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Kannauj News: हस्त नक्षत्र-गर करण, सिद्धि योग में मनेगा गंगा दशहरा
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गुगरापुर। गंगा दशहरा की शुरुआत चार जून को रात 11:53 बजे से हो गई है। यह तिथि पांच जून को रात्रि 2:12 बजे पर समाप्त हो जाएगी। पंडित विमलेश शास्त्री के अनुसार उदया तिथि में गंगा दशहरा का पर्व आज पांच जून को मनाया जाएगा।
पंडित विमलेश शास्त्री ने बताया कि इस बार गंगा दशहरा पर कई शुभ योगों का संयोग हो रहा है। इसमें सिद्धि योग, हस्त नक्षत्र, के साथ गर करण का संयोग शुभ है। उन्होंने बताया कि ब्रह्म पुराण व वाराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में गंगा जी धरती पर अवतरित हुई थी। गंगा दशहरा के दिन स्नान हमेशा शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। इससे स्नानार्थी को दोगुना फल प्राप्त होता है। पंचांग के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन स्नान का शुभमुहूर्त प्रातः काल चार बजे से सात बजे तक रहेगा। इसमें गंगा स्नान का विशेष महत्व है जब कि स्नान तो पूरे दिन ही चलता रहेगा।
इनसेट
आज यह वस्तुएं करें दान
- अन्न, फल और जल का दान करना अक्षय पुण्य की प्राप्ति के लिए होता है।
- गरीबों और जरूरतमंदों को वस्त्र, जूते और चप्पल दान करने से पुण्य मिलता है।
- छाता और घड़ा दान करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है, क्योंकि यह जल से संबंधित वस्तुएं हैं।
- सूर्य को अर्घ्य देने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और दीप दान से देव और पितृ प्रसन्न होते हैं।
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पंडित विमलेश शास्त्री ने बताया कि इस बार गंगा दशहरा पर कई शुभ योगों का संयोग हो रहा है। इसमें सिद्धि योग, हस्त नक्षत्र, के साथ गर करण का संयोग शुभ है। उन्होंने बताया कि ब्रह्म पुराण व वाराह पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में गंगा जी धरती पर अवतरित हुई थी। गंगा दशहरा के दिन स्नान हमेशा शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। इससे स्नानार्थी को दोगुना फल प्राप्त होता है। पंचांग के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन स्नान का शुभमुहूर्त प्रातः काल चार बजे से सात बजे तक रहेगा। इसमें गंगा स्नान का विशेष महत्व है जब कि स्नान तो पूरे दिन ही चलता रहेगा।
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आज यह वस्तुएं करें दान
- अन्न, फल और जल का दान करना अक्षय पुण्य की प्राप्ति के लिए होता है।
- गरीबों और जरूरतमंदों को वस्त्र, जूते और चप्पल दान करने से पुण्य मिलता है।
- छाता और घड़ा दान करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है, क्योंकि यह जल से संबंधित वस्तुएं हैं।
- सूर्य को अर्घ्य देने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और दीप दान से देव और पितृ प्रसन्न होते हैं।