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कन्नौज : लेमन ग्रास से किसानों की बढ़ेगी आय, उद्यमियों का बढ़ेगा व्यापार
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फोटो 01- एफएफडीसी में तैयार लेमन ग्रास की पौध। संवाद
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। जिले समेत आसपास के जिलों के किसानों की लेमन ग्रास खेती से आय बढ़ेगी। वहीं इस सुगंधित खेती से शहर के अगरबत्ती कारोबारियों का व्यापार भी बढ़ेगा। इसके लिए एफएफडीसी में लेमन ग्रास की पौध तैयार की गई है।
जिला समेत सीतापुर और हरदोई में परंपरागत खेती छोड़कर किसानों का सुगंधित खेती की तरफ रुझान बढ़ रहा है। ऐसे में सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) की पहल पर किसान मेेंथा, तुलसी और लेमन ग्रास की खेती कर रहे है। एफएफडीसी ने इस साल बड़े पैमाने पर लेमन ग्रास की पौध तैयार की है।
एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि शहर में इत्र कारोबार के साथ-साथ अगरबत्ती कारोबार होता है। अगरबत्ती कारोबार में लेमन ग्रास का प्रयोग होता है। इससे अगरबत्ती में खुशबू की क्षमता बढ़ जाती है।
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एफएफडीसी में लेमन ग्रास की पौध तैयार कर ली गई है। लेमन ग्रास की खेती बेहद कम सिंचाई में पथरीली जमीन पर अच्छी होती है। इससे बुंदेलखंड के किसानों ने लेमन ग्रास पौध की मांग की है।
एफएफडीसी की पौधशाला प्रभारी कमलेश कुमार ने बताया कि एक एकड़ में 15 हजार से 18 हजार पौध लगाने होते है। जिनकी कीमत कुल करीब 25 हजार से 30 हजार आती है। अगस्त में पौधे लगाने के बाद छह माह में इसका कटान कर लिया जाता है। इसके बाद प्रत्येक चार माह के अंतराल पर इसका कटाना होता है।
लेमन ग्रास अगरबत्ती में प्रयोग करने के साथ-साथ इसकी पत्तियों से हर्बल चाय तैयार की जाती है। साबुन, सौंदर्य, विटामिन दवाइयों में इसका प्रयोग किया जाता है। शहर में सौंदर्य के साथ अगरबत्ती कारोबारियों को लेमन ग्रास की डिमांड रहती है। अगरबत्ती कारोबारी राजा पाठक का कहना है कि लेमन ग्रास की खेती से अगरबत्ती कारोबार में इजाफा होगा।
एक एकड़ में लेमन ग्रास का तेल करीब 100 लीटर के आसपास निकलता है। इससे एक कटान में करीब डेढ़ लाख रुपये तक की किसानों को आमदनी होती है। पैंदाबाद निवासी किसान राजू बताते है कि उन्होंने चार एक लेमन ग्रास किया था। अच्छा मुनाफा होने पर इस बार खेती का दायरा बढ़ाकर अधिक कमाई करेंगे।
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जिला समेत सीतापुर और हरदोई में परंपरागत खेती छोड़कर किसानों का सुगंधित खेती की तरफ रुझान बढ़ रहा है। ऐसे में सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) की पहल पर किसान मेेंथा, तुलसी और लेमन ग्रास की खेती कर रहे है। एफएफडीसी ने इस साल बड़े पैमाने पर लेमन ग्रास की पौध तैयार की है।
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एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि शहर में इत्र कारोबार के साथ-साथ अगरबत्ती कारोबार होता है। अगरबत्ती कारोबार में लेमन ग्रास का प्रयोग होता है। इससे अगरबत्ती में खुशबू की क्षमता बढ़ जाती है।
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एफएफडीसी में लेमन ग्रास की पौध तैयार कर ली गई है। लेमन ग्रास की खेती बेहद कम सिंचाई में पथरीली जमीन पर अच्छी होती है। इससे बुंदेलखंड के किसानों ने लेमन ग्रास पौध की मांग की है।
एफएफडीसी की पौधशाला प्रभारी कमलेश कुमार ने बताया कि एक एकड़ में 15 हजार से 18 हजार पौध लगाने होते है। जिनकी कीमत कुल करीब 25 हजार से 30 हजार आती है। अगस्त में पौधे लगाने के बाद छह माह में इसका कटान कर लिया जाता है। इसके बाद प्रत्येक चार माह के अंतराल पर इसका कटाना होता है।
लेमन ग्रास अगरबत्ती में प्रयोग करने के साथ-साथ इसकी पत्तियों से हर्बल चाय तैयार की जाती है। साबुन, सौंदर्य, विटामिन दवाइयों में इसका प्रयोग किया जाता है। शहर में सौंदर्य के साथ अगरबत्ती कारोबारियों को लेमन ग्रास की डिमांड रहती है। अगरबत्ती कारोबारी राजा पाठक का कहना है कि लेमन ग्रास की खेती से अगरबत्ती कारोबार में इजाफा होगा।
एक एकड़ में लेमन ग्रास का तेल करीब 100 लीटर के आसपास निकलता है। इससे एक कटान में करीब डेढ़ लाख रुपये तक की किसानों को आमदनी होती है। पैंदाबाद निवासी किसान राजू बताते है कि उन्होंने चार एक लेमन ग्रास किया था। अच्छा मुनाफा होने पर इस बार खेती का दायरा बढ़ाकर अधिक कमाई करेंगे।