस मारतोलिया को आगामी 23 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत होने के आदेश दिए हैं। उक्त मामले में मेडिकल कालेज के प्राचार्य का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कराया जा रहा है।
उच्च न्यायालय ने उक्त प्रकरण में सहानुभूति पूर्वक विचार करने को कहा था। अवमानना की नोटिस अभी तक उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। र्हाईकोर्ट का आदेश आएगा तो वह न्यायालय में प्रस्तुत होंगे।
ज्ञात हो कि वर्ष 12 के दौरान गोरखपुर की मूल निवासी स्टाफ नर्स बिंदू शर्मा की सड़क दुर्घटना में तिर्वा में मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद बिंदू के भाई राजन ने अपने को एक मात्र उत्तराधिकारी बताते हुए मृतक आश्रित कोटे से नियुक्त की फरियाद मेडिकल कालेज प्रशासन से की थी। नियुक्ति न होने पर उसने एक रिट हाईकोर्ट इलाहाबाद में दायर की थी।
हाईकोर्ट ने गत छह दिसंबर 13 को आदेश पारित कर मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी उसकी नियुक्ति न होने पर उसने पुन: हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर न्यायालय के आदेश का पालन न होने का मामला दर्ज कराया।
इस पर हाईकोर्ट ने डीजीएमई डा. वीएन त्रिपाठी व मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. डीएस मारतोलिया को आगामी 23 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रस्तुत होने के आदेश दिए हैं। उक्त मामले में मेडिकल कालेज के प्राचार्य का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कराया जा रहा है।
उच्च न्यायालय ने उक्त प्रकरण में सहानुभूति पूर्वक विचार करने को कहा था। अवमानना की नोटिस अभी तक उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। र्हाईकोर्ट का आदेश आएगा तो वह न्यायालय में प्रस्तुत होंगे।