{"_id":"bb4b96e3ee8fc4b6cf9168759b790641","slug":"infected-syringe-throwing-open-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुले में फेंक रहे संक्रमित सिरिंज ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुले में फेंक रहे संक्रमित सिरिंज
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Wed, 01 Apr 2015 12:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण किसी भी व्यक्ति की जान जोखिम में पड़ सकती है। प्रशिक्षण लेने के बाद भी विभागीय अफसर संक्रमित सुइयों को खुले में फेंक रहे हैं। जो किसी को भी बीमारी की चपेट में ले सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष इस्तेमाल की गई सिरिंज के निस्तारण से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रतिवर्ष हजारों रुपये इस प्रशिक्षण में सरकार खर्च करती है। प्रशिक्षण पाने के बाद इस नसीहत को स्वास्थ्य विभाग अमल नहीं करता है। इसका उदाहरण मंगलवार को विनोद दीक्षित चिकित्सालय परिसर में देखने को मिला।
अस्पताल परिसर में दर्जनों इस्तेमाल की गई सिरिंज पड़ी मिलीं। स्वास्थ्य महकमा भी इन सिरिंज को देखता तो है, लेकिन उन्हें उठवाने की जहमत नहीं करता। यही नहीं प्रत्येक अस्पताल में सिरिंज इस्तेमाल करने के बाद उसकी निडिल काटने के लिए कटर भी दिए गए हैं। लेकिन एक भी सिरिंज की निडिल नहीं काटी गयी थी।
विज्ञापन
इस तरह की लापरवाही स्वास्थ्य विभाग की ओर से बरती जा रही है। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. पीएन बाजपेई का कहना है कि सभी अस्पतालों में सिरिंज निस्तारण के लिए कटर के अलावा लाल-पीले व नीले रंग के डिब्बे भी रखवाए गए हैं।
इसमें इस्तेमाल की गई सुई व सिरिंज के अलावा अन्य कचरे को डालने का निर्देश है। यदि खुले में सिरिंज को फेंका गया है तो अस्पताल के प्रभारी जिम्मेदार है। इसकी छानबीन कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष इस्तेमाल की गई सिरिंज के निस्तारण से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रतिवर्ष हजारों रुपये इस प्रशिक्षण में सरकार खर्च करती है। प्रशिक्षण पाने के बाद इस नसीहत को स्वास्थ्य विभाग अमल नहीं करता है। इसका उदाहरण मंगलवार को विनोद दीक्षित चिकित्सालय परिसर में देखने को मिला।
विज्ञापन
अस्पताल परिसर में दर्जनों इस्तेमाल की गई सिरिंज पड़ी मिलीं। स्वास्थ्य महकमा भी इन सिरिंज को देखता तो है, लेकिन उन्हें उठवाने की जहमत नहीं करता। यही नहीं प्रत्येक अस्पताल में सिरिंज इस्तेमाल करने के बाद उसकी निडिल काटने के लिए कटर भी दिए गए हैं। लेकिन एक भी सिरिंज की निडिल नहीं काटी गयी थी।
विज्ञापन
इस तरह की लापरवाही स्वास्थ्य विभाग की ओर से बरती जा रही है। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. पीएन बाजपेई का कहना है कि सभी अस्पतालों में सिरिंज निस्तारण के लिए कटर के अलावा लाल-पीले व नीले रंग के डिब्बे भी रखवाए गए हैं।
इसमें इस्तेमाल की गई सुई व सिरिंज के अलावा अन्य कचरे को डालने का निर्देश है। यदि खुले में सिरिंज को फेंका गया है तो अस्पताल के प्रभारी जिम्मेदार है। इसकी छानबीन कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।