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महाराजा जयचंद स्मृति समारोह की तैयारियां पूरी
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कन्नौज । कान्यकुब्ज शिक्षा एवं समाजसेवा समिति की ओर से महाराजा जयचंद स्मृति समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। इस बार भी यह समारोह महाशिवरात्रि के दिन 11 मार्च को होगा। शहर के उत्तरी-पूर्वी छोर पर स्थित महाराजा जयचंद के किले और उनकी प्रतिमा के पास आयोजित होने वाले कार्यक्रम में इस बार मुख्य वक्ता राष्ट्र कवि डॉ. नरेश कात्यायन होंगे।
समारोह के संयोजक नबाव सिंह यादव ने चौधरी चंदन सिंह महाविद्यालय में समिति की बैठक के बाद यह जानकारी दी। बताया कि समारोह में तमाम बुद्धिजीवियों की ओर से महाराजा जयचंद पर लगाए गए कथित और मिथ्या आरोपों को इतिहास के समक्ष रखकर कसौटी पर परखा जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ दशक से उनकी संस्था कान्यकुब्ज शिक्षा एवं समाजसेवा समिति ने कन्नौज वासियों के सहयोग से अपने अंतिम सम्राट जयचंद पर लगाए गए कलंक को मिटाने की मुहिम चला रखी है।
मुगलकाल से पहले हमारा देश छोटे-छोटे राज्यों में बंटा था। सभी राजाओं के अपने-अपने प्रशंसक व चरण कवि थे। उन्हीं में दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान के चारण कवि चंद वरदाई ने अपने राजा की प्रशंसा और कन्नौज के महाराज जयचंद के मध्य साम्राज्यवाद को लेकर चल रही दुश्मनी के मद्देनजर स्वरचित ग्रंथ पृथ्वीराज रासो में तमाम मिथ्या आरोप लगाए थे। उसी के आधार पर ब्रिटिश हुकूमत में लिखे गए इतिहास में भी कन्नौज के प्रतापी सम्राट जयचंद के जीवन परिचय को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया। यह कन्नौज के इतिहास को जानने वाले किसी भी व्यक्ति को स्वीकार नहीं है। इस मौके पर मुन्ना दरोगा भी रहे।
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समारोह के संयोजक नबाव सिंह यादव ने चौधरी चंदन सिंह महाविद्यालय में समिति की बैठक के बाद यह जानकारी दी। बताया कि समारोह में तमाम बुद्धिजीवियों की ओर से महाराजा जयचंद पर लगाए गए कथित और मिथ्या आरोपों को इतिहास के समक्ष रखकर कसौटी पर परखा जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ दशक से उनकी संस्था कान्यकुब्ज शिक्षा एवं समाजसेवा समिति ने कन्नौज वासियों के सहयोग से अपने अंतिम सम्राट जयचंद पर लगाए गए कलंक को मिटाने की मुहिम चला रखी है।
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मुगलकाल से पहले हमारा देश छोटे-छोटे राज्यों में बंटा था। सभी राजाओं के अपने-अपने प्रशंसक व चरण कवि थे। उन्हीं में दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान के चारण कवि चंद वरदाई ने अपने राजा की प्रशंसा और कन्नौज के महाराज जयचंद के मध्य साम्राज्यवाद को लेकर चल रही दुश्मनी के मद्देनजर स्वरचित ग्रंथ पृथ्वीराज रासो में तमाम मिथ्या आरोप लगाए थे। उसी के आधार पर ब्रिटिश हुकूमत में लिखे गए इतिहास में भी कन्नौज के प्रतापी सम्राट जयचंद के जीवन परिचय को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया। यह कन्नौज के इतिहास को जानने वाले किसी भी व्यक्ति को स्वीकार नहीं है। इस मौके पर मुन्ना दरोगा भी रहे।
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