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सुहाग सलामत रखती काली देवी
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sun, 18 Oct 2015 12:38 AM IST
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शहर के विशुनगढ़ रोड के पास रामपुर बैजू में काली
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देवी की प्राचीन मठिया बनी हुई है। मठिया के गर्भगृह में शंकर जी के ऊपर
खड़ी काली देवी मूर्ति स्थापित है। मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित
काली देवी सुहाग को सलामत रखने वाली हैं।
इसके चलते यहां पूजन के लिए महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ती है। शारदीय और चैत्र के नवरात्र में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में और भी इजाफा हो जाता है। काली मठिया के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर वर्षों पुराना है। मंदिर के गर्भगृह में पत्थर की विकराल रूप में काली देवी की मूर्ति मौजूद है।
क्रोधित अवस्था में शंकर के ऊपर पैर रखे मूर्ति के चार हाथ हैं। गले में मुंडों की माला पड़ी है। हाथों में त्रिशूल, कटार, मुंड और खप्पर पकड़े हैं। पहले यहां छोटी सी मठिया बनी हुई थी। आस्था का केंद्र बने इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ का इजाफा होता चला गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर का निर्माण करा दिया।
कहा जाता है कि यह देवी सुहाग को सलामत रखती हैं। नवरात्रों में यहां पूजन की महत्ता और बढ़ जाती है। नवमी पर ज्वारे चढ़ाने की परंपरा भी है। शादी के लिए बारात लेकर निकलने वाले दूल्हे यहां शीश जरूर नवाजते हैं। मुंडन, अन्न प्राशन और विवाह के अवसरों पर तेल चढ़ाने का कार्यक्रम भी यहां होता है।
इसके चलते यहां पूजन के लिए महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ती है। शारदीय और चैत्र के नवरात्र में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में और भी इजाफा हो जाता है। काली मठिया के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर वर्षों पुराना है। मंदिर के गर्भगृह में पत्थर की विकराल रूप में काली देवी की मूर्ति मौजूद है।
क्रोधित अवस्था में शंकर के ऊपर पैर रखे मूर्ति के चार हाथ हैं। गले में मुंडों की माला पड़ी है। हाथों में त्रिशूल, कटार, मुंड और खप्पर पकड़े हैं। पहले यहां छोटी सी मठिया बनी हुई थी। आस्था का केंद्र बने इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ का इजाफा होता चला गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर का निर्माण करा दिया।
कहा जाता है कि यह देवी सुहाग को सलामत रखती हैं। नवरात्रों में यहां पूजन की महत्ता और बढ़ जाती है। नवमी पर ज्वारे चढ़ाने की परंपरा भी है। शादी के लिए बारात लेकर निकलने वाले दूल्हे यहां शीश जरूर नवाजते हैं। मुंडन, अन्न प्राशन और विवाह के अवसरों पर तेल चढ़ाने का कार्यक्रम भी यहां होता है।