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Kannauj News: खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा, तटवर्ती गांव में घुसा पानी
Tue, 12 Aug 2025 01:33 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Tue, 12 Aug 2025 01:33 AM IST
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फोटो :16: महादेवी घाट पर लगातार बढ़ रहा गंगा का पानी। संवाद
कन्नौज। नरौरा बांध से सोमवार को 2.67 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया, जिससे गंगा का जलस्तर अब खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा अब खतरे के निशान से महज 63 सेंटीमीटर दूर हैं, जिससे तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। अभी केवल कासिमपुर गांव में पानी घुसा है, लेकिन आने वाले दिनों में अन्य गांवों को भी चपेट में ले सकता है। कासिमपुर गांव के लोगों को बाहर निकाल कर बाढ़ राहत शिविर में भेजा गया है।
सोमवार को गंगा का जलस्तर 125.340 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 63 सेंटीमीटर नीचे है। कासिमपुर गांव में तेजी से कटान हो रहा है, जिससे यहां के लोगों को निकाल कर बख्शीपुरवा गांव में बने बाढ़ राहत शिविर में भेजा जा रहा है।
गंगा के साथ काली नदी में भी तेजी से पानी बढ़ रहा है, जिससे मेहंदीपुर, कटरी गंगपुर, महमूदपुर बीजा, गुमटिया, चौराचांदपुर, सलेमपुर ताराबांगर, चौधरियापुर बांगर, जुकइया समेत कई गांवों में खेतों में पानी भर गया है और हजारों बीघा सब्जी की फसल नष्ट हो गई है। चौराचांदपुर में तो गोशाला में पानी कमर तक भर गया है, जिससे यहां संरक्षित 150 गोवंशों को गुमटिया गांव के पास ऊंचाई पर बांस के टट्टर लगाकर बंद किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई मवेशी तो भाग गए हैं, जिनको खोजा जा रहा है।
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इनसेट--
गंगा-काली नदी के दोआब में होती हजारों में बीघा खेती
चौराचांदपुर गांव के लोगों ने बताया कि काली नदी और गंगा के दोआब में हजारों बीघा सब्जी की खेती की जाती है। वर्तमान में लौकी, तोरई, कद्दू, करेला, परवल, कुंदरू, धनियां, मिर्च, पालक, खीरा समेत कई प्रकार की सब्जियों के खेत पानी में डूब गए हैं। किसान नाव से खेतों में जाकर फल तोड़ रहे हैं और बाजार में बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि जलभराव के कारण खेत में सब्जी अब सड़ने लगी है। बाढ़ से किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
इनसेट--
कटान रोकने को लगाए लकड़ी के लट्ठे
कासिमपुर गांव में प्रशासन ने कटान को रोकने के लिए गंगा के पानी में लकड़ी के लट्ठे लगाए हैं। पानी का बहाव तेज होने के कारण यह जुगाड़ भी काम नहीं आ रही है। बता दें कि कासिमपुर गांव में करीब 150 मीटर सीसी रोड गंगा में समा चुकी है तो करीब 11 घर भी गंगा की गोद में समा चुके हैं। ऐसी स्थिति में हालात बदतर होते जा रहे हैं। सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता सूर्यमणि सिंह ने बताया कि कटान रोकने को तटबंध बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसका एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है।
वर्जन
गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की वजह से प्रतिदिन दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी गंगा में नरौरा बांध से छोड़ा जा रहा है। 11 बाढ़ चौकियों की स्थापना कर 22 लेखपालों व सचिवों की ड्यूटी लगाई गई। बाढ़ के हालातों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
-आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी
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सोमवार को गंगा का जलस्तर 125.340 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 63 सेंटीमीटर नीचे है। कासिमपुर गांव में तेजी से कटान हो रहा है, जिससे यहां के लोगों को निकाल कर बख्शीपुरवा गांव में बने बाढ़ राहत शिविर में भेजा जा रहा है।
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गंगा के साथ काली नदी में भी तेजी से पानी बढ़ रहा है, जिससे मेहंदीपुर, कटरी गंगपुर, महमूदपुर बीजा, गुमटिया, चौराचांदपुर, सलेमपुर ताराबांगर, चौधरियापुर बांगर, जुकइया समेत कई गांवों में खेतों में पानी भर गया है और हजारों बीघा सब्जी की फसल नष्ट हो गई है। चौराचांदपुर में तो गोशाला में पानी कमर तक भर गया है, जिससे यहां संरक्षित 150 गोवंशों को गुमटिया गांव के पास ऊंचाई पर बांस के टट्टर लगाकर बंद किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई मवेशी तो भाग गए हैं, जिनको खोजा जा रहा है।
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गंगा-काली नदी के दोआब में होती हजारों में बीघा खेती
चौराचांदपुर गांव के लोगों ने बताया कि काली नदी और गंगा के दोआब में हजारों बीघा सब्जी की खेती की जाती है। वर्तमान में लौकी, तोरई, कद्दू, करेला, परवल, कुंदरू, धनियां, मिर्च, पालक, खीरा समेत कई प्रकार की सब्जियों के खेत पानी में डूब गए हैं। किसान नाव से खेतों में जाकर फल तोड़ रहे हैं और बाजार में बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि जलभराव के कारण खेत में सब्जी अब सड़ने लगी है। बाढ़ से किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
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कटान रोकने को लगाए लकड़ी के लट्ठे
कासिमपुर गांव में प्रशासन ने कटान को रोकने के लिए गंगा के पानी में लकड़ी के लट्ठे लगाए हैं। पानी का बहाव तेज होने के कारण यह जुगाड़ भी काम नहीं आ रही है। बता दें कि कासिमपुर गांव में करीब 150 मीटर सीसी रोड गंगा में समा चुकी है तो करीब 11 घर भी गंगा की गोद में समा चुके हैं। ऐसी स्थिति में हालात बदतर होते जा रहे हैं। सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता सूर्यमणि सिंह ने बताया कि कटान रोकने को तटबंध बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसका एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है।
वर्जन
गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की वजह से प्रतिदिन दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी गंगा में नरौरा बांध से छोड़ा जा रहा है। 11 बाढ़ चौकियों की स्थापना कर 22 लेखपालों व सचिवों की ड्यूटी लगाई गई। बाढ़ के हालातों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
-आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी