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Kannauj News: इत्रनगरी के पांच पर्यटन स्थलों का 10 करोड़ से होगा विकास

Wed, 13 Aug 2025 11:49 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 Aug 2025 11:49 PM IST
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Five tourist spots of the perfume city will be developed with Rs 10 crore
कन्नौज। इत्र और इतिहास की नगरी की पुरातन सांस्कृतिक विरासत को फिर से समृद्ध किया जाएगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपये से पांच धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों का विकास किया जाएगा। पर्यटन विभाग की संस्तुति पर शासन से मंजूरी मिलते ही लखनऊ से आई आर्किटेक्ट की टीम ने पर्यटन स्थल का निरीक्षण किया। निर्माण के लिए उसका लेआउट तैयार किया। इसके अलावा जिले अन्य पौराणिक व धार्मिक स्थलों को चिह्नित किया जा रहा है। उन्हें पुनर्विकसित कर दर्शनीय स्थल बनाने की योजना है।
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इत्रनगरी में कई पौराणिक, धार्मिक व सांस्कृतिक स्थल हैं, जो अपने अस्तित्च के लिए लड़ रहे हैं। शासन से ऐसे पर्यटन स्थलों की सूची मांगी गई थी, जिन्हें विकसित कर फिर से दर्शनीय स्थल बनाया जाना है। इसके लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से भी सुझाव मांगे गए थे। डीएम ने शहर से सटे ग्राम चौधरियापुर में बने प्राचीन बाबा विश्वनाथ मंदिर, ग्राम चियासर स्थित पौराणित च्यवन ऋषि आश्रम, सौरिख क्षेत्र के ग्राम हरिभानपुर स्थित बाबा ऐदखेड़ा शिवमंदिर, छिबरामऊ के नगला लक्षीराम स्थित बुद्ध विहार तथा सौरिख के ग्राम शंकरपुर स्थित आंबेडकर पार्क का प्रस्ताव भेजा।
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पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से लखनऊ से आए आर्किटेक्ट आलोक कुमार की टीम ने इन सभी पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया और उसका लेआउट व नक्शा तैयार किया। भवन की डिजायन से लेकर सड़क और अन्य कई बिंदुओं पर आसपास के लोगों से भी जानकारी ली। जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. मकबूल ने बताया कि शासन ने बजट मिल गया है। आर्किटेक्ट जो डिजायन तैयार कर भेजेंगे, उसी के अनुसार पर्यटन स्थलों का विकास कराया जाएगा।
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सिद्धपीठ मां फूलमती देवी व उद्दालक ऋषि आश्रम भी होंगे विकसित
पर्यटन विभाग ने प्रथम चरण में शहर के मकरंदनगर स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर तथा तालग्राम क्षेत्र के ग्राम महोना स्थित उद्दालक ऋषि आश्रम का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। इसके लिए शासन ने धनराशि पहले की आवंटित कर दी थी। पर्यटन अधिकारी ने बताया कि कार्यदायी संस्थाओं ने इन दोनों जगह पर काम शुरू कर दिया है। जल्द ही दोनों पौराणिक स्थल नए लुक में दिखाई देंगे।
आइए जानें इन स्थलों को

बाबा विश्वनाथ मंदिर, चौधरियापुर
शहर से तीन किलोमीटर दूर ग्राम चौधरियापुर बांगर स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर की स्थापना छठवीं शताब्दी में हुई थी। बताया जाता है कि यह शिवलिंग पतित पावनी मां गंगा की गोद से निकला था, जिसे काशी के बाबा विश्वनाथ मंदिर के पुजारियों ने स्थापित किया था। यह शिवलिंग काशी के ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति है।
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च्यवन ऋषि आश्रम, चियासर
मोक्षदायिनी गंगा के किनारे चियासर गांव में बना च्यवन ऋषि आश्रम का वर्णन श्रीमद् भागवत महापुराण में है। विश्व का पहला च्यवनप्राश अवलेह यहीं पर बनाया गया है। वर्तमान में यहां साधु-संत रहते हैं और एक प्राचीन मंदिर है और संस्कृत विद्यालय भी है।
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बाबा ऐदखेड़ा शिवमंदिर, हरिभानपुर
सौरिख क्षेत्र के ग्राम हरिभानपुर में बाबा ऐदखेड़ा शिवमंदिर है। बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग महाभारत कालीन है। कई पुस्तकों में लिखा है कि वनवास के दौरान पांडव माता कुंती के साथ यहां रुके थे और उन्होंने ही शिवलिंग की स्थापना की थी।
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आंबेडकर पार्क, शंकरपुर
सौरिख कस्बे से सटे हुए गांव शंकरपुर में आंबेडकर पार्क बना है। यहां हर साल आंबेडकर जयंती तथा अन्य पर्वों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। प्रतिदिन सैंकड़ों लोग पार्क में घूमने के लिए जाते हैं, जिससे यह पर्यटनस्थल के रूप में विकसित होने लगा है।

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तथागत बुद्ध विहार, नगला लक्षीराम
छिबरामऊ शहर से सटे गांव नगला लक्षीराम में तथागत बु्द्ध विहार बना है। यह जिला पंचायत अध्यक्ष प्रिया शाक्य का गांव है। वर्तमान में यहां देश के सबसे ऊंचे अशोक स्तंभ का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें श्रीलंका समेत कई देशों का सहयोग है।
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