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Kannauj News: पति-ससुर ने आगे पढ़ाया और बन गईं अफसर

Mon, 16 Oct 2023 11:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज Updated Mon, 16 Oct 2023 11:29 AM IST
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Husband and father-in-law taught her further and became an officer
कन्नौज। अमूमन पुरुष की सफलता के पीछे किसी महिला का योगदान माना जाता है, यहां नगर पालिका की जिम्मेदारी संभाल रहीं अधिशासी अधिकारी नीलम चौधरी को पहले पिता ने पढ़ाया। शादी के बाद पति और ससुर ने आगे बढ़ाया। उसके बाद सरकारी सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। नतीजा वह आज प्रशासनिक अधिकारी की जिम्मेदारी निभा रही हैं। नौकरी और परिवार के बीच सामंजस्य बिठाकर वह सरकार से स्वच्छता अभियान का अवार्ड भी हासिल कर चुकी हैं।
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प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के दौरान परिवार की जिम्मेदारी निभाने में आने वाली चुनौतियाें का सामना करने के साथ ही प्रशासनिक दायित्व निभाना आसान नहीं होता है। कन्नौज नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी नीलम चौधरी कहती हैं कि पिता पीसीएस अधिकारी थे। उनकी तैनाती उत्तराखंड में थी। बचपन से उनको देखकर ही प्रशासनिक सेवा में आना चाहती थीं। देहरादून विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडल के साथ परास्नातक की परीक्षा में कामयाबी हासिल की। पारिवारिक वजहों से जल्दी ही शादी हो गई। पति हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड लखनऊ में इंजीनियर के पद पर हैं जहां पर देश की रक्षा के लिए लड़ाकू विमान बनाए जाते हैं । शादी के बाद पति और ससुर जी की प्रेरणा से फिर से पढ़ाई शुरू की और वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की। कहती हैं कि एक बेटी की मां के रूप में उसको समय न दे पाने का दुख हमेशा होता है । पर पति हमेशा मनोबल बढ़ाते हैं। अपने कार्य को सर्वोत्तम तरीके से करने के लिए प्रेरित करते हैं ।
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पीसीएस पिता से मिली अफसर बनने की प्रेरणा
मूलरूप से बस्ती की निवासी नीलम चौधरी बताती हैं कि पिता उत्तराखंड में पीसीएस ऑफिसर थे उत्तराखंड कैडर में। पिता की नौकरी की वजह कर शुरू से ही उत्तराखंड में रहना हुआ। वहां अल्मोड़ा और देहरादून से पढ़ाई की। शादी आंबेडकर नगर में हुई। उसी के बाद उत्तर प्रदेश में रहना शुरू किया। फिर लखनऊ में रहकर पति की मदद से आगे की पढ़ाई और प्रशासनिक सेवा की तैयारी की। वर्ष 2015 में चयन हुआ। अब तक लखीमपुर-खीरी, इटावा, अलीगढ़, कानपुर, बरेली, आगरा की अलग-अलग नगर पालिकाओं में ईओ की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। इस नौकरी में आने से पहले कई नौकरी छोड़ी है। सबसे पहले पौढ़ी गढ़वाल में लेक्चरर, फिर बिजनौर के नवोदय विद्यालय लेक्चरर, उसके बाद एडीओ समाज कल्याण, एडीओ पंचायती राज, कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर के पद पर चयन हुआ, लेकिन उन नौकरी को करने का मन नहीं हुआ। भूगोल विषय से नेट जेआरएफ भी की है, लेकिन पीएचडी नहीं कर पाने का मलाल है।
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मिल चुका है स्वच्छता सम्मान
नीलम चौधरी कहती हैं कि अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाने का उनमें जुनून है। साफ-सफाई नौकरी से पहले भी पसंद है। नगर पालिका के सबसे बड़े अधिकारी होने के नाते इस पर खूब फोकस रहता है। यही वजह है कि सरकार की ओर से उन्हें पिछले चार सालों में दो बार दिल्ली में सम्मानित होने का मौका मिला है। आगे भी वह अनाथ आश्रम या वृद्धाश्रम खोलकर समाज सेवा से जुड़ी रहना चाहती हैं।
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