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Kannauj Case: नाबालिग बेटे को किताब पकड़ाने की उम्र में थमा दी बंदूक... पिता की तरह दबंग; जाहिर किए मंसूबे

Thu, 28 Dec 2023 10:06 AM IST
शाहरुख खान सद्दाम हुसैन, अमर उजाला, कन्नौज
सद्दाम हुसैन, अमर उजाला, कन्नौज Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 28 Dec 2023 10:06 AM IST
सार

हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुनुआ के तीन बेटों में सबसे छोटा बेटा नाबालिग है। वह पास के ही असालताबाद स्थित एक निजी स्कूल में कक्षा सात का छात्र है।पिता की तरह ही उसे भी दबंग प्रवृत्ति का बताया जाता है। जिस उम्र में ध्यान कॉपी व किताबों पर होना चाहिए, उस उम्र में पिता के नक्शेदम पर चलते हुए पुलिस टीम पर फायरिंग कर मंसूबे जाहिर कर दिए हैं।

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Kannauj Case History-sheeter Munua Yadav handed over a gun to his minor son at age of giving him a book
Kannauj Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिस्ट्रीशीटर मुनुआ यादव के बेटे ने बचपन से ही पिता को अपराध जगत में सक्रिय देखा तो उसके अंदर भी रंगबाजी कूट-कूटकर भर गई। सोशल मीडिया पर अपलोड स्टाइलिश तस्वीरों, उसकी अदाओं से रवैया साफ दिख रहा है। किताबें पकड़ने की उम्र में ही नाबालिग बेटे ने बंदूक थाम पिता के नक्शेदम पर चलने के मंसूबे जाहिर कर दिए हैं।
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विशुनगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम धरनीधरपुर नगरिया निवासी हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुनुआ के तीन बेटों में सबसे छोटा बेटा नाबालिग है। ग्रामीणों की मानें तो उसकी उम्र 14-15 साल की होगी। वह पास के ही असालताबाद स्थित एक निजी स्कूल में कक्षा सात का छात्र है।
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 पिता की तरह ही उसे भी दबंग प्रवृत्ति का बताया जाता है। जिस उम्र में ध्यान कॉपी व किताबों पर होना चाहिए, उस उम्र में पिता के नक्शेदम पर चलते हुए पुलिस टीम पर फायरिंग कर मंसूबे जाहिर कर दिए हैं। उसने घर की छत पर चढ़कर पुलिस टीम पर फायरिंग की थी। 
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किशोरावस्था में बंदूक थाम कर इरादे जता दिए थे कि वह भी पिता की विरासत को संभालने के लिए तैयार है। हालांकि उसके दोनों बड़े भाई अपने-अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहकर नौकरी करते हैं। सबसे छोटा होने की वजह कर वह घर पर ही रहता था, लेकिन मन पढ़ने से ज्यादा दबंगई में लगता था।

कार्रवाई के लिए मंथन कर रही पलिस
पिता व मां के साथ ही नाबालिग को भी पुलिस ने हमला में आरोपी बनाया है। चूंकि उसकी उम्र कम है, इसलिए उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस मंथन कर रही है। समझा जा रहा है कि पुलिस की गोली से हुए जख्मों को भरने के बाद उसे बाल सुधार गृह भेजा जाएगा। हालांकि पुलिस के अधिकारी अभी इस पर कुछ नहीं बता रहे हैं।
 

मुनुआ का नाम सुनते ही खौफ से कांप जाते थे ग्रामीण
आपको बता दें कि गांव में दो भाइयों की हत्या कर सुर्खियों में आया मुनुआ यादव कुछ ही दिनों में ग्रामीणों के लिए आतंक का पर्याय बन गया। मुनुआ का नाम सुनते ही ग्रामीण खौफ से कांपकर दहशत में आ जाते थे। आलम यह था कि शाम ढलने के बाद ग्रामीण उसके घर की तरफ जाने की हिम्मत नहीं जुटाते थे। वर्ष 1998 में पहली हत्या करने वाला मुनुआ महज कुछ ही दिनों में अपराध जगत का बड़ा नाम बन गया। 

 
 

विशुनगढ़ पुलिस में उसकी पहचान हिस्ट्रीशीटर 40 ए है। उसके नाम का खौफ ग्रामीणों में इस कदर है कि उसकी बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। हिस्ट्रीशीटर के दो बेटों अमित व गौरव उसके साथ नहीं रहते। दबी जुबां में ग्रामीणों ने बताया कि बड़ा बेटा अमित पिछले दो सालों से घर पर नहीं आया है। मुुनुआ से अदावत करने की बात ग्रामीण सपने में भी नहीं सोच सकते थे।

ऐसे हुआ था पूरा घटनाक्रम
गौरतलब है कि कन्नौज जिले में विशुनगढ़ थाना क्षेत्र  के धरनीधरपुर नगरिया में सोमवार की शाम हुई हिस्ट्रीशीटर और पुलिस की मुठभेड़ ने की अशोक यादव उर्फ मुनुआ को भी पुलिस की दबिश की सटीक जानकारी थी। वह अपने पुत्र और पत्नी के साथ ही पुलिस से मोर्चा लेने के लिए असलहों के साथ तैयार बैठा था। घर के बाहर अलग-अलग दिशाओं में लगाए सीसीटीवी कैमरे की मदद से वह अंदर बैठक कर ही पुलिस पर निगाह लगाए था। पुलिस ने जैसे ही दस्तक दी, उसने गोली बरसानी शुरू कर दी। उसी फायरिंग के दौरान लगी गोली ने सिपाही सचिन राठी की जान ले ली।

 

पुलिस भले ही हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुनुआ को हल्के में लेकर पूरी तैयारी के साथ नहीं पहुंची, लेकिन खुद मुनुआ ने पुलिस की दबिश को हल्के में नहीं लिया। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए उसने घर से भागने के बजाए पुलिस से मोर्चा लेने का मंसूबा बनाया। इसके लिए उसने घर में रखे अपने असलहों तमंचा, डबल बैरल बंदूक, रायफल के साथ डट गया। वह घर बैठकर ही मकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से पुलिस के आने की राह तकने लगा।

फिर जैसे ही पुलिस ने उसके घर पर दस्तक दी, पहले तो उसने हवाई फायरिंग करके डराने की कोशिश की। पत्नी सीसीटीवी से पुलिस पर निगाह रखकर उनकी सूचना पति व बेटे को दो रही थी। दोनों पुलिस पर निशाना साध रहे थे। इसके बाद ताबड़तोड़ फायर झोंकने शुरू कर दिए। बाकी के लोग अशोक को पकड़ने के लिए मोर्चाबंदी करने में लग गए। बीच-बीच में अशोक पुलिस को छकाने के लिए फायरिंग करता रहा।

घर से बरामद हुआ असलहों का जखीरा

अंधेरा होने पर जैसे ही उसने भागने की कोशिश की, पुलिस की जवाबी गोली में वह और उसका पुत्र जख्मी हो गया। दोनों के गिरते ही पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। उन दोनों की मदद कर रही श्यामादेवी को भी दबोच लिया गया। हिस्ट्रीशीटर को दबोचने के बाद उसके घर की तलाशी के दौरान पुलिस को वहां से असलहों का जखीरा मिला। पांच तमंचे, एक डबल बैरल और एक रायफल भी बरामद हुई है।
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