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‘प्यार से ही संभव आत्मा का परमात्मा से मिलन’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sun, 29 Nov 2015 11:31 PM IST
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नगर के पूर्वी बाईपास पर स्थित संत निरंकारी आश्रम
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में आयोजित सत्संग में महात्मा मुखी राजकुमार गुप्ता ने कहा कि प्यार से ही
सब कुछ हासिल किया जा सकता है। प्यार के बलबूते ही आत्मा का परमात्मा से
मिलन हो सकता है।
उन्होंने कहा कि नफरत कभी भी विश्वास पैदा नहीं कर सकती। आपस में एकता नहीं हो सकती। नफरत सिर्फ लोगों को अलग करने का काम करती है, पर प्यार में वो ताकत है कि वह सभी को एक करके मजबूत संगठन बना सकती है। प्यार से दुनिया को जीता जा सकता है और उसी से हम हर प्रकार की खुशियां भी प्राप्त कर सकते हैं।
कहा कि प्यार संयोग से मिलता है। जिस समय यह आत्मा परमात्मा से बिछुड़ी हुई होती है तो प्यार पैदा नहीं होता। यह प्यार आत्मा और परमात्मा के मिलन से ही प्राप्त होता है और फिर हमारी जिंदगी में रच बस जाता है। शरीर के खत्म होने पर भी यह प्यार खत्म नहीं होता। इसका कारण है कि यह सूक्ष्म प्यार है।
कहा कि निराकार आत्मा और परमात्मा का प्यार है यह हमेशा कायम रहता है। हाड़ मांस का शरीर तो टूटने फूटने वाला है, इसलिए जो आत्मा परमात्मा को जान लेती है उसका प्यार अमर बन जाता है। जिसका गुणगान संत जन हमेशा करते रहते हैं। राकेश राठौर के संचालन में आयोजित सत्संग में कई लोगों ने भजन पेश किए।
इस दौरान सुशील बाबू, नरेश चंद्र वर्मा, हरिश्चंद्र, सेवादल संचालिका शशि प्रभाकर, पूजा, रश्मि, विमला, विनीता, निशा, मिथलेश भदौरिया, शशि वर्मा, आनंद स्वरूप, कमलेश कुमार, रामप्रकाश, दयाशंकर आदि मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि नफरत कभी भी विश्वास पैदा नहीं कर सकती। आपस में एकता नहीं हो सकती। नफरत सिर्फ लोगों को अलग करने का काम करती है, पर प्यार में वो ताकत है कि वह सभी को एक करके मजबूत संगठन बना सकती है। प्यार से दुनिया को जीता जा सकता है और उसी से हम हर प्रकार की खुशियां भी प्राप्त कर सकते हैं।
कहा कि प्यार संयोग से मिलता है। जिस समय यह आत्मा परमात्मा से बिछुड़ी हुई होती है तो प्यार पैदा नहीं होता। यह प्यार आत्मा और परमात्मा के मिलन से ही प्राप्त होता है और फिर हमारी जिंदगी में रच बस जाता है। शरीर के खत्म होने पर भी यह प्यार खत्म नहीं होता। इसका कारण है कि यह सूक्ष्म प्यार है।
कहा कि निराकार आत्मा और परमात्मा का प्यार है यह हमेशा कायम रहता है। हाड़ मांस का शरीर तो टूटने फूटने वाला है, इसलिए जो आत्मा परमात्मा को जान लेती है उसका प्यार अमर बन जाता है। जिसका गुणगान संत जन हमेशा करते रहते हैं। राकेश राठौर के संचालन में आयोजित सत्संग में कई लोगों ने भजन पेश किए।
इस दौरान सुशील बाबू, नरेश चंद्र वर्मा, हरिश्चंद्र, सेवादल संचालिका शशि प्रभाकर, पूजा, रश्मि, विमला, विनीता, निशा, मिथलेश भदौरिया, शशि वर्मा, आनंद स्वरूप, कमलेश कुमार, रामप्रकाश, दयाशंकर आदि मौजूद थे।