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Kannauj News: आईसीयू खुद वेंटिलेटर पर, 10 बेड के भरोसे हजारों की आबादी

Mon, 27 Apr 2026 11:34 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 11:34 PM IST
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ICU itself on ventilator, population of thousands dependent on 10 beds
तिर्वा (कन्नौज)। राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की कलई खुलती नजर आ रही है। गंभीर मरीजों के लिए उम्मीद बताया जाने वाला आईसीयू वार्ड खुद ही बीमार है। संसाधनों की भारी कमी के चलते यहां से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में धकेलना यानी रेफर करना एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है। आलम यह है कि 10 बेड के भरोसे हजारों की आबादी निर्भर है।
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बाबा साहेब डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर चिकित्सा महाविद्यालय में 10 बेड का आईसीयू संचालित है। इसे अब बढ़ाकर 20 करने का दावा किया जा रहा है। हकीकत यह है कि मौजूदा 10 बेड पर ही व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं। कॉलेज प्रशासन एक माह में 250 मरीजों के इलाज को एक उपलब्धि बता रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि बुनियादी सुविधाओं और विशेषज्ञों की कमी के कारण हाल ही में दो बुजुर्ग हृदय रोगियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। नाजुक हालत में उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका और मौत के बाद प्रशासन केवल व्यवस्थाओं के सुधार का राग अलाप रहा है।
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अस्पताल में गंभीर मरीजों की जान जोखिम में है क्योंकि अत्यधिक गंभीर होते ही कॉलेज प्रशासन पल्ला झाड़ते हुए उन्हें बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर देता है। आईसीयू में तैनात स्टाफ की संख्या भी जरूरत के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। महज तीन डॉक्टरों और सीमित नर्सों के भरोसे 24 घंटे की देखभाल का दावा खोखला नजर आता है। प्रशासन नई नियुक्तियों का इंतज़ार कर रहा है।
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हालत गंभीर देख कानपुर कर देते रेफर
राजकीय मेडिकल कॉलेज का आलम यह है कि यहां जैसे ही कोई गंभीर मरीज आता है तो चिकित्सक पहले ही हाथ खड़े कर देते हैं। थोड़ी देर में तीमारदार को रेफर की पर्ची थमा दी जाती है। आईसीयू में यदि बेड उपलब्ध भी हों तो खाली नहीं बताकर टरका दिया जाता है। ज्यादातर मरीजों को सैफई या कानपुर रेफर कर दिया जाता है। बताया गया कि आईसीयू में तैनात स्टाफ भी आए दिन नदारद रहता है।

वर्जन
सर्जरी और अन्य विभागों में ऑपरेशन के बाद मरीजों को आईसीयू में रखा जाता है। ताकि उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और वह तेजी से रिकवर कर सकें। सड़क हादसों में घायल मरीजों के लिए भी आईसीयू अहम भूमिका निभा रहा है। अत्यधिक गंभीर मरीजों को ही रेफर किया जाता है।
-डॉ. सीपी पाल, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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